डिंडौरी में सैलाना विधायक कमलेश डोडियार ने भारत आदिवासी पार्टी के नेतृत्व में शनिवार को बिरसा मुंडा मैदान में प्रदर्शन किया। उन्होंने जिले में बांध निर्माण कार्य रोकने सहित 12 मांगों को लेकर राष्ट्रपति के नाम तहसीलदार आरपी मार्को को ज्ञापन सौंपा। विधायक ने चेतावनी दी कि यदि बांध निर्माण रद्द नहीं किया गया, तो भोपाल में मुख्यमंत्री का घेराव और विधानसभा के सामने धरना प्रदर्शन किया जाएगा। भारत आदिवासी पार्टी के जिला अध्यक्ष दिल्ली मरावी ने बताया कि ज्ञापन में कई प्रमुख मांगें शामिल हैं। इनमें जिले में बांध निर्माण पर रोक लगाना, पांचवीं अनुसूची को धरातल पर लागू करना, सात ब्लॉकों में नल-जल योजना का कार्य शीघ्र पूरा करना और हर गांव में नई स्कूल बिल्डिंग का निर्माण शामिल है। अन्य मांगों में जिला अस्पताल में सभी आवश्यक उपकरण और डॉक्टरों की उपलब्धता, डिंडौरी से अमरकंटक रेलवे लाइन का निर्माण, ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से चुनाव कराना, जिले में आईएएस, आईपीएस और आईएस कॉलेज की सुविधा, तथा हर ब्लॉक में आईटीआई की सुविधा प्रदान करना शामिल है। किसानों को खेती के लिए बिजली और पानी की सुविधा, गरीबों को सिंगल बत्ती कनेक्शन, पंचायत स्तर पर महंगाई के अनुसार 500 रुपए मजदूरी, दस वर्षों से कार्यरत अतिथि शिक्षकों का स्थायीकरण, पीएचडी कॉलेज और व्यापम परीक्षा केंद्र की सुविधा भी ज्ञापन में उठाई गई हैं। कांग्रेस और भाजपा नेताओं को कहा- ‘जानवर’ सभा को संबोधित करते हुए विधायक कमलेश डोडियार ने कांग्रेस और भाजपा के नेताओं को ‘जानवर’ कहकर संबोधित किया। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर आदिवासियों को उजाड़ने की परियोजनाएं बनाई जा रही हैं। डोडियार ने कहा कि पिछली सरकारों ने भी आदिवासियों के हितों के लिए काम नहीं किया। विधायक ने भविष्य की पीढ़ियों की चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हमें उनके जीवन के बारे में सोचना होगा। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को भेजकर ऐसी परियोजनाएं बनवाई गईं, जो आदिवासियों के जीवन को प्रभावित करेंगी। डोडियार ने सरकार से आदिवासियों के विकास पर ध्यान देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आदिवासी इस देश के मूल निवासी हैं और सदियों से खेती करते आ रहे हैं। विधायक ने जोर दिया कि सरकार को आदिवासियों की उपजाऊ जमीन और खेती के तरीकों की चिंता करने के बजाय, उनके कौशल विकास के लिए काम करना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना को ‘नौटंकी’ करार दिया और कहा कि सरकार को आदिवासियों के वास्तविक उत्थान पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
Source link