शिवपुरी. कलेक्ट्रेट में जनसुनवाई के दौरान उस समय हंगामे की स्थिति बन गई, जब एक दिव्यांग युवक अपनी मांग को लेकर अफसरों के सामने ही बिफर पड़ा. युवक बैटरी से चलने वाली ट्राइसाइकिल की मांग कर रहा था और उसका आरोप था कि वह पिछले दो साल से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा है. प्रशासन का कहना था कि युवक को नियमों के तहत फिलहाल बैटरी वाली ट्राइसाइकिल नहीं दी जा सकती. इसी बात को लेकर विवाद बढ़ गया. जनसुनवाई कक्ष में अफसरों और कर्मचारियों के सामने हुए इस घटनाक्रम ने प्रशासनिक संवेदनशीलता और सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर दिए. हंगामे के बाद युवक ने केंद्रीय मंत्री और क्षेत्रीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया से हस्तक्षेप की गुहार लगाई.
यह मामला सिर्फ एक ट्राइसाइकिल की मांग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दिव्यांगों को मिलने वाली सुविधाओं, पात्रता के नियमों और प्रशासनिक प्रक्रिया की जटिलताओं को भी उजागर करता है. जहां एक ओर दिव्यांग युवक खुद को रोजगार के लिए बैटरी वाली ट्राइसाइकिल जरूरी बता रहा है, वहीं प्रशासन नियमों और मापदंडों का हवाला देकर हाथ से चलने वाली ट्राइसाइकिल देने की बात कर रहा है. इसी टकराव के बीच कलेक्ट्रेट परिसर में तनाव की स्थिति बनी. सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और रिपोर्ट्स में युवक को बाहर निकाले जाने के दावे भी किए गए हैं, हालांकि प्रशासन ने इन आरोपों पर अलग सफाई दी है.
हंगामा करने वाले युवक की पहचान अशफाक खान के रूप में हुई है. अशफाक शिवपुरी शहर के वार्ड नंबर-22, नीलगढ़ चौराहे के पास का रहने वाला है. वह दोनों पैरों से दिव्यांग है और उसके पास 80 प्रतिशत दिव्यांगता का प्रमाण पत्र है. अशफाक का कहना है कि उसकी शारीरिक स्थिति के कारण हाथ से चलने वाली ट्राइसाइकिल उसके लिए बेहद कठिन और दर्दनाक है.
जनसुनवाई में कैसे बढ़ा विवाद
जनसुनवाई के दौरान अशफाक खान ने जिला कलेक्टर से बैटरी से चलने वाली ट्राइसाइकिल देने की मांग रखी. अधिकारियों ने बताया कि उसे वर्ष 2023 में एक ट्राइसाइकिल दी जा चुकी है. नियमों के अनुसार तीन साल के भीतर दोबारा ट्राइसाइकिल नहीं दी जा सकती. इसी बात को सुनते ही अशफाक नाराज हो गया और उसने कलेक्ट्रेट परिसर में हंगामा शुरू कर दिया.
प्रशासन ने क्या ऑफर किया
प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया कि वर्तमान में विभाग के पास बिना बैटरी वाली, हैंड ऑपरेटेड ट्राइसाइकिल उपलब्ध है. वही अशफाक को दी जा सकती है. अधिकारियों के अनुसार बैटरी वाली ट्राइसाइकिल के लिए पात्रता के कड़े नियम हैं और अशफाक फिलहाल उन मानकों में फिट नहीं बैठता.
दिव्यांग युवक का तर्क और दर्द
अशफाक खान का कहना है कि अगर उसे बैटरी वाली ट्राइसाइकिल मिल जाए, तो वह छोटा-मोटा व्यापार कर सकेगा. वह सामान बेचकर अपने परिवार का भरण-पोषण करना चाहता है. उसका आरोप है कि एक साधारण साइकिल के लिए भी उसे दो साल तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़े.
सिंधिया से क्यों मांगी मदद
प्रशासनिक रवैये से नाराज होकर अशफाक खान ने अब केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से न्याय की गुहार लगाई है. उसने कहा कि सरकारी नियम गरीब और दिव्यांग लोगों की मदद के लिए होने चाहिए, न कि उन्हें और लाचार बनाने के लिए.
सोशल मीडिया पर उठे सवाल
हंगामे के दौरान कुछ सोशल मीडिया वीडियो और रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि अशफाक को कर्मचारियों ने धक्के देकर या जबरन जनसुनवाई कक्ष से बाहर निकाला. इससे प्रशासन की संवेदनहीनता पर सवाल खड़े हुए. हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. बाद में सामाजिक न्याय विभाग की ओर से स्थिति स्पष्ट की गई. विभाग ने बताया कि अशफाक खान का आवेदन स्वीकृत हो चुका है. उसे 7 अक्टूबर 2026 को बैटरी से चलने वाली ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराई जाएगी. विभाग का कहना है कि प्रक्रिया और पात्रता नियमों के तहत ही यह तारीख तय की गई है.