MP के ‘वॉटरमैन’ को पद्मश्री…पहाड़ों में की पानी क्रांति, मोहन नागर की कहानी

MP के ‘वॉटरमैन’ को पद्मश्री…पहाड़ों में की पानी क्रांति, मोहन नागर की कहानी


भोपाल/बैतूल. मध्य प्रदेश के बैतूल से निकलकर एमपी जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष और अब देश के प्रतिष्ठित पुरस्कार पद्मश्री से सम्मानित होने ‘एमपी के वॉटरमैन’ नाम से फेमस मोहन नागर इस साल उन चार लोगों में शुमार हैं, जिन्हें देश के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक से नवाजा गया है. बैतूल के सारंगपुर जनपद के रायपुरिया गांव में जन्मे मोहन नागर को उनके पर्यावरण और नदियों को संरक्षित करने के लिए काम के लिए भारत सरकार ने पद्मश्री से पुरस्कृत करने का फैसला किया है. मोहन पर्यावरण और जल संरक्षण अभियान की शुरुआत को लेकर लोकल 18 को बताते हैं कि बैतूल जिले में अच्छी बारिश होने के बाद भी पहाड़ी क्षेत्र होने से बरसात का पानी नहीं रुकता था, इसलिए वहां बारिश के पानी को बचाने के लिए हमने स्थानीय आदिवासी समाज के पुराने तौर-तरीकों को अपनाकर समाज के साथ पिछले तीन दशकों से गंगा अवतरण अभियान चलाया. इस अभियान के तहत पहाड़ियों को हरा-भरा किया. इससे बैतूल के दर्जनों गांवों में जहां कभी पानी मिलना मुश्किल था, उन इलाकों में जल समस्या हल हो गई.

पद्मश्री किसको समर्पित करना चाहेंगे, सवाल के जवाब में मोहन नागर कहते हैं, ‘मैं यह अवॉर्ड जिनके कारण प्राप्त हुआ है, उन बैतूल के आदिवासी और जनजातीय समाज को और गंगा अवतरण अभियान से जुड़े हमारे हजारों कार्यकर्ताओं को यह पुरस्कार समर्पित करता हूं.’

युवाओं की भागीदारी सबसे अहम
युवाओं की भागीदारी को लेकर मोहन नागर ने कहा हमारे साथ 80 प्रतिशत से ज्यादा युवा और महिलाएं जुड़ी हुई हैं. बैतूल के गांव-गांव में सैकड़ों की संख्या में लोगों ने हमारे साथ कंधों पर गेती और फावड़ा लेकर पहाड़ों पर जाकर बहुत खंतीयां खोदी हैं, इसलिए युवा शक्ति पर्यावरण के महत्व को समझ रही है. मध्य प्रदेश में बदलाव साफ तौर पर दिखा है. एमपी में वन क्षेत्र बढ़ा है और लोगों में पर्यावरण के प्रति खासकर युवाओं की सोच में बदलाव आया है.

हकीकत में बदला ‘कैच द रैन’ स्लोगन
जल और नदियों के संरक्षण से बैतूल में जल क्रांति लाने वाले मोहन नागर आगे बताते हैं कि हमने पीएम नरेंद्र मोदी के ‘कैच द रेन’ यानी जहां बारिश गिरती है, वहीं उसको धरती में उतारो के स्लोगन को फॉलो करके इसे बैतूल की धरती पर हकीकत में बदला.

अपने किसान परिवार से मिली प्रेरणा
अपने काम की सीख को लेकर वह कहते हैं कि यह हमारे परिवार की प्रेरणा हैं. वह एक किसान परिवार से आते हैं. हमारे पूर्वजों को और उनके दादाजी को बचपन में ये सारे काम करते हुए देखा है और वहीं से इस काम की शुरुआत हुई. उसके बाद वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में स्वयंसेवक के रूप में और फिर विद्या भारती के कार्यकर्ता के रूप में पर्यावरण संरक्षण के कार्यों से जुड़े. बैतूल जिले में जब सामाजिक जीवन का काम शुरू किया, तो स्थानीय स्तर पर पर्यावरण और जल संरक्षण को समाज के साथ अभियान जिले से लेकर प्रदेश तक आगे बढ़ाया.

गांव-गांव में छिड़ा अभियान
मोहन नागर ने आगे कहा कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने एमपी जन अभियान परिषद में उपाध्यक्ष पद का दायित्व दिया. जिसके बाद अब प्रदेश की 23 हजार पंचायतों और 55 हजार गांवों में इस अभियान को हम ले जा रहे हैं. ग्रामोदय से अभ्युदय मध्य प्रदेश की टैगलाइन के साथ एमपी भी एक विकसित राज्य के रूप में विकसित भारत के साथ खड़ा होगा और इसमें पर्यावरण, ग्राम विकास और जल संरक्षण का बड़ा योगदान होगा.

‘गौरवान्वित महसूस करता हूं’
उन्होंने कहा कि जब उन्हें पद्मश्री दिए जाने की खबर मिली, तो वह नर्मदापुरम के नर्मदा घाट पर जन अभियान परिषद की टीम के साथ मां नर्मदा की सेवा कर रहे थे. उन्होंने कहा, ‘मुझे गर्व की अनुभूति हुई कि मुझे नर्मदा जयंती के दिन यह सम्मान मिला. मैं अपने आप को गौरवान्वित महसूस करता हूं.’



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