मध्य प्रदेश क्राइम फाइल्स के पार्ट-1 में आपने पढ़ा कि मंडला जिले के बिछिया थाना क्षेत्र में 20 सितंबर 2021 की रात राजेंद्र पंद्रे रहस्यमय हालात में लापता हो गया। जिस समय वह गायब हुआ तब वह एक लड़की से बात कर रहा था। पांच दिन बाद 25 सितंबर को जंगल में उसकी लाश मिली। शव से पैंट और अंडरवियर गायब थे, प्राइवेट पार्ट कटा हुआ था। शुरुआत में मामला जंगली जानवर के हमले जैसा लगा, लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने हत्या की पुष्टि कर दी। जांच में सामने आया कि राजेंद्र का गांव की लड़की सोनल बातें करता था, दोनों का प्रेम संबंध था। उसी से आखिरी बार बातचीत हुई। पुलिस ने गांव में दो महीने तक डेरा डाला, लेकिन कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा। चार महीने बाद एक चश्मदीद गवाह सामने आया। उसने जो बताया उससे इस मामले को नया मोड़ दे दिया। आखिर उसने पुलिस को क्या बताया? पढ़िए क्राइम फाइल्स के पार्ट-2 में… केरल से आया गवाह और केस में नाटकीय मोड़
जब लग रहा था कि यह केस भी अनसुलझी फाइलों में दबकर रह जाएगा, तभी पुलिस के हाथ एक अहम सुराग लगा। उन्हें पता चला कि चैन सिंह नाम का एक व्यक्ति, जो घटना वाली रात गांव में ही मौजूद था, अब 1900 किलोमीटर दूर केरल में काम कर रहा है। पुलिस के लिए यह एक बड़ी उम्मीद थी। एक टीम तुरंत केरल के लिए रवाना हुई और चैन सिंह को मंडला लाया गया। चैन सिंह ने पुलिस को जो कहानी बताई, उसने पूरे केस को एक नई दिशा दे दी। उसने बताया कि मैं मोहगांव का रहने वाला हूं। 20 सितंबर को मैं अपने दोस्त राकेश से मिलने अतरिया गया था। वह नहीं मिला तो मैं लौट रहा था। रास्ते में नैन सिंह (सोनल के पिता) के घर के पास मेरी बाइक खराब हो गई। शाम के 7-7:30 बज रहे थे। नैन सिंह ने मेरी मदद करने की कोशिश की, लेकिन बाइक ठीक नहीं हुई। रात होने पर उन्होंने मुझे अपने घर रुकने को कहा। मैं वहीं रुक गया, खाना खाया और सो गया। रात करीब 9:30 बजे, मुझे चीखने-चिल्लाने की आवाजें आईं, कौन हमारे घर में घुसा है, कौन हमारी बेटी को छेड़ रहा है? मैं बाहर निकला तो देखा कि नैन सिंह और उसका बेटा संदीप एक आदमी को बुरी तरह पीट रहे थे। इकबालिया बयान, दोषसिद्धि और उम्रकैद
चैन सिंह का बयान पुलिस के लिए एक ब्रह्मास्त्र साबित हुआ। इस बयान के आधार पर पुलिस ने तुरंत नैन सिंह और उसके बेटे संदीप को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, दोनों ने पूछताछ में अपना गुनाह कबूल कर लिया। संदीप का कथित बयान: मेरी बहन सोनल से गांव का राजेंद्र पंद्रे शादी करना चाहता था, लेकिन हम लोग इसके लिए राजी नहीं थे। मैंने राजेंद्र को कई बार समझाया था। 20 सितंबर की रात, मैंने बाड़ी (घर के पीछे का हिस्सा) से किसी के आने की आवाज सुनी। मैंने देखा कि राजेंद्र सोनल के कमरे की तरफ जा रहा था। मैंने उसे पकड़ा तो बोला कि वह सोनल से प्यार करता है। उसे लेकर भाग जाएगा। नैन सिंह का कथित बयान: राजेंद्र मेरी बेटी पर गलत नजर रखता था। उस रात हमने उसे पकड़ा। गुस्से में हमने उसका गला घोंट दिया और फिर छुरे से उसका प्राइवेट पार्ट काट दिया। हमने उसकी लाश को गमछे से बांधकर डंडे पर लटकाया और रानीगंज के जंगल में फेंक दिया। लौटते समय हमने उसका मोबाइल तोड़ दिया सिम फेंक दी। छुरा, कपड़े और गमछा अपनी बाड़ी में पत्थरों के नीचे छिपा दिया। इन इकबालिया बयानों और चैन सिंह की गवाही के आधार पर मामला पानी की तरह साफ लग रहा था। पुलिस ने निष्कर्ष निकाला कि यह ‘ऑनर किलिंग’ का मामला है, जहां परिवार ने अपनी बेटी के प्रेम संबंध को स्वीकार न करते हुए प्रेमी की हत्या कर दी। कहानी में सबसे बड़ा मोड़ – हाईकोर्ट का फैसला
मामला खत्म हो चुका था, न्याय हो चुका था, ऐसा लग रहा था, लेकिन असली मोड़ आना अभी बाकी था। नैन सिंह और संदीप ने जिला अदालत के फैसले को जबलपुर हाईकोर्ट में चुनौती दी। उन्होंने दावा किया कि वे बेकसूर हैं और पुलिस ने एक मनगढ़ंत कहानी बनाकर उन्हें फंसाया है। उनका तर्क था कि उनसे जबरन खाली कागजों पर हस्ताक्षर कराए गए और उन्होंने कभी कोई अपराध कबूल नहीं किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्य गवाह चैन सिंह को पुलिस ने मारपीट कर झूठा बयान देने के लिए तैयार किया था। 30 जुलाई 2025 को, जबलपुर हाईकोर्ट ने इस मामले में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति अवनिंद्र कुमार सिंह की खंडपीठ ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए नैन सिंह और संदीप को बरी कर दिया। क्यों रद्द हुई सजा? हाईकोर्ट के तर्क
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में पुलिस की कहानी की कमजोर कड़ियों को एक-एक कर उजागर किया: मध्यप्रदेश क्राइम फाइल्स का पार्ट-1 भी पढ़िए… मध्यप्रदेश क्राइम फाइल्स का पार्ट-टू आपने पढ़ लिया होगा, लेकिन शुरुआती कहानी भी पढ़िए। मंडला जिले के इस हत्याकांड ने पुलिस को दो साल तक उलझाए रखा। जंगल में मिली एक युवक की अर्धनग्न लाश, एक उलझी हुई प्रेम कहानी और सबूतों का ऐसा अकाल कि पुलिस के हाथ दो महीने तक गांव में डेरा डालने के बाद भी खाली रहे। पढ़ें पूरी खबर…
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