भोपाल में नाली का पानी पीने लायक!: जिस बॉटल में गंदा पानी भरा था, उसे बता दिया ‘शुद्ध’; टाइम कीपर-प्यून कर रहे टेस्टिंग – Bhopal News

भोपाल में नाली का पानी पीने लायक!:  जिस बॉटल में गंदा पानी भरा था, उसे बता दिया ‘शुद्ध’; टाइम कीपर-प्यून कर रहे टेस्टिंग – Bhopal News




भोपाल में नाली का पानी भी पीने लायक है। ये खुलासा खुद नगर निगम की टेस्टिंग में हुआ है। जिस बॉटल में नाली का पानी भरा था, उसे वार्ड ऑफिस में महज 15 सेकंड में हुए टेस्ट में ‘शुद्ध’ बता दिया। समझा जा सकता है कि इंदौर के भागीरथपुरा जैसे हालात भोपाल में भी बन सकते हैं। मंगलवार को दैनिक भास्कर ने जल सुनवाई का रियलिटी चैक किया। देखा कि पानी की शुद्धता जांचने के क्या पैमाने हैं और इसे जांच कौन रहा है? 5 वार्ड ऑफिस में भास्कर रिपोटर्स पहुंचे। सभी जगह पर तस्वीर गंभीर दिखी। टाइम कीपर और प्यून पानी की टेस्टिंग कर रहे हैं। सबसे बड़ी हैरानी तब हुई, जब कर्मचारी ने बॉटल में भरे पानी के गंदे पानी को ही क्लीन चिट दे दी। भास्कर टीम ने वार्ड-70, 60, 44, 22, 24 और 21 में जल सुनवाई का रियलिटी चैक किया, जानिए क्या मिले हालात…। सबसे पहले जानिए, जल सुनवाई की जरूरत क्यों पड़ी? इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से 24 जानें चली गईं। इसके बाद CM डॉ. मोहन यादव ने हर मंगलवार को जल सुनवाई के आदेश दिए। ताकि, पानी के रंग, स्वाद, क्लोरिन, टीडीएस जैसी 11 जांचें हो सके। भोपाल के 85 वार्डों में हर सप्ताह 2 घंटे जल सुनवाई हो रही है। पुराने शहर के इलाकों में हाल सबसे ज्यादा खराब है। जेपी नगर, प्रेम नगर, अशोका गार्डन, करोंद, शिवनगर, सुभाषनगर में दूषित पानी की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। बावजूद शुद्ध जल मिलना तो दूर पानी के दूषित होने की बात भी गलत ठहरा दी जा रही है। 3 वार्ड- गंदे पानी का टेस्ट, गड़बड़ी और हालात वार्ड-70 में गंदे पानी का टेस्ट… कहा- पानी पीने लायक है
पंजाबी बाग स्थित वार्ड-70 का निगम दफ्तर। पानी की शुद्धता की जांच का जिम्मा कर्मचारी संजय नावले पर है। दोपहर 12 बजे उस बॉटल बंद पानी की टेस्टिंग करवाई गई, जो निगम दफ्तर के सामने से गुजरी नाली का ही है। दफ्तर के अंदर संजय ने जल गुणवत्ता फील्ड टेस्ट किट निकाली, लेकिन टेस्ट सिर्फ क्लोरिन का किया है। 10एमएल पानी में क्लोरिन जांचने की दो बूंदे डाली गईं। लगभग 15 सेकंड में जांच पूरी हो गई और संजय ने गंदे पानी को क्लीन चिट दे दी। कहा कि यह पानी पीने लायक है, जबकि पानी से बदबू भी आ रही थी। हैरानी की बात ये है कि दो अन्य वार्ड कार्यालयों में भी पानी की शुद्धता की जांच कराई तो वहां भी सिर्फ क्लोरिन की ही जांच की गई। वार्ड-44 में टाइम कीपर का जिम्मा…क्लोरिन को कैल्शियम बताया
यह वार्ड सुभाषनगर में है। टाइम कीपर वरुण विजयवर्गीय, श्रमिक लक्ष्मीनारायण पानी की शुद्धता की जांच करते हुए नजर आए। रहवासी अब्दुल हसीम गंदे पानी की शिकायत लेकर पहुंचे थे। हसीम ने कहा कि पानी में बहुत बदबू आती है। मटमैला भी है। शिकायत की, लेकिन पानी साफ नहीं आया। इस दूषित पानी की वजह से पूरा परिवार बीमार है। इसके बाद हसीम के पानी की जांच की गई। वरुण और लक्ष्मीनारायण ने क्लोरिन की जांच की और पानी को पीने लायक बता दिया। हसीम का कहना था कि पानी में से बदबू भी आ रही है, लेकिन जांच सिर्फ क्लोरिन को लेकर ही की गई? कर्मचारी वरुण ने बताया कि यहां क्लोरिन की जांच ही करते हैं। पानी ज्यादा गंदा है तो उसे लैब में टेस्ट के लिए भेजते हैं। आज दो ही शिकायत आईं। इनके सैंपल लिए हैं। वार्ड-60 में कहा-मुझे मालूम नहीं होता तो पी लेता
अवधपुरी स्थित वार्ड-60 के वार्ड ऑफिस में सुपरवाइजर अजय पटेल और वाटरमैन राजकुमार पानी की शुद्धता जांचने का काम कर रहे थे। भास्कर रिपोटर्स ने पंजाबी बाग से बॉटल में भरे गंदे पानी की जांच कराई। अजय और राजकुमार ने पानी को शुद्ध बताते हुए उसे क्लीन चिट दे दी। जब दोनों को बताया कि ये नाली का पानी है तो उनके होश उड़ गए। हालांकि, वे पानी को दूषित होने की बात कहने लगे। जब भास्कर टीम उसने कहा कि ये पानी शुद्ध है तो पीकर बताएं? यह सुनकर दोनों ही न-नकुर करने लगे। सिर्फ इतना कहा कि मुझे नाली का मालूम नहीं हो तो पानी पी लेता। भोपाल में गंदे पानी की शिकायतें, पर सुनवाई नहीं
मंगलवार को भास्कर ने जिन 5 वार्डों में जाकर रियलिटी चैक किया, उनमें पिछले दो सप्ताह में 10 शिकायतें भी नहीं आईं। कई लोग आए, जरूर लेकिन उन्हें क्लोरिन की जांच करके संतुष्ट कर दिया गया, जबकि कई जगहों पर पानी पीने लायक भी नहीं था। मंगलवार को अयोध्या एक्टेंशन के कई लोग वार्ड-68 ऑफिस में शिकायत लेकर पहुंचे। कहा कि अयोध्या एक्टेंशन में पानी की पाइप लाइन सीवेज में से गुजर रही है। कई बार शिकायत करने के बाद भी साफ पानी नहीं मिल रहा है। ऐसे में दूषित पानी पी रहे हैं। सप्लाई की टंकी भी करीब डेढ़ साल से साफ नहीं हुई है। प्रेम नगर में पानी इतना गंदा है कि कांच की बॉटल को आर-पार देखना मुश्किल हैं। भेल और करोंद इलाके में भी गंदे पानी की समस्या है। इनकी जांच के आदेश, पर हो नहीं रही
मुख्यमंत्री के आदेश के बाद 11 जनरल टेस्ट और 3 अन्य पैरामीटर पर जांच करने को कहा गया। इसके आदेश भी निकले। 11 टेस्ट में रंग, स्वाद, पीएच, हार्डनेस, कैल्शियम हार्डनेस, मैग्निसियम हार्डनेस, टीडीएस आदि शामिल हैं। वहीं, अन्य 3 पैरामीटर में ई-कौलाई जैसे बैक्टीरिया भी शामिल हैं। टाइम कीपर, प्यून-सुपरवाइजर को दे दिया जिम्मा
एक्सपर्ट की माने तो पीने के पानी की जांच प्रशिक्षित व्यक्ति ही कर सकता है, जिसे पानी की गुणवत्ता और केमिकल की मात्रा की सही जानकारी हो, लेकिन इस काम में टाइम कीपर, प्यून और सुपरवाइर को भी लगा दिया। 29 दिवसीय कर्मचारियों से भी काम करवाया जा रहा है, जो ठीक नहीं है। यह मामला सीधे जनता की सेहत से जुड़ा है। पानी की जांच के लिए केमिस्ट या कम से कम लैब असिस्टेंट की तैनाती जरूरी है। जांच उसकी निगरानी में नहीं, बल्कि उसके द्वारा होनी चाहिए।



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