कैंसर इलाज में क्रांति! इंदौर ला रहा है 5 मिनट में थेरेपी करने वाली सुपर मशीन, बिना नुकसान सीधे ट्यूमर पर वार

कैंसर इलाज में क्रांति! इंदौर ला रहा है 5 मिनट में थेरेपी करने वाली सुपर मशीन, बिना नुकसान सीधे ट्यूमर पर वार


Indore Cancer Treatment Machine: कैंसर आज देश की सबसे गंभीर बीमारियों में से एक बन चुका है. वर्ष 2025 में जारी आंकड़ों के मुताबिक भारत में हर साल करीब 8.5 से 9 लाख लोगों की मौत कैंसर के कारण हो रही है. कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली पारंपरिक रेडिएशन थेरेपी से जहां बीमारी पर असर पड़ता है, वहीं शरीर को कई तरह के साइड इफेक्ट्स भी झेलने पड़ते हैं. लेकिन अब इस तस्वीर को बदलने जा रही है एक अत्याधुनिक तकनीक, जो जल्द ही इंदौर में शुरू होने वाली है.

इंदौर में आ रही दुनिया की सबसे आधुनिक कैंसर मशीन
कैंसर फाउंडेशन इंदौर द्वारा स्वीडन से इलेक्टा हार्मोनी लीनियर एक्सीलेटर मशीन मंगाई जा रही है. यह मशीन कैंसर के इलाज में अब तक की सबसे एडवांस रेडिएशन थेरेपी मशीन मानी जा रही है. करीब 6500 किलो वजनी यह हेवी मशीन जहाज के जरिए स्वीडन से भारत लाई जा रही है. मुंबई पोर्ट पर उतरने के बाद इसे विशेष ट्रांसपोर्ट से सड़क मार्ग द्वारा इंदौर लाया जाएगा.

₹30 करोड़ की मशीन, फाउंडेशन को मिली ₹17 करोड़ में
इस हाईटेक मशीन की बाजार कीमत करीब 30 करोड़ रुपए है. लेकिन जब फाउंडेशन ने कंपनी को बताया कि यह मशीन डोनेशन और सामाजिक सहयोग से खरीदी जा रही है, तो स्वीडन की कंपनी Elekta ने इसे मात्र ₹17 करोड़ रुपए में उपलब्ध कराया. यह अपने आप में एक बड़ी राहत और मिसाल है.

क्या है इलेक्टा हार्मोनी मशीन की खासियत?
कैंसर फाउंडेशन के डॉक्टर वीरेंद्र व्याय के अनुसार यह मशीन सामान्य एक्स-रे की तुलना में करीब 1000 गुना अधिक शक्तिशाली रेडिएशन पैदा करती है. लेकिन इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि रेडिएशन सिर्फ कैंसर कोशिकाओं पर ही केंद्रित रहता है. यह मशीन IGRT (Image Guided Radiation Therapy) और VMAT (Volumetric Modulated Arc Therapy) जैसी आधुनिक तकनीकों से लैस है. शरीर के अंगों के हिलने-डुलने के बावजूद यह मशीन ट्यूमर की सटीक लोकेशन पहचानकर उसी पर वार करती है.

20-30 मिनट नहीं, अब सिर्फ 2 से 5 मिनट में थेरेपी
जहां पुरानी रेडिएशन मशीनों से इलाज में 20 से 30 मिनट का समय लगता था, वहीं यह नई मशीन महज 2 से 5 मिनट में पूरी थेरेपी कर देती है. इससे मरीज को ज्यादा देर तक मशीन पर लेटना नहीं पड़ता और इलाज भी ज्यादा आरामदायक हो जाता है. सबसे बड़ी राहत यह है कि रेडिएशन केवल बीमार कोशिकाओं पर पड़ता है, इसलिए थकान, जलन और अन्य साइड इफेक्ट्स बेहद कम होते हैं.

बंकर जैसे कमरे में होगी मशीन की स्थापना
इस मशीन से निकलने वाला रेडिएशन बेहद शक्तिशाली होता है, इसलिए इसे सामान्य कमरे में नहीं रखा जा सकता. इसके लिए 4 फीट मोटी कंक्रीट की दीवारों और 6 फीट मोटी सीलिंग वाला विशेष बंकर बनाया गया है. इस कमरे का नक्शा एटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड से पास होने के बाद ही मशीन की स्थापना की जाएगी.

गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए वरदान
इस मशीन के आने से न केवल कैंसर के इलाज में आसानी होगी, बल्कि वे मरीज भी लाभ उठा सकेंगे जो महंगे निजी अस्पतालों में इलाज नहीं करा पाते. सरकारी योजनाओं के तहत इलाज संभव होगा, वहीं जो मरीज पूरी तरह असमर्थ हैं, उनका इलाज फाउंडेशन द्वारा पूरी तरह मुफ्त किया जाएगा.



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