एमपी में पहली बार आर्मी के बैटल टैंक की ओवरहॉलिंग: आज भारतीय सेना को सौंपे जाएंगे दो T-72 टैंक, पहले सिर्फ चेन्नई में होता था ये काम – Jabalpur News

एमपी में पहली बार आर्मी के बैटल टैंक की ओवरहॉलिंग:  आज भारतीय सेना को सौंपे जाएंगे दो T-72 टैंक, पहले सिर्फ चेन्नई में होता था ये काम – Jabalpur News


जबलपुर की व्हीकल फैक्ट्री में पहली बार भारतीय सेना के टी-72 टैंकों के ओवरहॉल का काम सफलता पूर्वक कम्पलीट कर लिया गया है। भारतीय सेना की जरूरतों को देखते हुए ओवरहॉल की क्षमता बढ़ाने की दिशा में यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे जबलपुर में टैंक ओवरहॉ

.

सिर्फ चेन्नई में होता था ये काम, सेना की बड़ी जरूरत

भारतीय सेना में बैटल टैंकों के ओवरहॉल की जरूरत लगातार बढ़ रही है। अभी यह काम मुख्य रूप से AVNL की हैवी व्हीकल्स फैक्ट्री (HVF) में होता है। हैवी व्हीकल्स फैक्ट्री आवड़ी, चेन्नई के पास स्थित है और यह देश की सबसे बड़ी टैंक निर्माण व ओवरहॉल इकाइयों में से एक मानी जाती है। यहीं पर भारतीय सेना के T-72 और T-90 जैसे मेन बैटल टैंकों का निर्माण, ओवरहॉल और अपग्रेड किया जाता है। दबाव को कम करने और क्षमता बढ़ाने के लिए AVNL ने VFJ को भी इस जिम्मेदारी के लिए चुना।

2025 में मिली थी मंजूरी, 9 महीने में पूरा किया काम

आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (AVNL) की तरफ से साल 2025 के अप्रैल-मई महीने में VFJ को T-72 टैंकों का पायलट ओवरहॉल करने की अनुमति दी गई थी। इसके बाद VFJ ने जरूरी इन्फ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी तैयारियां की और सेना के तय मानकों के अनुसार ओवरहॉल का काम पूरा किया।

VFJ में किए गए ओवरहॉल में भारतीय सेना की तकनीकी स्पेसिफिकेशन और क्वालिटी स्टैंडर्ड्स का पूरी तरह पालन किया गया है। यह काम करीब 9 महीने में ही पूरा कर लिया गया है। VFJ अब सेना की ऑपरेशनल जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार है।

आज यानी 28 जनवरी को होगा रोल आउट

ओवरहॉल किए गए T-72 टैंकों को 28 जनवरी 2026 को रोल आउट किया जाएगा। इस मौके पर मास्टर जनरल सस्टेंस (MGS) और CMD AVNL भी मौजूद रहेंगे।

वाहन निर्माणी जबलपुर के मुख्य महाप्रबंधक प्रवीण कुमार ने बताया, हैवी व्हीकल फैक्ट्री आवड़ी पिछले कई वर्षों से भारतीय सेना के बैटल टैंक की ओवरहॉलिंग का काम करती आ रही है। आर्मी को समय समय पर ये टैंक ओवरहॉल करने की जरूरत पड़ती रहती है। आर्मी की ओवरहॉल की जरूरत काफी ज्यादा बढ़ गई है। ये जरूरत आवड़ी, चेन्नई की फैक्ट्री की कैपेसिटी से ज्यादा हो गई है। इसलिए आवड़ी की क्षमता तो बढ़ाई ही जा रही है साथ ही साथ आर्मी की जरूरत को पूरा करने के लिए व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर में एडिशनल क्षमता बढ़ाई जा रही है।

इसके लिए अभी हमें बहुत सारे काम करने हैं। इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलप किया जा रहा है। मशीनरी और जरूरी टूल खरीदे जाएंगे। कुछ चीजें हम खुद बनाएंगे। अभी दो टैंक की ओवरहॉलिंग हुई है। आगे क्षमता और बढ़ेगी। फैक्ट्री कर्मियों को लगातार प्रशिक्षित किया जा रहा है। अभी हमने पायलट आधार पर ओवरहॉलिंग की आगे के वित्तीय वर्ष से ये काम रेगुलर हो जाएगा।

प्रबंधक ने आगे कहा, यह उपलब्धि देश में ही टैंक ओवरहॉल की क्षमता बढ़ाने, ऑपरेशनल तैयारी मजबूत करने और भारतीय सेना को समय पर सपोर्ट देने की AVNL की प्रतिबद्धता को दिखाती है। इसे रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम मील का पत्थर माना जा रहा है।

T-72 टैंक: भारतीय सेना की बख़्तरबंद ताकत

T-72 भारतीय सेना का भरोसेमंद मेन बैटल टैंक है, जो अपनी ताकत, मारक क्षमता और टिकाऊ डिजाइन के लिए जाना जाता है। इसे सोवियत संघ ने विकसित किया था, जबकि भारत में इसका निर्माण और उन्नयन स्वदेशी स्तर पर किया गया है। इसमें 125 मिमी स्मूथबोर गन लगी है, जो दुश्मन के टैंकों और मजबूत ठिकानों को निशाना बनाने में सक्षम है। ऑटो-लोडर सिस्टम के कारण कम क्रू में भी टैंक प्रभावी ढंग से ऑपरेट किया जा सकता है।

सुरक्षा और रफ्तार के मामले में भी T-72 मजबूत माना जाता है। इसमें उन्नत आर्मर, स्मोक ग्रेनेड सिस्टम और आधुनिक फायर कंट्रोल तकनीक मौजूद है। करीब 780 हॉर्सपावर का इंजन इसे हर तरह के इलाके में बेहतर मूवमेंट देता है। नियमित ओवरहॉल और अपग्रेड के चलते T-72 आज भी भारतीय सेना की बख़्तरबंद क्षमता की अहम रीढ़ बना हुआ है।



Source link