श्योपुर जिले के ग्राम जैदा में नियमों को ताक पर रखकर अवैध कॉलोनी विकसित करने वाले कॉलोनाइजर पुरुषोत्तम सिंघल पर प्रशासन ने कार्रवाई की है। अनुविभागीय अधिकारी ने जांच के बाद कॉलोनाइजर को दोषी पाते हुए 50 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। इसके साथ ही विवादित भूमि पर प्लॉटों की खरीद-बिक्री (रजिस्ट्री) पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। बिना अनुमति के बेचे जा रहे थे प्लॉट तहसीलदार श्योपुर की जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि ग्राम जैदा के विभिन्न सर्वे नंबरों की 0.523 हेक्टेयर भूमि पर बिना किसी वैधानिक अनुमति के कॉलोनी काटी जा रही थी। कॉलोनाइजर ने न तो टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TCP) से नक्शा पास कराया था और न ही नगर पालिका या पंचायत से कोई एनओसी ली थी। नियमों का उल्लंघन कर यहां सी.सी. रोड बनाकर छोटे-छोटे भू-खंड बेचे जा रहे थे। मूलभूत सुविधाओं का अभाव, नियमों की अनदेखी जांच दल, पटवारी और पंचायत सचिव के बयानों से स्पष्ट हुआ कि इस अवैध कॉलोनी में बिजली, पानी, सीवर, सड़क और नाली जैसी बुनियादी सुविधाएं तक नहीं थीं। साथ ही, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए आरक्षण और आश्रय निधि शुल्क जमा करने जैसे अनिवार्य नियमों की भी अनदेखी की गई। कॉलोनाइजर का यह तर्क कि भूमि का ‘आवासीय डायवर्सन’ हो चुका है, प्रशासन ने खारिज कर दिया। एसडीओ ने स्पष्ट किया कि केवल डायवर्सन होना कॉलोनी विकसित करने का लाइसेंस नहीं है। एसडीओ श्योपुर ने अपने आदेश में कहा- “मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993′ के तहत अवैध कॉलोनी निर्माण एक दंडनीय अपराध है। आदेश के अनुसार, जब तक सभी वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी नहीं हो जातीं, तब तक इस भूमि के किसी भी प्लॉट का हस्तांतरण मान्य नहीं होगा और उसे शून्य माना जाएगा।” इस आदेश की प्रति कलेक्टर और उपपंजीयक (रजिस्ट्रार) को भी भेज दी गई है ताकि भू-खंडों की रजिस्ट्री रोकी जा सके।
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