स्टूडेंट्स सीखेंगे सांप, तेंदुआ, मगरमच्छ पकड़ना, आपदा प्रबंधन की होगी ट्रेनिंग, MP के इस कॉलेज में स्पेशल कोर्स

स्टूडेंट्स सीखेंगे सांप, तेंदुआ, मगरमच्छ पकड़ना, आपदा प्रबंधन की होगी ट्रेनिंग, MP के इस कॉलेज में स्पेशल कोर्स


Khargone News: मध्य प्रदेश के खरगोन जिले मे अब विद्यार्थी पढ़ाई के साथ-साथ सांप, तेंदुआ, मगरमच्छ जैसे वन्य जीवों का रेस्क्यू करना, आपदा प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और जल संवर्धन की ट्रेनिंग भी लेंगे. यह स्पेशल कोर्स जिले की आचार्य मंडन मिश्र शासकीय कॉलेज में प्रारंभ होगा. इसके लिए कॉलेज प्रशासन और क्षेत्र में वन्य जीवों के संरक्षण और आपदा प्रबंधन के लिए कार्य करने वाली संस्था ईको वेलफेयर सोसाइटी के बीच समझौता (MOU) हुआ है. 6 महीने का यह ट्रेनिंग कोर्स पूरी तरह निःशुल्क रहेगा. संभवतः इसी साल फरवरी माह से यह कोर्स प्रारंभ होगा.

इसलिए ये ट्रेनिंग जरूरी
कॉलेज प्रशासन के अनुसार, इस ट्रेनिंग का मकसद छात्रों को समाज के लिए उपयोगी बनाना है. बदलते समय में बाढ़, भूकंप, आगजनी, भीड़ नियंत्रण और वन्य जीवों के रेस्क्यू जैसी स्थितियों में प्रशिक्षित लोगों की जरूरत लगातार बढ़ रही है. इसी को ध्यान में रखते हुए कॉलेज ने यह पहल की है, ताकि विद्यार्थी पढ़ाई के साथ-साथ ऐसी स्किल भी सीख सकें, जो आगे चलकर उनके काम आए.

ट्रेनिंग के लिए करना होगा आवेदन
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एमएस चौहान ने बताया, आचार्य मंडन मिश्र शासकीय महाविद्यालय और ईको वेलफेयर सोसाइटी के बीच हुए इस एमओयू के जरिए विद्यार्थियों को पर्यावरण, आपदा प्रबंधन और वन्य जीव संरक्षण से जुड़ी ट्रेनिंग दी जाएगी. यह एमओयू कॉलेज के आईक्यूएसी के अंतर्गत किया गया है, जिसके तहत अलग-अलग एक्टिविटी कराई जाती हैं. आने वाले समय में यह पहल कॉलेज के नैक मूल्यांकन में भी अहम भूमिका निभाएगी. ट्रेनिंग के लिए जल्द ही आवेदन प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी.

विद्यार्थियों को इससे क्या फायदा
इसमें ऐसे विद्यार्थियों को चुना जाएगा, जिनकी इन क्षेत्रों में रुचि है. जरूरत पड़ने पर यही प्रशिक्षित छात्र आपदा प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और वन्य जीवों के रेस्क्यू में प्रशासन और समाज की मदद कर सकेंगे. वहीं, इस ट्रेनिंग के बाद छात्रों के लिए रोजगार के नए रास्ते भी खुल सकते हैं. आपदा प्रबंधन, पर्यावरण और वन्य जीव संरक्षण जैसे क्षेत्रों में सरकार और गैर सरकारी संस्थाओं द्वारा समय समय पर रिक्तियां निकाली जाती है, जिनमें प्रशिक्षित युवाओं को प्राथमिकता दी जाती है.

कितने समय में पूरा होगा कोर्स
ईको वेलफेयर सोसाइटी के संस्थापक नवीन कुमार ने बताया, कॉलेज के साथ यह एमओयू तीन साल के लिए किया गया है. इस अवधि में संस्था की ओर से बच्चों को पूरी तरह फ्री ट्रेनिंग दी जाएगी. छह महीने की ट्रेनिंग पूरी करने के बाद विद्यार्थियों को सर्टिफिकेट भी दिया जाएगा. विद्यार्थियों चाहे तो एक साल की ट्रेनिंग भी ले सकेंगे. ट्रेनिंग के दौरान छात्रों को साफ-सफाई, जल प्रबंधन, प्राकृतिक आपदाएं जैसे बाढ़, सुनामी, भूकंप, भीड़ नियंत्रण सहित छोटे वन्य जीवों के रेस्क्यू के बारे में सिखाया जाएगा.

क्या है ईको विंग और रेस्क्यू विंग
उन्होंने आगे बताया, शुरुआत में इस कॉलेज से चयनित कुछ विद्यार्थियों को मास्टर ट्रेनर के रूप में तैयार किया जाएगा. ये मास्टर ट्रेनर आगे चलकर दूसरे कॉलेज और स्कूलों में जाकर बच्चों को ट्रेनिंग देंगे. इस कार्यक्रम में दो तरह के कोर्स रखे गए हैं. पहला ईको विंग और दूसरा रेस्क्यू विंग. ईको विंग में पर्यावरण संरक्षण, जल संवर्धन और प्रकृति से जुड़ी जानकारियां पौधरोपण, सफाई अभियान जैसे गतिविधियों के जरिए दी जाएंगी. वहीं, रेस्क्यू विंग में आपदा प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण और वाइल्ड लाइफ में सांप, तेंदुआ, मगरमच्छ जैसे जंगली जानवरों के रेस्क्यू और बचाव की ट्रेनिंग दी जाएगी. विद्यार्थी अपनी रुचि अनुसार कोर्स का चयन कर सकेंगे.



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