झाबुआ जिले के ग्राम जामली में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर एक मंडल स्तरीय विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में क्षेत्र के विभिन्न समाजों के हिंदू बड़ी संख्या में शामिल हुए। कार्यक्रम में नशा मुक्ति और नारी शक्ति को बढ़ावा देने का संदेश दिया गया। सम्मेलन का शुभारंभ एक कलश यात्रा के साथ हुआ। यह यात्रा गांव के प्रमुख मार्गों से गुजरी, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। कलश यात्रा के बाद स्कूल मैदान पर मुख्य सभा आयोजित की गई। इन्होंने रखे अपने विचार दुर्गा वाहिनी पेटलावद की संयोजिका शिल्पा वर्मा ने संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में ‘पंच परिवर्तन’ विषय पर जानकारी दी। उन्होंने समाज में सकारात्मक बदलाव लाने और नागरिकों को अपनी भूमिका समझने पर जोर दिया। विभाग संघ चालक तेजराम जी ने अपने उद्बोधन में भारत के गौरवशाली संघर्ष, स्वतंत्रता आंदोलन की चुनौतियों, विभाजन की विभीषिका और अखंड भारत की अवधारणा पर विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर महामंडलेश्वर जितेंद्रानंद जी महाराज और संस्कृत भारती विभाग संयोजक मोहन डामर भी उपस्थित रहे। उन्होंने हिंदू समाज की एकता और संगठन की शक्ति पर बल दिया। नशे के दुष्परिणाम बताए सम्मेलन का एक विशेष आकर्षण सरस्वती शिशु मंदिर जामली के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत किए गए सांस्कृतिक कार्यक्रम थे। विद्यार्थियों ने अपनी नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से नशे के विनाशकारी दुष्परिणामों, उससे होने वाली गंभीर बीमारियों और सामाजिक पतन का प्रभावशाली चित्रण किया। उन्होंने समाज को यह संदेश दिया कि नशा व्यक्ति, परिवार और समाज को खोखला कर देता है। इसके अतिरिक्त, छात्राओं द्वारा मातृशक्ति के साहस और संस्कारों को समर्पित एक प्रेरणादायक नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की गई। साहसिक गतिविधियों और मानव पिरामिडों के प्रदर्शन ने उपस्थित जनसमूह को प्रभावित किया। इन प्रस्तुतियों ने सामाजिक चेतना और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को सुदृढ़ किया।
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