निमाड़ के लिए वरदान बनी इस फल की खेती, कम पानी में बंपर पैदावार

निमाड़ के लिए वरदान बनी इस फल की खेती, कम पानी में बंपर पैदावार


खंडवा. मध्य प्रदेश के खंडवा निमाड़ क्षेत्र में खेती हमेशा से चुनौती भरी रही है. तेज गर्मी, कम बारिश, हल्की मिट्टी और लगातार गिरता जलस्तर किसानों के लिए बड़ी परेशानी बना हुआ है लेकिन अब यही चुनौतियां अवसर में बदलती नजर आ रही हैं. पूर्व निमाड़ के कई इलाकों में बेर की उन्नत किस्मों की खेती किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है. कम पानी, कम लागत और कम देखरेख में तैयार होने वाली यह खेती अब किसानों की रोजाना आमदनी का मजबूत जरिया बनती जा रही है. खास बात यह है कि इसमें सघन बागवानी मॉडल अपनाकर किसान एक ही जमीन से ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं.

जय कृषि किसान क्लीनिक के कृषि एक्सपर्ट नवनीत रेवापाटी लोकल 18 को बताते हैं कि निमाड़ में अब बेर की खेती तेजी से बढ़ रही है. किसान कश्मीरी रेड एप्पल, बाला सुंदरी, मिस इंडिया और रेड एप्पल जैसी उन्नत किस्में लगा रहे हैं, जिनका बाजार में अच्छा भाव मिल रहा है. उन्होंने बताया कि इस समय किसानों को बेर का भाव 40 से 45 रुपये प्रति किलो तक मिल रहा है. यह पूरी तरह नगदी फसल है, जिसमें रोज बिक्री से आमदनी होती है. सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें न तो ज्यादा बीमारी आती है और न ही अधिक सिंचाई की जरूरत पड़ती है.

20 से 30 हजार में शुरू हो सकती है खेती
बेर की खेती कर रहे किसान राजू पटेल और गोपाल पटेल लोकल 18 को बताते हैं कि किसान इस खेती की शुरुआत सिर्फ 500 पौधों से कर सकते हैं. इन पौधों की लागत करीब 20 से 30 हजार रुपये आती है. एक एकड़ में पौधों की दूरी 10×10 फीट रखी जाती है. शुरुआती वर्षों में एक पौधे से 15 से 20 किलो तक बेर मिल जाता है और जैसे-जैसे पौधा बड़ा होता है, उत्पादन भी साल दर साल बढ़ता चला जाता है. किसानों का कहना है कि इसके पौधे साउथ इंडिया की नर्सरी में आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, एक एकड़ में बेर की उन्नत खेती से किसान 4 से 5 लाख रुपये सालाना तक कमा सकते हैं. खास बात यह है कि यह पौधा 20 साल तक लगातार फल देता है, जिससे यह खेती लंबे समय तक स्थायी आमदनी का जरिया बन जाती है.

इन किस्मों की खेती से मिल रहा ज्यादा मुनाफा
निमाड़ में फिलहाल जिन किस्मों से किसानों को अच्छा लाभ मिल रहा है, उनमें गोला, चूहारा, बगवाड़ी, जोगिया, सेब, डांडन, थॉर्नलेस, कैथली, अलीगंज, सेनूर-1, जेडजी-3, उमरान, इलायची, टिकड़ी, थाई एप्पल, कश्मीरी रेड एप्पल, बाला सुंदरी, मिस इंडिया महारवाड़ी, कड़क और गोमा कीर्ति जैसी उन्नत किस्में शामिल हैं. कम पानी में भी भरपूर उत्पादन बेर का पौधा शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों के लिए बेहद उपयुक्त माना जाता है. इसकी जड़ें जमीन के भीतर गहराई तक जाती हैं, जिससे यह कम वर्षा में भी नमी को संभाल लेता है. यही कारण है कि सूखे जैसे हालात में भी इसका उत्पादन प्रभावित नहीं होता.

एक जमीन, दो फसल और डबल मुनाफा
सघन बागवानी मॉडल के तहत किसान बेर के पौधों को पास-पास लगाकर मिश्रित खेती भी कर सकते हैं. यानी एक ही खेत में साथ-साथ दूसरी फसल लेकर डबल मुनाफा कमाया जा सकता है. निमाड़ के किसानों के लिए यह खेती अब सिर्फ विकल्प नहीं बल्कि भविष्य की मजबूत राह बनती जा रही है.



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