आशीष पांडे,शिवपुरी: शिवपुरी में अब खेती सिर्फ हल और बीज तक सीमित नहीं रह गई है. बदलते दौर में यहां के किसान नई तकनीक और समझदारी से खेती कर अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं. इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण हैं स्मार्ट किसान दिनेश रावत, जिन्होंने एक ही खेत में अलग-अलग फसलें उगाकर खेती का पूरा गणित ही बदल दिया है.
एक फसल नहीं, कई फसलें
दिनेश रावत ने अपने खेत में एक साथ टमाटर, गेहूं, चना, सरसों, प्याज और लहसुन जैसी फसलें उगा रखी हैं. उनका साफ कहना है कि सिर्फ एक ही फसल पर निर्भर रहना बहुत बड़ा जोखिम है. अगर मौसम खराब हो जाए या बाजार में दाम गिर जाएं, तो किसान पूरी तरह टूट जाता है. इसी खतरे से बचने के लिए उन्होंने अलग-अलग समय और मौसम में तैयार होने वाली फसलों को चुना.
ड्रिप सिंचाई से टमाटर की बंपर पैदावार
दिनेश रावत ने टमाटर की खेती में आधुनिक तकनीक अपनाई है. उन्होंने ड्रिप सिंचाई सिस्टम लगाया, जिससे पानी की बचत भी हुई और फसल को जरूरत के मुताबिक पानी मिला. इसका नतीजा यह रहा कि इस बार उनके खेत में टमाटर की रिकॉर्ड पैदावार हुई. वे बताते हैं कि इस साल शिवपुरी का टमाटर अच्छी क्वालिटी और बढ़िया उत्पादन के लिए पहचाना जा रहा है. बाजार में दाम भी अच्छे मिले, जिससे किसानों की मेहनत रंग लाई.
प्याज बनेगी अगली कमाई का जरिया
टमाटर के साथ-साथ दिनेश रावत ने ठंड के मौसम में प्याज की खेती भी की है. यह प्याज गर्मियों में तैयार होगी, जब बाजार में आमतौर पर इसके दाम बढ़ जाते हैं. उनका मानना है कि अगर मौसम और बाजार को समझकर फसल बोई जाए, तो किसान सही समय पर अच्छा मुनाफा कमा सकता है.
रिस्क मैनेजमेंट लगभग जीरो
दिनेश रावत कहते हैं कि उनकी खेती की सबसे बड़ी ताकत रिस्क मैनेजमेंट है. अगर किसी एक फसल में नुकसान भी हो जाए, तो दूसरी फसल उसकी भरपाई कर देती है. इसी वजह से उनका जोखिम लगभग खत्म हो जाता है और ध्यान सिर्फ कमाई बढ़ाने पर रहता है.
दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा
कृषि विशेषज्ञ भी मानते हैं कि एक ही खेत में अलग-अलग फसलें उगाना यानी कृषि विविधिकरण ही आज की स्मार्ट खेती है. इससे उत्पादन बढ़ता है, आय में इजाफा होता है और नुकसान का खतरा कम हो जाता है. दिनेश रावत जैसे किसान यह साबित कर रहे हैं कि सही योजना, नई तकनीक और समझदारी के साथ खेती की जाए, तो खेती घाटे का नहीं, मुनाफे का सौदा बन सकती है.