UGC Equity Regulations Controversy: UGC के नए इक्विटी रेगुलेशंस को लेकर देशभर के कॉलेज और यूनिवर्सिटी कैंपस में चल रहे विरोध के बीच कांग्रेस सांसद और संसदीय समिति के सदस्य दिग्विजय सिंह ने बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने साफ कहा है कि छात्रों के गुस्से और भ्रम की असली वजह संसदीय समिति नहीं, बल्कि खुद UGC है. दिग्विजय सिंह के मुताबिक कई ऐसे फैसले हैं, जो UGC ने अपनी मर्जी से लिए और अब उसी का खामियाजा छात्रों और शिक्षण संस्थानों को भुगतना पड़ रहा है.
पीसी शर्मा का यूजीसी विवाद पर सामने आया बयान
मध्यप्रदेश के पूर्व कानून मंत्री पीसी शर्मा का यूजीसी विवाद पर बड़ा बयान सामने आया है. बढ़ती कंट्रोवर्सी पर उन्होंने सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि फर्जी शिकायत करने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. इस तरह के मामलों में शिकायत की संख्या असामान्य रूप से ज्यादा है. मामले पर फिर से सुनवाई हो और नया फाइनल ड्राफ्ट लाया जाए.
विश्व गुरु नहीं, बाबा गुरु बना दिए” मंडला में कांग्रेस का तीखा हमला
मंडला. जिला कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व विधायक डॉ. अशोक मर्सकोले ने मंडला में प्रेस बयान के दौरान धीरेंद्र शास्त्री और केंद्र सरकार पर कड़ा हमला बोला. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी देश को विश्व गुरु बनाने के बजाय बाबाओं को विश्व गुरु बना रहे हैं. मर्सकोले ने धीरेंद्र शास्त्री के बयानों को समाज में दरार डालने वाला और “सत्ता प्रायोजित प्रोपेगेंडा” करार दिया. UGC के नए प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि सरकार सुरक्षा कवच के नाम पर “हथियार” तैयार कर रही है और OBC व सामान्य वर्ग के बीच जानबूझकर वैमनस्यता फैलाई जा रही है. उन्होंने धार्मिक मंचों से भड़काऊ बयानबाजी बंद करने और नीतियों में पारदर्शिता लाने की मांग की.
सोशल मीडिया पोस्ट में दिग्विजय सिंह ने बताई अंदर की बात
Note on UGC Equity Regulations
● The mothers of Payal Tadvi and Rohith Vemula – and the prompting of the Supreme Court – Modi Government and the UGC came with draft UGC Equity Regulations in February 2025.
● In December 2025, the Parliamentary Standing Committee on Education…
दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक लंबी पोस्ट लिखते हुए कहा कि नए UGC इक्विटी रेगुलेशंस को लेकर कैंपस में भारी आक्रोश और कन्फ्यूजन है. उन्होंने स्पष्ट किया कि संसदीय समिति ने कभी यह सिफारिश नहीं की थी कि झूठी शिकायत करने वाले छात्रों पर सजा का प्रावधान हटाया जाए. यह फैसला पूरी तरह से UGC ने एकतरफा (unilaterally) लिया है.
UGC विरोध पर मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल का बड़ा बयान
UGC के नए नियमों को लेकर चल रहे विरोध पर कैबिनेट मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि किसी को भी भ्रम में नहीं रहना चाहिए, क्योंकि हर नवाचार में शुरुआत में चुनौतियां आती हैं. मंत्री पटेल ने स्पष्ट किया कि सरकार हठधर्मिता से फैसले नहीं करती और सभी पक्षों की बात सुनी जाती है. उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा किए जा रहे अन्य नवाचारों का भी विरोध हो रहा है, लेकिन समय के साथ उनकी उपयोगिता समझ में आती है. मंत्री का कहना है कि सरकार का मकसद व्यवस्था में सुधार और छात्रों के हित में बदलाव करना है.
सवर्ण समाज BJP का वोट बैंक
मुरैना. महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष रीना बौरासी ने मुरैना में प्रेस वार्ता के दौरान बड़ा राजनीतिक बयान दिया. उन्होंने कहा कि सवर्ण समाज BJP का वोट बैंक है, जबकि कांग्रेस हमेशा SC, ST, दलित, आदिवासी और पिछड़ा वर्ग के साथ रही है, है और आगे भी रहेगी. मीडिया द्वारा UGC को लेकर पूछे गए सवाल पर दिए गए उनके बयान के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है. उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं. प्रेस वार्ता में ग्रामीण जिला अध्यक्ष मधुराज सिंह तोमर, शहरी जिला अध्यक्ष गजेन्द्र जाटव, विधायक दिनेश गुर्जर और महिला कांग्रेस की पूर्व जिला अध्यक्ष नजमा बेगम भी मौजूद रहीं.
झूठे मामलों पर सजा हटाने से बढ़ी चिंता
दिग्विजय सिंह का कहना है कि ड्राफ्ट रेगुलेशन में मौजूद वह प्रावधान, जिसमें फर्जी या झूठी शिकायत दर्ज कराने पर दंड का नियम था, उसे अंतिम नियमों से हटा दिया गया. यही वजह है कि खासतौर पर जनरल कैटेगरी के छात्रों और फैकल्टी में डर और असंतोष बढ़ा है. छात्रों को आशंका है कि इस प्रावधान के नहीं होने से झूठे मामलों का खतरा बढ़ सकता है.
जनरल कैटेगरी को बाहर रखने पर भी UGC पर सवाल
कांग्रेस नेता ने यह भी साफ किया कि जनरल कैटेगरी के छात्रों को भेदभाव से सुरक्षा वाले प्रावधानों से बाहर रखने का फैसला भी UGC का ही था. इसमें संसदीय समिति की कोई भूमिका नहीं रही. दिग्विजय सिंह के मुताबिक इससे यह संदेश गया कि जैसे भेदभाव करने वाले सिर्फ जनरल कैटेगरी के छात्र ही हैं, जिसने विवाद को और गहरा कर दिया.
संसदीय समिति की अहम सिफारिश को किया नजरअंदाज
दिग्विजय सिंह ने बताया कि संसदीय समिति ने Recommendation D के तहत साफ तौर पर कहा था कि UGC को भेदभावपूर्ण व्यवहार की एक विस्तृत और स्पष्ट सूची बनानी चाहिए. इसका मकसद था कि छात्रों और संस्थानों दोनों को साफ समझ हो कि किन परिस्थितियों में कार्रवाई होगी और कानून का दुरुपयोग न हो. लेकिन हैरानी की बात यह है कि UGC ने इस बेहद अहम सुझाव को भी खारिज कर दिया.
स्पष्ट परिभाषा होती तो फर्जी केस का डर नहीं होता
दिग्विजय सिंह का तर्क है कि अगर UGC ने भेदभाव को साफ-साफ परिभाषित किया होता, तो आज कैंपस में ‘फर्जी केस’ का डर ही पैदा नहीं होता. नियमों की अस्पष्टता ने ही हालात को बिगाड़ा है. अब इस पूरे मामले को सुलझाने की जिम्मेदारी शिक्षा मंत्रालय की है, क्योंकि उलझन भी उसी सिस्टम से पैदा हुई है.