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Maha Shivratri 2026: मान्यताओं के अनुसार, महाशिवरात्रि की अर्धरात्रि साधना और सिद्धि पाने के लिए बेहद अनुकूल होती है. इसी वजह से तंत्र साधक इस अवसर पर विशेष जप, तप और साधना में लीन हो जाते हैं.
उज्जैन. हिंदू धर्म में फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को अत्यंत पावन माना गया है. इसी शुभ तिथि पर पूरे भारतवर्ष में महाशिवरात्रि का महान पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है. इस दिन श्रद्धालु भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और व्रत रखते हैं. महाशिवरात्रि केवल दिन तक सीमित नहीं रहती बल्कि इसका वास्तविक महत्व रात्रि काल में माना गया है. सुबह से ही शिव पूजन की प्रक्रिया आरंभ हो जाती है, जो रात्रि तक निरंतर चलती रहती है. शास्त्रों के अनुसार, रात्रि के समय की गई शिव आराधना विशेष फलदायी होती है. यह पर्व तंत्र साधकों के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण होता है. मान्यता है कि महाशिवरात्रि की रात तंत्र साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ समय होती है. इस दिन साधक भगवान शिव की उपासना कर अपनी साधना शक्ति को बढ़ाने का प्रयास करते हैं. उज्जैन के आचार्य आनंद भारद्वाज से जानते हैं कि महाशिवरात्रि की रात्रि का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व क्या है और क्यों यह रात इतनी विशेष मानी जाती है.
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी दिन रविवार को शाम 05 बजकर 04 मिनट से शुरू होगी. यह चतुर्दशी तिथि 16 फरवरी दिन सोमवार को शाम 5 बजकर 34 मिनट तक रहेगी. ऐसे में महाशिवरात्रि 15 फरवरी दिन रविवार को मनाई जाएगी. 15 फरवरी को महाशिवरात्रि व्रत रखा जाएगा और भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा की जाएगी.
क्यों किया जाता है महाशिवरात्रि का जागरण?
मान्यता है कि महाशिवरात्रि की इस रात जागकर भगवान शिव की भक्ति करने से आत्मा शुद्ध होती है और आध्यात्मिक उन्नति मिलती है. पंडित आनंद भारद्वाज के अनुसार, महाशिवरात्रि की रात ऐसी होती है, जब शरीर में ऊर्जा ऊपर की ओर बढ़ती है, जिससे ध्यान और भक्ति का असर ज्यादा होता है. अंधकार को अज्ञान का प्रतीक माना जाता है और शिवजी की पूजा करके हम अपने भीतर के नकारात्मक विचारों को दूर कर सकते हैं, इसलिए इस रात जागकर शिव भक्ति करना शुभ माना जाता है.
तांत्रिकों के लिए खास महाशिवरात्रि की रात
महाशिवरात्रि की रात हर शिवभक्त के लिए आस्था और भक्ति से भरी होती है लेकिन इस रात का महत्व तंत्र साधकों के लिए और भी अधिक माना जाता है. शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार, महाशिवरात्रि की अर्धरात्रि साधना और सिद्धि प्राप्ति के लिए अत्यंत अनुकूल समय होती है. इसी कारण तंत्र साधक इस अवसर पर विशेष तप, जप और साधना में लीन हो जाते हैं. आमतौर पर तंत्र साधक सामान्य दिनों में बहुत कम दिखाई देते हैं लेकिन महाशिवरात्रि की रात उन्हें भगवान शिव की उपासना में पूर्ण रूप से डूबा हुआ देखा जा सकता है. इस समय वे शिव कृपा प्राप्त करने और अपनी साधनात्मक शक्तियों को सुदृढ़ करने के लिए विशेष अनुष्ठान करते हैं. मान्यता है कि इस पावन रात्रि में जो भी श्रद्धालु सच्चे हृदय और पूर्ण विश्वास के साथ भगवान भोलेनाथ की आराधना करता है, उसकी मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होती हैं. यही कारण है कि तंत्र साधक और तांत्रिक इस दिव्य रात्रि की प्रतीक्षा पूरे वर्ष बेसब्री से करते हैं.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
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