बैतूल में गणतंत्र दिवस के अवसर पर किलेदार परिवार ने अपनी 23 साल पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए पारंपरिक भोज का आयोजन किया। इस परंपरा की शुरुआत भैंसदेही के मालगुजार चंद्रचूड़ सिंह ने की थी। वे हर 15 अगस्त और 26 जनवरी को नगर में भोज आयोजित करते थे। उनके पुत्रों राजा ठाकुर, अरुण सिंह, राजेंद्र सिंह और प्रदीप सिंह ने इसे आगे बढ़ाया। अब तीसरी पीढ़ी के सदस्य शिवेंद्र सिंह, राघवेंद्र सिंह, अभिषेक सिंह, अमर सिंह, गौरव सिंह और उदय सिंह बैतूल में इस परंपरा को निभा रहे हैं। किलेदार परिवार मूलतः पुल, सड़क और भवन निर्माण के क्षेत्र में सक्रिय है। उनकी कंपनी RSK मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में कार्यरत है। इस भोज में शहर के गणमान्य नागरिक, जनप्रतिनिधि, अधिकारी, पत्रकार, समाजसेवी, डॉक्टर और इंजीनियर शामिल हुए। तीन दिन पहले से आमंत्रित करते हैं
परिवार की एक विशेषता यह है कि वे अतिथियों से अपने बच्चों को भी साथ लाने का आग्रह करते हैं। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को इस सामाजिक परंपरा से जोड़ना है। इसी कारण भोज में बच्चों की पसंद की मिठाइयां, स्नैक्स और डेजर्ट्स विशेष रूप से शामिल किए जाते हैं। किलेदार परिवार तीन दिन पहले से ही शहरवासियों को व्यक्तिगत रूप से आमंत्रित करना शुरू कर देता है। आयोजन स्थल पर पहुंचने वाले अतिथियों को तिलक लगाकर और राष्ट्रीय ध्वज व नक्शे का बैज भेंट कर सम्मानित किया जाता है। यह भी बताया जाता है कि बैतूल में इस तरह की परंपरा की शुरुआत भंवरचंद गर्ग ने की थी, जो राष्ट्रीय पर्वों पर स्वल्पाहार आयोजित करते थे। किलेदार परिवार आज भी उसी परंपरा को जीवित रखते हुए सामाजिक एकता और सौहार्द का संदेश दे रहा है।
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