1500 में सिपाही, 3000 में थानेदार, यहां तो IG-DIG का भी रेट तय, इन बाप-बेटे को हल्के में न लें!

1500 में सिपाही, 3000 में थानेदार, यहां तो IG-DIG का भी रेट तय, इन बाप-बेटे को हल्के में न लें!


Khandwa News: खंडवा पुलिस का कंट्रोल रूम भले ही सिटी कोतवाली परिसर में हो, लेकिन खाकी वर्दी का असली हिसाब-किताब कोतवाली के बाहर होता है. यहां कोई सरकारी दफ्तर नहीं, बल्कि एक अनुभवी पिता और युवा बेटे के हाथ में कमान होती है. यहां तमाम वर्दी वाले आते हैं. फिर चाहे सिपाही हो या अफसर, सबका रेट तय है. ये ऐसी जगह है, जहां से हर वर्दी वाले का राब्ता कभी न कभी पड़ता ही है. चौंकिए नहीं, हम बात कर रहे हैं यादव टेलर की, जहां सुई-धागे के साथ अनुभव चलता है. जहां हर स्टार, हर पट्टी और हर बैज नियम से ही कंधों पर चढ़ाए जाते हैं.

यहां गलत स्टार लगा तो तुरंत पकड़ में आज जाएगा. गलत बैज लगाया तो खुद-ब-खुद उतर जाएगा. यादव टेलर बताते हैं कि खाकी पहनना आसान है, लेकिन सही तरीके से पहनना हर किसी के बस की बात नहीं. कौन-सी पोस्ट पर कितने स्टार लगेंगे, कौन-सी बेल्ट, कौन-सा बैज, कॉलर की चौड़ाई से लेकर टोपी के एंगल तक हर चीज पुलिस मैनुअल के हिसाब से तय करनी होती है. खंडवा में ता ये कहावत आम हो चली है “थाने की फाइल बाद में देखी जाती है, यादव टेलर की नजर पहले”. यहां वर्दी नहीं, जिम्मेदारी की सिलाई होती है.

नकली पुलिस की सटीक पहचान
यादव टेलर के ओनर सेवकराम यादव कहते हैं, “साहब, हम सिर्फ कपड़ा नहीं सिलते, हम जानते हैं कि जॉइनिंग के बाद कौन किस रैंक पर है. उसे क्या पहनना है. गलत एसेसरी पहनने वाला हमारे सामने ज्यादा देर टिक नहीं पाते.” नकली पुलिस भी यहीं पकड़ में आए. यादव टेलर का दावा है कि नकली पुलिस वालों को पहचानना उनके लिए सबसे आसान है. उन्होंने कई बार ऐसे लोगों को पकड़वाया है, जो खाकी पहनकर खुद को अफसर समझ बैठे थे.

एक युवक को पकड़वाया था…
पुराना किस्सा सुनाते हुए सेवकराम यादव बताते हैं, एक बार महाराष्ट्र से आया युवक पुलिस की वर्दी पहनकर दुकान पर पहुंचा. वह वर्दी सिलवाना चाहता था, लेकिन उसकी बेल्ट गलत थी और जूते भी नियम के मुताबिक नहीं थे. बस यहीं से शक हुआ, तुरंत सामने बैठे थानेदार को सूचना दी गई. जांच हुई तो युवक नकली पुलिस वाला निकला. पूछताछ में सामने आया कि वह अपनी गर्लफ्रेंड को पुलिसकर्मी बताकर घूम रहा था. लेकिन, उसकी यह चाल ज्यादा देर नहीं चल पाई.

यहां रेट भी तय है…
यादव टेलर की सबसे चर्चित बात इनकी “रेट लिस्ट” है, जो पूरे शहर में मशहूर है:
₹1500 में सिपाही
₹2000 में हेड कांस्टेबल
₹2500 में सब इंस्पेक्टर
₹3000 में थानेदार
यह कीमत कपड़े की नहीं, बल्कि जिम्मेदारी, अनुशासन और रुतबे की सिलाई की है. कहते हैं, जितनी ऊंची पोस्ट, उतनी नपी-तुली सिलाई और उतना ही सधा हुआ कॉलर.

40 साल से खाकी की सेवा
Local 18 से बातचीत में सेवकराम यादव बताते हैं कि चार दशक से यह काम कर रहे हैं. पुलिस ही नहीं, बल्कि फॉरेस्ट विभाग, RPF, GRP, आबकारी विभाग सभी की वर्दी और एसेसरीज यहीं तैयार होती है. IG, DIG, SP, एडिशनल SP, थानेदार से लेकर सिपाही तक खंडवा में शायद ही कोई अधिकारी होगा, जिसकी वर्दी कभी न कभी यादव टेलर से न गुजरी हो.

अब संभाल रही दूसरी पीढ़ी
सेवकराम यादव कहते हैं कि अब यह जिम्मेदारी उनकी दूसरी पीढ़ी संभाल रही है. उनका बेटा शिवम यादव भी दुकान में सक्रिय है. दूसरी दुकान भी शुरू की गई है, जहां सभी तरह की पुलिस एसेसरीज उपलब्ध हैं. अब खंडवा के पुलिसकर्मियों को वर्दी या बैज के लिए इंदौर-भोपाल जाने की जरूरत नहीं, सब कुछ यहीं मिल जाता है.



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