सेक्स वीडियो वाले आनंदपुर धाम में ‘गुरु-गद्दी’ पर घमासान: एक–दूसरे को नीचा गिराने ‘अश्लील वीडियो’ जारी करवा रहे, 1300 आश्रमों वाले ट्रस्ट की इनसाइड स्टोरी – Madhya Pradesh News

सेक्स वीडियो वाले आनंदपुर धाम में ‘गुरु-गद्दी’ पर घमासान:  एक–दूसरे को नीचा गिराने ‘अश्लील वीडियो’ जारी करवा रहे, 1300 आश्रमों वाले ट्रस्ट की इनसाइड स्टोरी – Madhya Pradesh News




अशोक नगर के प्रसिद्ध आनंदपुर धाम आश्रम के भीतर सत्ता और वर्चस्व की एक ऐसी लड़ाई चल रही है, जिसकी चिनगारी अब आपत्तिजनक वीडियो और ऑडियो क्लिप्स की शक्ल में बाहर आ रही है। हाल ही में सामने आए सेक्स वीडियो की वजह से आश्रम के भीतर और बाहर खलबली मची। आश्रम से जुड़े लोगों का मानना है कि यह गुरु गद्दी की जंग है। फिलहाल इस गद्दी पर आश्रम के छठवें पादशाही, 94 वर्षीय गुरु विचार पूर्ण आनंद महाराज विराजमान हैं। उनका स्वास्थ्य लगातार गिर रहा है और इसी के साथ आश्रम के भीतर अगले उत्तराधिकारी को लेकर एक मौन जंग छिड़ी है, जो अब खुलकर सामने आ गई है। यह कहानी है अकूत संपत्ति, लाखों अनुयायियों और देश-विदेश में फैले 1300 से ज्यादा आश्रमों के साम्राज्य पर नियंत्रण पाने की है। इसके लिए साम, दाम, दंड, भेद… हर हथकंडा आजमाया जा रहा है। पढ़िए रिपोर्ट क्यों है गद्दी पर कब्जे की ये जोर-आजमाइश?
आनंदपुर धाम सिर्फ एक आश्रम नहीं, बल्कि अद्वैत मत का एक वैश्विक मुख्यालय है। अमेरिका, इंग्लैंड, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और स्पेन जैसे देशों तक इसकी शाखाएं फैली हैं। भारत के लगभग हर बड़े शहर में इसकी मौजूदगी है। इस विशाल नेटवर्क का मतलब है अरबों की संपत्ति, बेशुमार चढ़ावा और लाखों अनुयायियों पर सीधा प्रभाव। आश्रम की परंपरा के अनुसार, मौजूदा गुरु अपने जीवनकाल में ही एक पर्ची पर अपने उत्तराधिकारी का नाम लिख देते हैं। यह पर्ची एक गोपनीय दस्तावेज होती है, जिसे उनके निधन के बाद ही खोला जाता है। यही परंपरा इस लड़ाई को और भी रहस्यमयी और क्रूर बना रही है। चूंकि किसी को नहीं पता कि पर्ची में किसका नाम है, इसलिए गद्दी के दावेदार एक-दूसरे को हर तरीके से कमजोर और बदनाम करने में जुटे हैं, ताकि आखिरी समय में उनका पलड़ा भारी रहे। इस सत्ता संघर्ष का एक प्रमुख चेहरा सुरेंद्र महात्मा हैं, जिनकी कहानी किसी फिल्म की स्क्रिप्ट से कम नहीं। हरियाणा के सिरसा में कभी चाट का ठेला लगाने वाले सुरेंद्र 2015 में गुरु का आशीर्वाद लेने आनंदपुर धाम पहुंचे और फिर यहीं के होकर रह गए। शादीशुदा और दो बच्चों के पिता होने के बावजूद, उन्हें परिवार सहित आश्रम में रहने की विशेष अनुमति मिली। देखते ही देखते, वह मौजूदा गुरु के सबसे करीबी सेवादारों में से एक बन गए। उनका कद इतना बढ़ गया कि अप्रैल 2023 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आश्रम का दौरा किया, तो सुरेंद्र उनकी अगवानी करने वालों में सबसे आगे खड़े थे। बस यहीं से उनकी उल्टी गिनती शुरू हो गई। आश्रम के दूसरे गुट को उनका यह बढ़ता प्रभाव खटकने लगा। आरोप है कि सुरेंद्र ने गुरु से अपनी नजदीकी का फायदा उठाकर ट्रस्ट में असीमित शक्ति हासिल कर ली थी। उन्होंने अपने रिश्तेदारों को आश्रम की गोशाला और अन्य महत्वपूर्ण विभागों में ऊंचे पदों पर बिठा दिया, एक लग्जरी गाड़ी खरीद ली और ट्रस्ट की जमीनों को लेकर भी उनका नाम विवादों में आया। अक्टूबर 2023 में, अचानक सुरेंद्र, उनके सहयोगी प्रीतम भगत और करीब 25 सेवकों को आश्रम से निष्कासित कर दिया गया। जब भास्कर ने सुरेंद्र महात्मा से संपर्क किया, तो उन्होंने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा, मैं गुरु की आज्ञा से ही धाम में आया था और गुरु की आज्ञा से ही अलग हो गया। मेरे खिलाफ कोई आपराधिक मामला नहीं है। मुझे और कुछ नहीं कहना। आश्रम के इस विवाद में सबसे शक्तिशाली और रहस्यमयी किरदार सुनील महात्मा का है। वर्तमान में उन्हें आश्रम का ‘खजांची’ माना जाता है। आश्रम के तमाम बैंक खातों और पैसों के लेन-देन की जिम्मेदारी उन्हीं के पास है। उनके खिलाफ आर्थिक गड़बड़ियों के गंभीर आरोप हैं। एक शिकायत पत्र के अनुसार, नोटबंदी के दौरान सुनील महात्मा ने कथित तौर पर ट्रस्ट के कई बैंक खातों में अपना निजी मोबाइल नंबर दर्ज करवा दिया था, जिससे लेन-देन की जानकारी सिर्फ उन्हें ही मिलती थी। आरोपों में पैसों की हेराफेरी से लेकर अय्याशी तक की बातें शामिल हैं। हाल ही में जो सेक्स वीडियो सामने आया है, उसके पीछे भी कुछ लोग सुनील महात्मा के गुट का हाथ बताते हैं, जिसका मकसद प्रतिद्वंद्वियों को रास्ते से हटाना है। इतना ही नहीं, धाम के एक अन्य महात्मा, रमेश के आपत्तिजनक ऑडियो क्लिप की साजिश के तार भी सुनील महात्मा से जोड़े जाते हैं। हालांकि, जब भास्कर संवाददाता ने सुनील महात्मा से इन आरोपों पर सवाल किए, तो उन्होंने इसे अपने खिलाफ एक साजिश बताया। उन्होंने कहा, मैंने आश्रम में चल रही कुछ अवांछित गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की, तो मुझे बदनाम करने के लिए झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। ये सभी आरोप निराधार हैं। इस लड़ाई का तीसरा एंगल दिल्ली में है। जीतू महात्मा, जो दिल्ली स्थित आश्रम की देखरेख करते हैं, अपनी राजनीतिक पहुंच के लिए जाने जाते हैं। दिल्ली के ‘पावर कॉरिडोर’ में उनकी अच्छी-खासी पैठ है। कहा जाता है कि प्रधानमंत्री मोदी के आनंदपुर धाम दौरे की जमीन जीतू महात्मा ने ही तैयार की थी। जीतू और सुनील महात्मा को एक ही गुट का माना जाता है। सुरेंद्र महात्मा को आश्रम से बाहर का रास्ता दिखाने में भी इस गुट की निर्णायक भूमिका बताई जाती है। कहा जाता है कि जीतू ने ही अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर ट्रस्ट को सुरेंद्र के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए मजबूर किया। जब दैनिक भास्कर ने जीतू महात्मा से बात की, तो उन्होंने माना कि सुरेंद्र के खिलाफ लगे आरोपों के कारण ही उन्हें ट्रस्ट से बाहर किया गया है। उन्होंने आश्रम में किसी भी तरह की गुटबाजी से इनकार किया, लेकिन उनके शब्दों ने सुरेंद्र के बाहर करने के पीछे की कहानी पर मुहर लगा दी। गद्दी के साइलेंट दावेदार: विनोद, दीपक और प्रेमी महात्मा इस कीचड़ उछालने की लड़ाई से दूर, तीन ऐसे नाम भी हैं जिन्हें गद्दी का प्रबल लेकिन शांत दावेदार माना जाता है। ये तीनों महात्मा सीधे तौर पर किसी गुटबाजी में शामिल नहीं दिखते, लेकिन पर्दे के पीछे चल रही इस जंग पर इनकी पैनी नजर है।



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