4 दिन में कैसे प्रेगनेंट हो गई पत्नी…हाईकोर्ट पहुंचा आर्मी जवान, तलाक केस में नया मोड़!

4 दिन में कैसे प्रेगनेंट हो गई पत्नी…हाईकोर्ट पहुंचा आर्मी जवान, तलाक केस में नया मोड़!


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MP News Today: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने आर्मी जवान के तलाक मामले में बच्चे के DNA टेस्ट के आदेश को सही ठहराया है. कोर्ट ने कहा कि यह जांच पत्नी पर लगाए गए व्यभिचार के आरोपों की सच्चाई जानने के लिए है, न कि बच्चे को अवैध ठहराने के लिए.
पति ने दावा किया था कि पत्नी ने चार दिन में प्रेग्नेंसी की जानकारी दी, जो मेडिकल रूप से संदेह पैदा करती है. यह विवाद तीन तलाक याचिकाओं और करीब 10 साल पुराने वैवाहिक तनाव से जुड़ा है. हाईकोर्ट का यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों में एक अहम कानूनी मिसाल बन सकता है.

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MP हाईकोर्ट ने क्यों सही ठहराया बच्चे का DNA टेस्ट

MP NEWS: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से एक ऐसा फैसला आया है, जिसने शादी, तलाक और पारिवारिक विवादों से जुड़े मामलों में नई बहस छेड़ दी है. मामला एक आर्मी जवान और उसकी पत्नी के बीच लंबे समय से चल रहे तलाक विवाद का है, जिसमें पत्नी ने बच्चे के DNA टेस्ट के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. लेकिन कोर्ट ने साफ कर दिया कि यह मामला बच्चे की वैधता पर सवाल उठाने का नहीं, बल्कि पत्नी पर लगाए गए आरोपों की जांच से जुड़ा है.

हाईकोर्ट ने क्या कहा, क्यों खारिज की पत्नी की याचिका?
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की एकलपीठ में जस्टिस विवेक जैन ने पत्नी की याचिका खारिज करते हुए फैमिली कोर्ट के DNA टेस्ट के आदेश को सही ठहराया. कोर्ट ने साफ कहा कि यह जांच किसी भी तरह से बच्ची को अवैध या नाजायज ठहराने के लिए नहीं है और न ही उसकी कानूनी पहचान पर इसका कोई असर पड़ेगा. कोर्ट का मकसद सिर्फ यह देखना है कि पत्नी पर लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है.

DNA सैंपल से इनकार किया तो क्या होगा?
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि अगर पत्नी DNA सैंपल देने से इनकार करती है, तो फैमिली कोर्ट को पूरा अधिकार होगा कि वह भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 114(h) या नए BSA 2023 के तहत उसके खिलाफ प्रतिकूल अनुमान लगाए. यानी सैंपल न देने का फायदा पत्नी को नहीं मिलेगा.

‘4 दिन में प्रेग्नेंसी’ का दावा क्यों बना सबसे बड़ा सवाल
मामले की सबसे चौंकाने वाली बात वही है, जिसने पूरे केस की दिशा बदल दी. पति ने कोर्ट को बताया कि वह भारतीय सेना में पदस्थ है और अक्टूबर 2015 में पत्नी के बुलाने पर घर आया था. लौटने के सिर्फ चार दिन बाद पत्नी ने उसे बताया कि वह गर्भवती है. कोर्ट ने माना कि मेडिकल साइंस के हिसाब से चार दिन में प्रेग्नेंसी का पता चलना बेहद संदिग्ध है. इसके अलावा बच्ची का जन्म भी अक्टूबर 2015 के करीब आठ महीने बाद हुआ, जिससे पति-पत्नी के साथ न होने की दलील और मजबूत हो जाती है.

तीन तलाक याचिकाएं और 10 साल का विवाद
यह कोई नया विवाद नहीं है. पहली तलाक याचिका 2019 में दायर हुई थी, जिसे आपसी सहमति से तलाक के आश्वासन पर वापस ले लिया गया. दूसरी याचिका भी 2019 में दाखिल हुई, लेकिन पत्नी दूसरी मोशन में पेश नहीं हुई और मामला 2 मार्च 2021 को बंद हो गया. इसके बाद 2021 में तीसरी तलाक याचिका दायर की गई, जो अब तक लंबित है और इसी में DNA टेस्ट की मांग की गई.

कोर्ट का साफ संदेश
हाईकोर्ट ने साफ कहा कि जब तलाक का आधार व्यभिचार हो, पति ने स्पष्ट रूप से कहा है कि बच्चे की वैधता या भरण-पोषण का मुद्दा न हो, तो DNA टेस्ट का आदेश देना कानूनन गलत नहीं है. यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक अहम नजीर माना जा रहा है.

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shweta singh

Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें

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4 दिन में कैसे प्रेगनेंट हो गई पत्नी…MP हाईकोर्ट पहुंचा आर्मी जवान!



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