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Meethi Saloni Recipe: बघेलखंड की पारंपरिक मिठाई मीठी सलोनी आज भी लोगों के दिलों पर राज कर रही है. आसान सामग्री, खस्ता बनावट और संतुलित मिठास इसकी सबसे बड़ी खासियत है. सतना की मीणा द्विवेदी बताती हैं कि यह रेसिपी उन्होंने अपनी दादी-नानी से सीखी है. सही मोयन और धीमी आंच पर तलने से इसका स्वाद दोगुना हो जाता है. एयरटाइट डिब्बे में रखने पर यह मिठाई छह महीने तक खराब नहीं होती.
शिवांक द्विविद, सतना: बघेलखंड की पहचान सिर्फ उसकी बोली, लोकगीत या इतिहास तक सीमित नहीं है बल्कि यहां की रसोई में छुपे पारंपरिक स्वाद भी इस अंचल की सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखते हैं. ऐसी ही एक पारंपरिक मिठाई है मीठी सलोनी जिसे कई जगहों पर शक्करपारे के नाम से भी जाना जाता है. खस्ता बनावट, संतुलित मिठास और लंबे समय तक सुरक्षित रहने की क्षमता के कारण यह आज भी हर उम्र के लोगों की पसंद बनी हुई है. लोकल 18 से बातचीत में सतना की स्थानीय निवासी मीणा द्विवेदी बताती हैं कि यह रेसिपी उन्होंने अपनी मां और दादी से सीखी है और आज भी यह उनके घर में साल में कई बार जरूर बनती है.
आसान सामग्री, देसी अंदाज
इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे बनाने के लिए किसी महंगे या मुश्किल से मिलने वाले सामान की जरूरत नहीं पड़ती. आमतौर पर घर में मौजूद मैदा या गेहूं का आटा, घी या तेल, चीनी और थोड़ा सा दूध या पानी ही इसकी बुनियाद बनते हैं. सही मात्रा में मोयन यानी घी का इस्तेमाल ही इसकी खस्तास का असली राज है. यदि मोयन संतुलित हो तो सलोनी न सिर्फ स्वादिष्ट बनती है बल्कि लंबे समय तक कुरकुरी भी बनी रहती है.
सही आटा और धैर्य का तड़का
मीठी सलोनी बनाते समय आटे का सख्त होना बेहद जरूरी माना जाता है. नरम आटा सलोनी को मुलायम बना सकता है जिससे उसका पारंपरिक खस्ता स्वाद खत्म हो जाता है. आटा गूंथने के बाद उसे कुछ देर के लिए ढककर रखना भी जरूरी होता है ताकि वह सेट हो जाए. इसके बाद मोटी रोटी बेलकर उसे छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा जाता है. यही छोटे टुकड़े तलने के बाद मीठी सलोनी का रूप लेते हैं जो देखने में भी आकर्षक लगते हैं.
धीमी आंच पर तलने का महत्व
इसे तलते समय जल्दबाजी सबसे बड़ी गलती मानी जाती है. इसलिए इसे हमेशा धीमी से मध्यम आंच पर ही तला जाता है ताकि यह अंदर तक अच्छे से पक सके. तेज आंच पर तलने से सलोनी ऊपर से तो सुनहरी दिख सकती है लेकिन अंदर से कच्ची रह जाती है. अनुभवी गृहिणियों का मानना है कि धैर्य और सही तापमान ही इसे परफेक्ट बनाते हैं.
साल-छह महीने तक सुरक्षित रहने की खासियत
आज के समय में जब लोग ऐसे स्नैक्स ढूंढते हैं जो लंबे समय तक खराब न हों मीठी सलोनी एक बेहतरीन विकल्प बनकर सामने आती है. मीणा द्विवेदी बताती हैं कि अगर सलोनी को पूरी तरह ठंडा करके एयर-टाइट डिब्बे में रखा जाए तो यह करीब साल छह महीने तक खराब नहीं होती. यही वजह है कि त्योहारों के समय इसे ज्यादा मात्रा में बनाकर रखा जाता है.
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Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें