जाल में फंसकर रह गया डीटीई का सिस्टम: प्रदेश के पॉलिटेक्निक कॉलेजों में 10 सालों से नहीं हो पा रही है भर्ती – Bhopal News

जाल में फंसकर रह गया डीटीई का सिस्टम:  प्रदेश के पॉलिटेक्निक कॉलेजों में 10 सालों से नहीं हो पा रही है भर्ती – Bhopal News




तकनीकी शिक्षा विभाग (डीटीई) के पॉलिटेक्निक कॉलेजों में शिक्षक भर्ती की व्यवस्था खुद “भर्ती नियम-2004” के जाल में फंसकर ठप हो गई है। नतीजा यह है कि प्रदेश के शासकीय स्वशासी पॉलिटेक्निक महाविद्यालयों में व्याख्याता और सहायक प्राध्यापक जैसे अहम पद खाली पड़े हैं। 10 साल से व्याख्याता की भर्ती नहीं हो पा रही है। क्वालिटी एजुकेशन का दावा सिर्फ कागजों में सिमटता जा रहा है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि विभाग में सरकारी पदों को “डाइंग कैडर” जैसी स्थिति में डाल दिया गया है। नई भर्ती का रास्ता बंद होता दिख रहा है। असल समस्या की जड़ पॉलीटेक्निक भर्ती नियम-2004 है। इसके कारण एमपीपीएससी और गेट से चयनित शिक्षकों की नियुक्ति नियमित पदों पर नहीं, बल्कि जनभागीदारी सोसायटी के तहत हुई, जिससे विश्वसनीयता का लाभ नहीं मिला और कर्मचारी विसंगतियों में फंसे रहे। व्याख्याता के 1762 में से 1029 पद खाली यहां कार्यरत फैकल्टी का कहना है कि संविधान के अनुच्छेद 320 के अनुसार लोक सेवकों की नियुक्ति के लिए लोक सेवा आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की भूमिका तय है। इसके बावजूद शिक्षकों को शासन के पदों पर लेने के बजाय जनभागीदारी व्यवस्था के तहत जोड़ दिया गया। फैकल्टी का दावा है कि संभवतः ऐसा करने वाला मप्र इकलौता राज्य होगा। ऐसे में भर्ती नियम-2004 को विलोपित कर समस्त पदों को शासकीय पदों में संविलियन करने की जरूरत है। इससे भर्ती का रास्ता खुले और रिक्त पद भरे जा सकें। प्रदेशभर के पॉलिटेक्निक कॉलेजों में 2318 में से 1456 पद खाली हैं। इनमें से व्याख्याता के 1762 में से 1029 पद खाली हैं। इन पदों पर 10 साल से भर्ती नहीं हो पा रही है। प्रदेश स्तर पर नहीं हो रहा रोस्टर संधारण
भर्ती नियमों के कारण प्रदेश स्तर पर रोस्टर का संधारण नहीं हो पा रहा है। इसका असर आरक्षण व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। प्राचार्य, विभागाध्यक्ष और ऐकल पदों की स्थिति में पद अनारक्षित को आवंटित हो जाता है। आरक्षित वर्ग को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल पा रहा। इसलिए वे परेशान हैं। चयन की प्रक्रिया कानूनी पेंच में फंसी
सोसायटी के तहत ये पद प्रथम श्रेणी के होने के बावजूद एमपीपीएससी के माध्यम से नई नियुक्ति नहीं हो पा रही। दूसरी तरफ अन्य एजेंसी के जरिए चयन प्रक्रिया कानूनी पेंच में फंस गई है। इससे प्रदेश के इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक संस्थानों में अधिकांश शिक्षक पद रिक्त पड़े हैं। कॉलेज गेस्ट फैकल्टी से काम चला रहे हैं। नियमों को लेकर स्पष्ट स्थिति नहीं…
सोसायटी के तहत नियुक्तियों से शासन के नियमों की एकरूपता समाप्त हुई। संस्थाबार नियमों को लेकर असमंजस बना रहता है और ट्रांसफर नीति प्रभावित है। पद सोसायटी के होने से स्थानांतरण पर न्यायालयीन स्थगन मिल जाता है। भर्ती नियम-2004 के शिक्षकों को डीडीओ प्रभार नहीं मिल रहा। इससे और वेतन भुगतान प्रभावित, अनुदान मिलने में देरी से भुगतान टलता है। भर्ती कराई जाएगी
पॉलिटेक्निक कॉलेजों में फैकल्टी के खाली पदों पर भर्ती के लिए कार्रवाई प्रचलित है। इसके लिए नीति निर्धारित कर भर्ती कराई जाएगी। कॉलेजों में उनकी मांग के अनुसार चयन प्रक्रिया आयोजित कर फैकल्टी की नियुक्ति कराई जाएगी।
इंदर सिंह परमार, तकनीकी शिक्षा मंत्री



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