इंसानों ने नहीं बनाया ये मंदिर! एक रात में बनकर तैयार, यहां है चमत्कारी बावड़ी

इंसानों ने नहीं बनाया ये मंदिर! एक रात में बनकर तैयार, यहां है चमत्कारी बावड़ी


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Rai Rameshwaram Temple Shivpuri: राई रामेश्वरम मंदिर शिवपुरी जिला मुख्यालय से करीब 40 किमी दूर स्थित कॉलर तहसील से 7 किलोमीटर दूरी पर बना है. माना जाता है कि यह मंदिर एक रात में बनाया गया था. यहां दूरदराज से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं.

शिवपुरी. मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में एक ऐसा मंदिर है, जिसको एक रात में तैयार किया गया था. इसे बनाने में किसी भी इंसान की जरूरत नहीं पड़ी. यह मंदिर बड़े-बड़े पत्थरों से बनाया गया है. स्थानीय लोक कथाओं के अनुसार, यह मंदिर जिंदों (जिन्नात) द्वारा एक रात में बनाया गया. लोग बताते हैं कि इस मंदिर को राई रामेश्वरम मंदिर के नाम से जाना जाता है. जो लोग तमिलनाडु में स्थित रामेश्वरम मंदिर नहीं जा पाते, वे लोग इसी मंदिर में चारों धाम की यात्रा कर आते हैं और जल अर्पित करते हैं. यह मंदिर काफी प्राचीन बताया जाता है. यहां पर बनाई गई बावड़ी में हमेशा पानी रहता है.

राई रामेश्वरम मंदिर शिवपुरी जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कॉलर तहसील से 7 किलोमीटर दूर बना है. यह मंदिर एक रात में बनाया गया है. यहां दूरदराज से भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं. गांव के लोग यह भी मानते हैं कि मंदिर में एक ऐसा दरवाजा है, जिसमें निकलने पर लोग कहते हैं कि यह धर्मी है और जो इसमें फंस जाता है, उसे लोग अधर्मी नाम देते हैं. द्वार पर जो फंस जाता है, फिर महंत आकर उसे धक्का देते हैं. तब वह निकल पाता है. स्थानीय लोग इस परंपरा को धर्म-अधर्म के तौर पर देखते हैं.

मंदिर में चमत्कारी बावड़ी
मंदिर में एक बावड़ी है. ऐसा माना जाता है कि मंदिर के निर्माण के साथ-साथ इस बावड़ी का भी उसी दिन निर्माण हुआ था. इसमें पूरे 12 महीने पानी भरा रहता है. स्थानीय लोग इसे आस्था के रूप में देखते हैं. इस जल की ऐसी मान्यता है कि जब भी भंडारा होता है, तो इस जल को घी कम पड़ने पर उसमें डाल दिया जाता है, तो यह जल घी बन जाता है और कड़ाही पहले की तरह चलती रहती है. भंडारा खत्म होने पर घी को इस कुंड में डाल दिया जाता है.

ग्रामीण की जुबानी मंदिर की कहानी
गांव के जगदीश प्रसाद लोकल 18 को बताते हैं कि उनके गांव में राई रामेश्वरम के नाम से यह मंदिर हजारों साल पुराना है. बताया जाता है कि यह मंदिर इंसानों द्वारा नहीं बनाया गया बल्कि यह जिन्नात द्वारा एक रात में बनाया गया था. यहां एक ऐसा दरवाजा है, जिसमें मोटा-पतला कोई भी आदमी निकल सकता है लेकिन अगर वह अधर्मी है, तो दरवाजे में फंस जाता है.

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Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Local-18 व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.



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