मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में कांची माली समाज के युवा साल में एक दिन साड़ी पहन कर यह पर्व मनाते हैं. और गाजेबाजे के साथ ताप्ती नदी के राजघाट पर पहुंचकर पूजा अर्चना करते हैं यह पर्व मुंझे महाराज का

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में कांची माली समाज के युवा साल में एक दिन साड़ी पहन कर यह पर्व मनाते हैं. और गाजेबाजे के साथ ताप्ती नदी के राजघाट पर पहुंचकर पूजा अर्चना करते हैं यह पर्व मुंझे महाराज का


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मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में कांची माली समाज आज भी कई वर्षों पुरानी परंपरा का निर्वहन कर रहा है। संत पंचमी के अवसर पर मुंझे महाराज की शोभायात्रा निकाली जाती है. गन मुंझो को साड़ी पहनाई जाती है.

मोहन ढाकले/बुरहानपुर: मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में आज भी करीब 500 साल पुरानी परंपराओं का समाज द्वारा निर्वहन किया जाता है. जिले के रास्तीपुरा क्षेत्र में काची माली समाज के लोग निवास करते हैं इस समाज के लोगों का मानना है कि साल में एक दिन पुरुष हमारे यहां पर साड़ी पहनते हैं और मुंझे महाराज का उत्सव मनाते हैं यह परंपरा कई बरसों से चली आ रही है. पुरुष साड़ी पहनकर ताप्ती नदी पर स्नान करने के लिए पहुंचते हैं. यहां पर पूजा अर्चना करने के बाद मुंझे महाराज की शोभायात्रा निकाली जाती है और इसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं हजारों की संख्या में लोग इस आयोजन को देखने के लिए आते हैं.

सालों पुरानी परंपरा का हो रहा निर्वहन
लोकल 18 की टीम ने जब कांची माली समाज के सुधाकर महाजन से बात की तो उन्होंने बताया कि यह समाज की कई वर्षों पुरानी परंपरा है, जिसका आज भी निर्वहन हो रहा है. बसंत पंचमी के अवसर पर मुंझे महाराज की शोभायात्रा निकाली जाती है. गन मुंझो को साड़ी पहनाई जाती है. समाज के जो युवा हैं, वह भी यह साड़ी पहनना पसंद करते हैं. साड़ी पहनकर गाजे बाजे के साथ इनको ताप्ती नदी के राजघाट पर ले जाया जाता है वहां पर भगवान का स्नान कराकर यह पूजा अर्चना करते हैं जिले और परिवार में सुख शांति की कामना की जाती है.

500 साल पुरानी बताई जा रही है परंपरा
समाज के वरिष्ठ बताते हैं कि यह परंपरा करीब 500 साल पुरानी बताई जा रही है. उस जमाने से हमारे बुजुर्ग इस परंपरा का निर्वहन करते आ रहे हैं और आज की युवा पीढ़ी इस परंपरा का निर्वहन कर रही है. युवा पीढ़ी साल में एक दिन साड़ियां पहनकर इस पर्व को मनाती हैं और बड़ा उत्साह देखने को मिलता है. हजारों की संख्या में लोग इस उत्सव को देखने के लिए आते हैं और सभी लोग अपने परिवार के साथ इस उत्सव में शामिल होते हैं इसके बाद भोज का आयोजन होता है.

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मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में कांची माली समाज के युवा साल में एक दिन साड़ी पहन कर यह पर्व मनाते हैं. और गाजेबाजे के साथ ताप्ती नदी के राजघाट पर पहुंचकर पूजा अर्चना करते हैं यह पर्व मुंझे महाराज का



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