पिछले पौने दो साल में पुलिस और आबकारी विभाग ने मिलकर 33,000 लीटर से ज्यादा अवैध अंग्रेजी शराब जब्त की और 9 हजार से ज्यादा लोगों को पकड़ा।लेकिन एजेंसियां यह नहीं बता पाईं कि ये आती कहां से है। किसी दूसरे राज्य से यहां अंग्रेजी शराब की सप्लाई हो रही है या फिर लाइसेंसी ठेकों से ही अवैध तरीके से सप्लाई की जा रही है। हालांकि दोनों एजेंसियां तर्क दे रही हैं कि कोई यह नहीं बताता कि उसने शराब कहां से खरीदी है। दोनों एजेंसियों के जानकारों का कहना है कि ब्लैकर्स या ट्रांसपोर्टरों को पकड़कर सप्लाई चैन को समय-समय पर तोड़ा गया है। यही कारण है कि सैकड़ों की संख्या में लोगों को पकड़ा गया। जानकारों की मानें तो बाहरी इलाकों से रात में शराब की डिलीवरी होती है और ज्यादातर छोटे एजेंट या ब्लैकर ही गिरफ्तार होते हैं। ठेकेदार और सप्लायर स्तर पर कार्रवाई हो, तो असर दिख सकता है। सवाल जिनके जवाब नहीं हैं केस 1 दिसंबर 2025 में क्राइम ब्रांच ने अशोका गार्डन में एक गोदाम पर छापा मारकर 60 लाख रुपए की 850 पेटी शराब जब्त की।आबकारी ने बाद में इसे क्लीन चिट दे दी थी। वह शराब दुकान का गोदाम था। केस 2 नवंबर 2025 में खजूरी पुलिस ने एक ट्रक से 1.2 करोड़ की 1200 पेटी अंग्रेजी शराब जब्त की, जिसे गुजरात भेजा जा रहा था।पुलिस ट्रक मालिक और फर्जी बिल्टी देने वालों के नाम ही पता कर सकी है। केस 3 जुलाई 2025 में पिपलानी पुलिस ने 19 लाख की अवैध शराब के साथ 300 कार्टन (2,700 लीटर) अंग्रेजी शराब पकड़ी।शराब किस ठेकेदार की थी, यह पता नहीं चला। पुलिस चालान पेश कर चुकी है। पुलिस की कार्रवाई 27,850 लीटर शराब जब्त1.78 करोड़ रुपए कीमत1876 आरोपी गिरफ्तार(01 अप्रैल 2024 से 30 सितंबर 2025 के बीच) आबकारी की कार्रवाई 5543 लीटर शराब जब्त4.58 करोड़ रुपए कीमत7209 आरोपी गिरफ्तार(01 अप्रैल 2024 से 31 अगस्त 2025 के बीच) बाहरी जिलों से ज्यादा हो रही है अवैध शराब की सप्लाई “ज्यादातर अवैध शराब की सप्लाई पास के जिलों से हो रही है। कई बार सोर्स जानने के लिए वायरलेस की मदद ली जाती है। ठेकेदार को नोटिस भी देते हैं, पर ज्यादातर मामलों में यह पता लगाना मुश्किल होता है कि शराब का सोर्स क्या है।”— वीरेंद्र सिंह धाकड़, सहायक आयुक्त, आबकारी ब्लैकर से शराब पकड़कर ही जांच खत्म नहीं होती ब्लैकर से शराब पकड़कर जांच खत्म नहीं होती। उससे सोर्स की जानकारी जुटाई जाती है। बैच नंबर के आधार पर दुकान का भी पता किया जाता है। पूरी कार्रवाई के बाद उन दुकान मालिकों के खिलाफ कार्रवाई होती है जिनके नाम दस्तावेजों में होते हैं।— हरिनारायण चारो मिश्रा, पुलिस कमिश्नर, भोपाल
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