ओले बरसे… और टूट गए सपने, सदमा नहीं झेल पाया उज्जैन का किसान, मरने से पहले बनाया वीडियो

ओले बरसे… और टूट गए सपने, सदमा नहीं झेल पाया उज्जैन का किसान, मरने से पहले बनाया वीडियो


उज्जैन. मध्य प्रदेश के मालवा अंचल में मौसम की बेरहमी ने किसानों की उम्मीदों को चकनाचूर कर दिया. अचानक गिरे मावठे ने तेज बारिश और ओलावृष्टि का विकराल रूप ले लिया. आसमान से बरसते ओलों और तेज हवाओं ने खेतों में खड़ी मेहनत को पलभर में तबाही में बदल दिया. उज्जैन जिले के ग्रामीण इलाकों में हालात सबसे ज्यादा दर्दनाक रहे, जहां गेहूं, आलू, लहसुन, प्याज और चने की फसलें पूरी तरह नष्ट हो गईं.

महीनों की मेहनत, कर्ज और भविष्य के सपने सब कुछ ओलों की मार में बिखर गया. फसल बर्बादी के इस गहरे सदमे को माकड़ौन क्षेत्र का एक किसान सहन नहीं कर सका. टूट चुकी उम्मीदों और बढ़ती चिंताओं के बीच उसने जिंदगी से हार मान ली. यह घटना न सिर्फ एक किसान की मौत है, बल्कि सिस्टम और प्रकृति के बीच पिसते अन्नदाता के दर्द की चीख है.

जान देने से पहले जताया दुख 
अपनी आंखों के सामने मेहनत की फसल उजड़ते देख किसान का दिल पूरी तरह टूट चुका था. मंगलवार रात उसने अपने दर्द और बेबसी को कैमरे में कैद कर सोशल मीडिया पर साझा किया, मानो वह दुनिया को अपना आख़िरी सच बता रहा हो. इसके कुछ ही घंटों बाद, आधी रात के करीब वह खेत पहुंचा और वहीं अपनी जान दे दी. इस घटना की खबर फैलते ही पूरे जिले में सनसनी मच गई. गांव से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक शोक और आक्रोश का माहौल बन गया. सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासनिक अधिकारी और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया. यह घटना एक बार फिर अन्नदाता की मजबूरी और उसके दर्द पर गंभीर सवाल खड़े कर गई.

खुशियां की जगह मातम
मृतक किसान पंकज अपने पीछे एक टूटता हुआ परिवार छोड़ गया है. घर में बुज़ुर्ग मां, दो बहनें, पत्नी और दो मासूम बच्चे हैं. 8 साल का बेटा और 5 साल की बेटी, जो अभी यह भी नहीं समझ पाए हैं कि उनके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ चुका है. परिवार पहले ही गहरे सदमे से गुजर रहा था, क्योंकि पंकज के पिता का निधन बीते अप्रैल महीने में हो चुका था. खुशी की जो थोड़ी-सी उम्मीद घर में जगी थी, वह भी दो दिन पहले हुई एक बहन की सगाई तक ही सीमित रह गई. लेकिन किसे पता था कि यह खुशी इतनी जल्दी मातम में बदल जाएगी.

पीड़ित परिजनों ने बताया कि मंगलवार शाम उन्होंने पंकज को कई बार फोन लगाया, लेकिन उसने कॉल रिसीव नहीं किया. रात करीब साढ़े दस बजे तक वह खेत पर ही मौजूद था. आसपास के लोगों ने भी उसे देखा, लेकिन किसी को अंदेशा नहीं था कि वह अपने मन में इतना गहरा दर्द समेटे बैठा है. देर रात जब उसकी तलाश शुरू हुई, तब जाकर इस दिल दहला देने वाली सच्चाई का खुलासा हुआ.

विधायक और पुलिस ने कही यह बात 
विधायक महेश परमार ने बताया कि किसान ने फसल तबाही का दर्द एक वीडियो के ज़रिए सोशल मीडिया पर साझा किया था, जिसके कुछ समय बाद उसने आत्मघाती कदम उठा लिया. उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग की है.

साथ ही, ओलावृष्टि से प्रभावित इलाकों में तत्काल सर्वे कराकर किसानों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए प्रशासन को पत्र भी भेजा गया है. वहीं, माकड़ौन थाना प्रभारी प्रदीप राजपूत के अनुसार किसान पंकज मालवीय की मौत के मामले में मर्ग कायम कर पोस्टमार्टम कराया गया है. पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है. पुलिस पूरे मामले की हर पहलू से जांच कर रही है और सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो की भी पड़ताल की जा रही है.



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