स्कूल क्रिकेट के रिकॉर्डधारी, इंटरनेशनल में नहीं चल पाई दादागीरी, सचिन के जिगरी को खा रही बीमारी

स्कूल क्रिकेट के रिकॉर्डधारी, इंटरनेशनल में नहीं चल पाई दादागीरी, सचिन के जिगरी को खा रही बीमारी


विनोद कांबली, वो नाम जो सचिन तेंदुलकर के इर्द-गिर्द रहता है. भारतीय क्रिकेट में विनोद कांबली का नाम एक ऐसे बल्लेबाज के रूप में लिया जाता है जिन्हें भरपूर मौका मिला, लेकिन फेर रहे. स्कूल क्रिकेट में रिकॉर्डधारी थे और इंटरनेशनल में दादागीरी नहीं चल पाई. उनके साथी सचिन तेंदुलकर का ग्राफ हमेशा आसमान छूता नजर आया. विनोद कांबली का जन्म उस शहर में हुआ था जिसे भारतीय क्रिकेट का पॉवरहाउस कहा जाता है. ये मुंबई है जहां 18 जनवरी 1972 कांबली जन्मे थे. 

स्कूल क्रिकेट में थे रिकॉर्डधारी

अपने साथी खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर के साथ स्कूल क्रिकेट में उन्होंने कई रिकॉर्ड बनाए थे. उसी दौर में यह अनुमान लग गया था कि भविष्य में दोनों क्रिकेटर भारत के लिए खेलेंगे. सचिन ने 1989 में ही भारत के लिए टेस्ट और वनडे फॉर्मेट में डेब्यू कर लिया. विनोद कांबली का डेब्यू का इंतजार थोड़ा लंबा था. कांबली ने 1991 में वनडे और 1993 में टेस्ट में डेब्यू किया था. कांबली का टेस्ट डेब्यू ठीक 33 साल पहले यानी 29 जनवरी 1993 को कोलकाता के इडन गार्डेन में इंग्लैंड के खिलाफ हुआ था. इस मैच में भारतीय टीम को जीत मिली थी, लेकिन कांबली का प्रदर्शन साधारण रहा था.

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भारत ने बनाए थे 371 रन

मोहम्मद अजहरुद्दीन की कप्तानी वाली भारतीय टीम ने इस मैच में टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया था. अजहरुद्दीन के 182 रन की मदद से भारत ने पहली पारी में 371 रन बनाए थे. तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी के लिए आए विनोद कांबली सिर्फ 16 रन बना सके थे. इंग्लैंड पहली पारी में 163 रन पर सिमट गई थी. भारत को 208 रन की लीड मिली थी. इंग्लैंड को फॉलोऑन खेलना पड़ा. दूसरी पारी में इंग्लैंड 286 रन पर सिमट गई. जीत के लिए भारत को 79 रन बनाने थे. भारतीय टीम ने 2 विकेट पर 82 रन बनाकर मैच 8 विकेट से जीत लिया. दूसरी पारी में कांबली के पास ज्यादा समय नहीं था. वह 18 रन बनाकर नाबाद रहे.

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बीमारी से परेशान कांबली

कांबली ने अपने टेस्ट करियर में 17 मैच खेले. उन्होंने 17 टेस्ट की 21 पारियों में 4 शतक और 3 अर्धशतक लगाते हुए 1,084 रन बनाए. उनका औसत 54.20 था और सर्वाधिक स्कोर 227 था. वनडे फॉर्मेट में कांबली का करियर अपेक्षाकृत लंबा रहा. 104 वनडे की 97 पारियों में 2 शतक और 14 अर्धशतक की मदद से 2,477 रन उन्होंने बनाए. अपना आखिरी वनडे उन्होंने 29 अक्टूबर 2000 को खेला था. विनोद कांबली को उनके करियर के शुरुआती दिनों में तकनीकी रूप से सचिन तेंदुलकर से मजबूत माना गया था, लेकिन अनियंत्रित जीवन शैली और खेल के प्रति कम समर्पण की वजह से कांबली अपने करियर में वो ऊंचाई हासिल नहीं कर सके, जिसकी क्षमता उनमें थी. हाल के दिनों में कांबली अपनी बीमारी और आर्थिक परेशानी की वजह से चर्चा में रहे हैं. 



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