झाबुआ जिले के पिपलीपाड़ा निवासी उदय बिलवाल ने अपने अधूरे सपनों को प्रेरणा में बदलकर युवाओं के लिए अवसर पैदा किया। अर्थशास्त्र में एमए करने के बाद उदय का भारतीय सेना या पुलिस में शामिल होने का सपना था। लेकिन नियति ने उन्हें शिक्षक की भूमिका सौंपी। अधूरे सपने को युवाओं की मदद में बदला साल 1999 में शिक्षक के पद पर नियुक्त होने के बाद, वे वर्तमान में संयुक्त सीनियर बालक छात्रावास झाबुआ में अधीक्षक के रूप में कार्यरत हैं। अपने सपने के अधूरे रह जाने के मलाल को उन्होंने अपनी ताकत बनाया। उन्होंने संकल्प लिया कि वे जिले के उन गरीब आदिवासी बच्चों के सपनों को टूटने नहीं देंगे जो आर्थिक तंगी के कारण महंगी फिजिकल कोचिंग का खर्च नहीं उठा सकते। इसी उद्देश्य के साथ टीचर ने साल 2015 में झाबुआ में मुफ्त फिजिकल एकेडमी की खोली। वे प्रतिदिन सुबह और शाम कॉलेज ग्राउंड पर युवाओं को ट्रैनिंग देते हैं। युवाओं को सुरक्षा बलों और सेना की दे रहे ट्रैनिंग यहां वे सेना की विभिन्न विंग्स जैसे पैरा कमांडो, अग्निवीर, और सीमा सुरक्षा बल के साथ-साथ एमपी पुलिस, एसआई, वन रक्षक और जेल प्रहरी जैसी परीक्षाओं के लिए 800 मीटर से लेकर 5 किलोमीटर की दौड़, लंबी कूद और गोला फेंक का निशुल्क प्रशिक्षण प्रदान करते हैं। उनकी मेहनत का परिणाम है कि अब तक जिले के 450 से अधिक युवा मध्य प्रदेश पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों में सेवाएं दे रहे हैं। दो युवा पैरा कमांडो बनकर जिले का नाम रोशन किया झाबुआ के दो युवाओं का चयन दुनिया के सबसे कठिन सैन्य बलों में से एक ‘पैरा कमांडो’ में हुआ है। आजादी के 77 वर्षों बाद झाबुआ को एक पहचान मिली। वर्तमान में ये दोनों लद्दाख की वादियों में तैनात होकर जिले का नाम रोशन कर रहे हैं। उदय बिलवाल की यह नि:शुल्क सेवा न केवल झाबुआ के आदिवासी युवाओं को आत्मनिर्भर बना रही है, बल्कि उन्हें मुख्यधारा से जोड़कर राष्ट्र निर्माण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने का मंच भी प्रदान कर रही है।
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