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BCB चीफ अमीनुल इस्लाम बुलबुल अब यह कह रहे हैं कि क्रिकेट की लोकप्रियता घट रही है यह बात उन्हें तभी समझ आई, जब आईसीसी ने बीसीबी की मांगें मानने से इनकार कर दिया. कुल मिलाकर, बांग्लादेश क्रिकेट एक अंधेरी गली में प्रवेश कर चुका है, जहां आगे कोई रोशनी नजर नहीं आती.
नई दिल्ली. जिस पल यह मुद्दा क्रिकेट पहले या राष्ट्र पहले का बन गया था, उसी पल तस्वीर साफ हो गई थी मौजूदा सत्ता व्यवस्था अपने ही लोगों की नजरों में कमजोर दिखने का जोखिम नहीं उठा सकती थी. इसके लिए अगर क्रिकेटरों और खुद क्रिकेट की कुर्बानी देनी पड़े, तो वह इसके लिए भी तैयार थी. बीसीबी अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम बुलबुल ने आईसीसी के फैसले को नाइंसाफी करार दिया और कहा कि वे अपनी लड़ाई जारी रखेंगे लेकिन जब आप अलग-थलग हों, कोने में खड़े हों और 2–14 से वोट हार चुके हों, तो सवाल उठता है लड़ेंगे कैसे?
बांग्लादेश में कुछ लोग अब भी किसी चमत्कार की उम्मीद लगाए बैठे हैं लेकिन हकीकत यह है कि चमत्कार बहुत कम होते हैं BCB चीफ अमीनुल इस्लाम बुलबुल अब यह कह रहे हैं कि क्रिकेट की लोकप्रियता घट रही है यह बात उन्हें तभी समझ आई, जब आईसीसी ने बीसीबी की मांगें मानने से इनकार कर दिया. कुल मिलाकर, बांग्लादेश क्रिकेट एक अंधेरी गली में प्रवेश कर चुका है, जहां आगे कोई रोशनी नजर नहीं आती.
भारत का किया अपमान
गुरुवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में बुलबुल को भारत को मानो शैतान के रूप में पेश करते सुनना लगभग हास्यास्पद था. याददाश्त भले ही छोटी हो, लेकिन बुलबुल के मामले में यह और भी चौंकाने वाला है. वह वही कप्तान थे, जिनके नेतृत्व में बांग्लादेश ने 25 साल पहले भारत के खिलाफ अपना पहला टेस्ट मैच खेला था. उन्हें सबसे बेहतर पता होना चाहिए कि अन्य आईसीसी सदस्यों के कड़े विरोध के बावजूद बांग्लादेश को टेस्ट दर्जा दिलाने में भारत ने कितनी अहम भूमिका निभाई थी. जहां तक क्रिकेट की घटती लोकप्रियता की बात है, तो शायद बुलबुल ने हालिया एशेज सीरीज़ नहीं देखी. दो टेस्ट मैच महज़ दो-दो दिन में खत्म होने के बावजूद कुल दर्शक संख्या लगभग दस लाख रही. भारत की हालिया व्हाइट-बॉल सीरीज़ दक्षिण अफ्रीका और न्यूज़ीलैंड के खिलाफ में भी स्टेडियम खचाखच भरे रहे.
बीसीबी जमकर हुई छीछालेदर
बीसीबी लगातार इस बात पर अड़ी हुई है कि मुस्ताफिज़ुर का मामला वर्ल्ड कप से जुड़ा हुआ है. आईसीसी इससे सहमत नहीं है और सच्चाई यह है कि लगभग सभी सदस्य बोर्ड बीसीबी की दलील को खारिज कर चुके हैं. लोकतांत्रिक दुनिया में आपको अपने अधिकारों की समझ होनी चाहिए और यह भी जानना चाहिए कि उन्हें कैसे इस्तेमाल किया जाए. मूर्खता से कोई फायदा नहीं होता, और बांग्लादेश ने इस पूरे मुद्दे को ऐसे मोड़ पर पहुंचा दिया, जहां से बिना चेहरे की साख बचाए निकलना अब मुमकिन नहीं रहा.
ओलंपिक खेलने का देख रहे सपना
यह दावा कि 20 करोड़ आबादी वाले देश का ओलंपिक में नहीं पहुंचना आईसीसी की नाकामी होगी, एक कड़वी हकीकत से सामना कराने की मांग करता है. बांग्लादेश क्रिकेट के किसी भी फॉर्मेट में शीर्ष छह टीमों में शामिल नहीं है और आयोजकों के मुताबिक 2028 ओलंपिक में केवल छह टीमें ही हिस्सा लेंगी. सच्चाई यह है कि यह बांग्लादेश क्रिकेट के लिए एक भारी आत्मघाती गोल है, जो एक अतिवादी राजनीतिक वर्ग को खुश करने के चक्कर में किया गया. पैंडोरा का पिटारा खोलने के बाद अब बांग्लादेश के राजनेताओं और क्रिकेट बोर्ड को इसके अंजाम के साथ जीना ही होगा.