फोन चलाकर आया आइडिया, अब मशरूम की खेती से हुई बल्ले-बल्ले; मिलने लगे ऑर्डर पर ऑर्डर

फोन चलाकर आया आइडिया, अब मशरूम की खेती से हुई बल्ले-बल्ले; मिलने लगे ऑर्डर पर ऑर्डर


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सागर के रहने वाले मोनू तिवारी ने मशरूम की खेती को अपने घर की छत पर किया। जब हार्वेस्टिंग हो गई, तो उन्होंने इसे जबलपुर मंडी और दमोह जिलों में भेजा। इसके बाद बड़े-बड़े शहरों से भी उनके पास ऑर्डर आने लगे।

सागर: आजकल के युवा इन्नोवेटिव करने में और रिस्क लेने में जरा भी नहीं डरते हैं यही वजह है कि हर दूसरा तीसरा व्यक्ति कुछ अलग कर रहा है और इसमें उसे सफलता भी मिल रही है। ऐसे ही सागर से करीब 50 किलोमीटर दूर खमरिया गांव के एक 32 साल के मोनू तिवारी ने भी मटन मशरूम की खेती शुरू की और खास बात यह रही की 40 दिन में ही उन्होंने अपनी फसल से पैसा कमाना भी शुरू कर दिया है। ऑनलाइन तरीके से शुरू की गई इस खेती को उन्होंने इतनी शानदार और परिपक्व तरीके से तैयार किया है, जैसे कोई कई सालों के अनुभव के बाद कर पाता है और इसका अंदाजा आप ऐसे लगा सकते हैं कि पहले ही हार्वेस्टिंग के बाद उन्होंने जो सैंपल बड़े-बड़े शहरों में भेजे थे वहां से बंपर डिमांड आई है और उन्होंने अपनी इस खेती को चार गुना बढ़ाने के बारे में तैयारी कर ली है अभी इन्होंने 10 बाय 40 की जगह में शुरुआत की थी.

फोन चलाकर आया आइडिया
सागर जिले के खमरिया निवासी मोनू तिवारी बताते हैं कि उनके पास ज्यादा जमीन नहीं है, लेकिन एक दिन फोन चलाते-चलाते यह आइडिया आया कि मशरूम की खेती को घर में छत पर दहलान में किसी भी छोटी जगह पर आसानी से कम लागत में शुरुआत की जा सकती है अब जब खेती करने का आइडिया आया तो ऑनलाइन ही इसकी शुरुआत करने के तरीके खोजे और इसमें जिन चीजों की जरूरत होती है उनको मंगवाया इसमें मशरूम का स्पर्म दिल्ली से आया और फिर इसमें जो घटक प्रयोग होते हैं उनको भी तैयार किया गया.

बड़े शहरों से लगातार बढ़ी रही डिमांड
मोनू बताते हैं कि सबसे अच्छी बात तो यह रही कि महज 40 दिन में ही फसल कटकर तैयार हो गई और तीन जिलों में इसकी सप्लाई की है जहां 200 ग्राम के पैकेट बनाकर जबलपुर मंडी में बेचा और दमोह सागर में भी सप्लाई की गई, लेकिन अब भोपाल और इंदौर से संपर्क किया तो वहां से करीब 2 क्विंटल मशरूम का आर्डर मिला है इसलिए अब हम इसको और बढ़ा रहे हैं और भी अलग-अलग जगह बातचीत हुई है लेकिन फिलहाल इतना माल नहीं है बड़े शहरों में इसकी बहुत डिमांड है लेकिन हम लोगों का प्रयास है कि सागर में भी लोग इसके बारे में जानें और यहां पर भी इसका उपयोग करें.

मोनू तिवारी बताते हैं कि उन्होंने मटन मशरूम का बीज मंगवाया था यह काफी प्रोटीन वाला होता है आजकल के बच्चे युवा जो जिम कर रहे हैं या अपनी बॉडी बनाना चाहते हैं और नॉनवेज नहीं खाते हैं ऐसे लोग भी मटन मशरूम का इस्तेमाल करते हैं इसमें काफी प्रोटीन होता है इसलिए जो इस चीज को समझते हैं खूब ले रहे हैं। सब्जी में पाउडर के रूप में इसका इस्तेमाल कर रहे हैं.

कितने दिन में तैयार हो जाता है मशरूम
किसान मोनू तिवारी बताते हैं कि मशरूम को उगाने के लिए पहले पॉलिथीन में इसका स्ट्रक्चर भूसा वर्मी कंपोस्ट फार्मलिन मिलाकर तैयार किया जाता है और इसमें बीच-बीच की लेयर में बीज डाल देते हैं, 8-10 दिन में ही इसमें से अंकुरण होने लगता है 15 से 20 दिन में यह अच्छे खासे हो जाते हैं और फिर डिमांड के अनुसार 30 से 40 दिन में हार्वेस्टिंग भी होने लगती है मुख्य रूप से इसे उगाने के लिए टेंपरेचर मास्टर ह्यूमैनिटी का ध्यान रखना पड़ता है। इनको मेंटल करने के लिए इलेक्ट्रिकल उपकरणों की भी मदद ली जाती हैं.

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फोन चलाकर आया आइडिया, अब मशरूम की खेती से हुई बल्ले-बल्ले; मिले खूब ऑर्डर



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