खंडवा. मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के अभिभावकों और स्कूली बच्चों के लिए बड़ी राहत की खबर है. अब जिले का कोई भी निजी स्कूल बच्चों या पालकों पर यह दबाव नहीं बना सकेगा कि किताबें, यूनिफॉर्म, जूते, टाई या स्टेशनरी किसी एक ही दुकान से खरीदी जाए. स्कूलों और दुकानदारों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने बड़ा फैसला लिया है. कलेक्टर ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए हैं. इस आदेश का सीधा फायदा हजारों अभिभावकों को मिलेगा, जो हर साल महंगी किताबों और यूनिफॉर्म के दबाव से परेशान रहते थे. आदेश के अनुसार, कोई भी निजी स्कूल किसी एक दुकान से सामग्री खरीदने के लिए बाध्य नहीं करेगा किताब, कॉपी, यूनिफॉर्म, जूते, टाई कहीं से भी खरीदे जा सकेंगे.
अब अभिभावक अपनी सुविधा और बजट के हिसाब से सामान खरीद सकेंगे. सभी निजी स्कूल संचालकों और प्राचार्यों को निर्देश दिए गए हैं कि हर कक्षा की अनिवार्य पुस्तकों की सूची यूनिफॉर्म का पूरा विवरण 10 फरवरी 2026 से पहले स्कूल की वेबसाइट पर अपलोड करना अनिवार्य होगा. साथ ही यह सूची विद्यालय परिसर में सार्वजनिक स्थान पर चस्पा करना भी जरूरी होगा. मान्यता नियमों के तहत अब हर निजी स्कूल की अपनी वेबसाइट होना अनिवार्य किया गया है.
अब बच्चों का बैग नहीं होगा भारी
बच्चों के स्वास्थ्य को देखते हुए कलेक्टर ने स्कूल बस्ते के वजन की सीमा भी तय कर दी है. अब बच्चे उम्र से ज्यादा वजन नहीं ढोएंगे. हर क्लास के हिसाब से बस्ते का वजन तय हुआ है.
कक्षा 1 और 2 के लिए
1.6 से 2.2 किलोग्राम
कक्षा 3 से 5वीं तक
1.7 से 2.5 किलोग्राम
कक्षा 6 और 7 के लिए
2.0 से 3.0 किलोग्राम
कक्षा 8 के लिए
2.5 से 4.0 किलोग्राम
कक्षा 9 और 10 के लिए
2.5 से 4.5 किलोग्राम
नियम तोड़ा तो होगी सख्त कार्रवाई
अगर तय मानक से ज्यादा वजन पाया गया, तो सीधे कार्रवाई की जाएगी. आदेश का उल्लंघन करने पर भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 के तहत कार्रवाई होगी. स्कूल की मान्यता भी रद्द हो सकती है. यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो चुका है और 30 अप्रैल 2026 तक प्रभावशील रहेगा.
तीन साल तक नहीं बदल सकेंगे यूनिफॉर्म
कलेक्टर के आदेश में साफ कहा गया है कि स्कूल कम से कम तीन साल तक यूनिफॉर्म में बदलाव नहीं करेंगे. किताब, कॉपी या कवर पर स्कूल का नाम प्रिंट नहीं होगा. कोई विक्रेता पूरे सेट की जबरदस्ती नहीं कर सकेगा. अगर पुरानी किताबें उपलब्ध हैं, तो सिर्फ जरूरी किताबें ही बेची जाएंगी. प्रवेश के समय और परीक्षा परिणाम के दौरान अभिभावकों को पुस्तकों की सूची देना अनिवार्य किया गया है.
अभिभावकों ने किया फैसले का स्वागत
लोकल 18 से बातचीत में अभिभावक सुनील जैन ने कहा कि यह फैसला बहुत सराहनीय है. अब तक हालात यह थे कि बच्चों से ज्यादा वजन उनके बस्तों का होता था. कलेक्टर ऋषव गुप्ता का यह आदेश बच्चों और अभिभावकों दोनों के लिए राहत भरा है. अभिभावकों को मिली बड़ी राहत इस फैसले से अभिभावकों पर आर्थिक बोझ कम होगा. बच्चों की सेहत सुरक्षित रहेगी. स्कूलों की मनमानी पर रोक लगेगी और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी. कुल मिलाकर यह फैसला हजारों परिवारों के लिए बड़ी खुशखबरी साबित हुआ है.