मटर में फली छेदक कीट से किसान परेशान, कृषि एक्सपर्ट ने बताया सॉलिड फॉर्मूला

मटर में फली छेदक कीट से किसान परेशान, कृषि एक्सपर्ट ने बताया सॉलिड फॉर्मूला


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Agriculture News: कृष्णकांत तिवारी ने लोकल 18 से कहा कि किसान नियमित रूप से फसल का निरीक्षण करें और कीट दिखाई देते ही फौरन सही दवा का छिड़काव करें. समय पर किया गया उपचार मटर की फसल को सुरक्षित रखेगा और इससे किसानों को बेहतर उत्पादन मिलेगा.

सीधी. मध्य प्रदेश के सीधी जिले में बड़े पैमाने पर मटर की खेती की जाती है. जिले की अर्थव्यवस्था में मटर की अहम भूमिका है. इन दिनों अधिकांश क्षेत्रों में रवि सीजन की बुवाई लगभग पूरी हो चुकी है. ऐसे में अब किसानों के सामने फसल की देखभाल सबसे बड़ी चुनौती है. इन दिनों मटर की फसल पर फली छेदक कीट का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे किसान चिंतित हैं. यह कीट मटर की फली में छेद कर अंदर घुस जाता है और दानों को खा जाता है, जिससे उत्पादन के साथ-साथ फसल की गुणवत्ता पर भी भारी असर पड़ता है.

कृषि विशेषज्ञ कृष्णकांत तिवारी ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि वर्तमान में ठंड का मौसम चल रहा है और इस मौसम में दलहनी फसलों में कीटों का प्रकोप बढ़ जाता है. सीधी और आसपास के इलाकों में किसान मटर जैसी दलहनी फसलों की खेती बड़े पैमाने पर कर रहे हैं, ऐसे में समय पर कीट प्रबंधन बेहद जरूरी हो जाता है. उन्होंने बताया कि मटर की फसल में मुख्य रूप से दो प्रकार के कीट नुकसान पहुंचाते हैं, पहला रस चूसने वाले कीट होते हैं, जो पौधों की पत्तियों और कोमल भागों से रस चूसते हैं. इससे पौधों की बढ़वार रुक जाती है, पत्तियां कमजोर हो जाती हैं और फसल प्रभावित होती है. दूसरा प्रकार फली छेदक कीट होते हैं, जो फली या पॉड बनने के बाद उसमें छेद कर दानों को खाते हैं, जिससे सीधे तौर पर उत्पादन घट जाता है.

जैविक और रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग
कृषि विभाग के अनुसार, मटर में फली छेदक कीट और अर्द्धकुंडलीकार कीट के नियंत्रण के लिए किसान जैविक और रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग कर सकते हैं. इसके लिए प्रति हेक्टेयर 500 से 600 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए. जैविक विकल्पों में बैसिलस थुरिनजीएसीन्स (बीटी) की कस्टकी प्रजाति एक किलोग्राम, एजाडीरेक्टिन 0.03 प्रतिशत डब्ल्यूएसपी ढाई से तीन किलोग्राम और एनपीवी (एच) दो प्रतिशत एएस का उपयोग किया जा सकता है. इन दवाओं के छिड़काव से फली भेदक कीट के प्रकोप में काफी हद तक कमी आती है.

फली छेदक और रस चूसने वाले कीटों के लिए दवा
यदि फसल में लेपिडोप्टेरा वर्ग के फली छेदक कीट अधिक दिखाई दें, तो उनके नियंत्रण के लिए कार्टाप हाइड्रोक्लोराइड जैसी प्रभावी कीटनाशी दवा का सही मात्रा और सही समय पर छिड़काव करना चाहिए. वहीं रस चूसने वाले कीटों के नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड एक कारगर कीटनाशक है, जो 18.8 और 30 प्रतिशत फॉर्मूलेशन में उपलब्ध है. इसे एक से डेढ़ मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करने पर अच्छे परिणाम मिलते हैं.

नियमित रूप से करें फसल का निरीक्षण
कृष्णकांत तिवारी का कहना है कि किसान नियमित रूप से फसल का निरीक्षण करें और कीट दिखाई देते ही तुरंत उचित दवा का छिड़काव करें. समय पर किया गया कीट प्रबंधन मटर की फसल को सुरक्षित रखेगा और किसानों को बेहतर उत्पादन मिलेगा.

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Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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