जनगणना-2027 के लिए होमवर्क चालू हो चुका है। जिले की सभी 17 प्रशासनिक इकाइयों के नक्शे जनगणना मुख्यालय पहुंच चुके हैं। अब स्लम बस्तियों की संख्या पर काम चल रहा है। चूंकि अंतिम जनगणना 2011 में 15 साल पहले हुई थी। इसलिए वर्तमान में पदस्थ अफसर-कर्मचारिय
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स्लम बस्तियों को लेकर स्थिति क्लियर नहीं है। कुछ जगह बस्तियों की संख्या के लिए फील्ड स्टाफ सर्वे भी कर रहा है। इसकी पुष्टि अपर आयुक्त मुनीष सिंह सिकरवार ने की। चार दिन पहले जिन 41 अफसरों को जनगणना कार्य निदेशालय के मुताबिक काम मिला है उनमें कलेक्टर व निगमायुक्त प्रमुख जनगणना अधिकारी रहेंगे।
दोनों का कार्यक्षेत्र अलग रहेगा। कलेक्टर पूरे जिले का काम देखेंगे, जबकि निगमायुक्त शहरी क्षेत्र का। बाकी जिलास्तर के सभी नगर, अनुविभाग, चार्ज और अतिरिक्त चार्ज अधिकारी जनगणना अधिकारी रहेंगे। विशेष क्षेत्र टेकनपुर, पनिहार, महाराजपुरा व मुरार के लिए अभी और अधिकारी नियुक्त होंगे। इसी तरह से 9 अफसरों को शामिल कर जिलास्तर की समन्वय समिति भी बन चुकी है। इसका काम जनगणना के दोनों चरणों के लिए संसाधन मुहैया कराना होगा।
गांव से शहर में शिफ्ट हो रहे हैं लोग, स्लम बस्तियों की संख्या बढ़ी गांव से शहर में शिफ्ट हो रहे लोगों की संख्या बढ़ रही है। वर्ष 2011 की जनगणना में प्रदेश के 303 निकायों में स्लम बस्तियां 56.89 लाख थीं। यह संख्या बढ़ी है। कारण, सरकारी आवासीय प्रोजेक्ट हैं। इनमें जनगणना का काम दूसरे चरण में होना है। अभी बस्तियों की सूची बन रही है। जनगणना से पहले स्लम बस्तियों की सूची 3 कैटेगरी में बनेगी।
फिर काम पर लगेंगे शिक्षक, डीईओ को जिम्मेदारी दी शहर के 2 वार्ड में जनगणना ट्रायल के दौरान 92 ब्लॉक बने थे। यह काम लगभग 200 लोगों ने पूरा किया। अब काम पूरे जिले में होना है। इसलिए कर्मचारी बड़ी संख्या में लगेंगे। इस काम में भी शिक्षकों को लगाया जाएगा। इसलिए जिला शिक्षा अधिकारी को प्रगणक व पर्यवेक्षक के लिए शिक्षक मुहैया कराने के लिए कहा है। निकायों का स्टाफ भी इसमें लगेगा।