69 Year Old Artist Journey: खंडवा सिर्फ अपनी ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक पहचान के लिए ही नहीं, बल्कि कला और कलाकारों के लिए भी जाना जाता है. निमाड़ अंचल की इस सांस्कृतिक धरती ने कई ऐसे हुनरबाज दिए हैं, जिन्होंने देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक अपनी कला का लोहा मनवाया है. इन्हीं में एक नाम है निमाड़ के प्रसिद्ध चित्रकार बैद्यनाथ वशिष्ठ सराफ, जिनकी उम्र भले ही 69 साल हो चुकी हो, लेकिन उनके हाथों का जादू और मन का जोश आज भी युवाओं को प्रेरणा देता है. बैद्यनाथ वशिष्ठ सराफ ने हाल ही में भारतीय लोक संस्कृति पर आधारित एक ऐसी अनोखी पेंटिंग तैयार की है, जिसमें देश के अलग-अलग राज्यों की लोक कलाओं, परंपराओं और जीवनशैली को एक ही कैनवास पर जीवंत कर दिया गया है. इस पेंटिंग में भारत की विविधता, रंग, लोक जीवन और परंपराएं इतनी खूबसूरती से उकेरी गई हैं कि इसे देखने वाला हर व्यक्ति कुछ पल के लिए ठहर जाता है. खास बात यह है कि उनकी बनाई पेंटिंग्स की मांग अब सिर्फ देश तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशों से भी इनके आर्टवर्क के लिए संपर्क किया जा रहा है.
बैद्यनाथ सराफ उन कलाकारों में से हैं, जो शोर-शराबे और दिखावे से दूर रहकर अपनी कलासाधना में लीन रहते हैं. खंडवा-निमाड़ में उन्होंने कला की एक ऐसी अलख जगाई है, जिसका असर आज हजारों विद्यार्थियों में दिखाई देता है. अब तक वे 7500 से ज्यादा विद्यार्थियों को कला की शिक्षा दे चुके हैं, जिनमें डॉक्टर, इंजीनियर, अधिकारी, बैंक मैनेजर, गृहणियां, विश्वविद्यालय की छात्राएं और स्कूल-कॉलेज की बेटियां शामिल हैं. उनकी सहज, सरल और आत्मीय वाणी बच्चों को कला से जोड़ने का काम करती है.
कई जिलों में छोड़ी कला की अमिट छाप
बैद्यनाथ वशिष्ठ सराफ ने मध्य प्रदेश के कई जिलों में अपनी कला की अमिट छाप छोड़ी है. बड़वानी में तत्कालीन कलेक्टर श्रीमत शुक्ला के कार्यकाल के दौरान उन्होंने करीब 200 फीट लंबी भित्ति चित्रकारी की. इसके अलावा कलेक्टर कार्यालय की ओर जाने वाली चट्टानों पर भी उन्होंने रॉक पेंटिंग का अद्भुत काम किया. आदिवासी संस्कृति और भीमबेटका जैसी प्राचीन सभ्यताओं से प्रेरित होकर उन्होंने चट्टानों पर पाषाण युग, ताम्र युग, लौह युग से लेकर आधुनिक कंप्यूटर युग तक की पूरी यात्रा को करीब 250 फीट लंबी पेंटिंग में दर्शाया है. इसे देखने पर ऐसा लगता है मानो मानव सभ्यता का पूरा इतिहास आंखों के सामने जीवंत हो उठा हो.नर्मदा नगर में भी उन्होंने 300 फीट लंबी पेंटिंग बनाई है, जिसमें लोक कला, प्रकृति और सांस्कृतिक जीवन को खास तौर पर उभारा गया है. वहीं, पिछले साल नर्मदा नगर में ही उन्होंने 200 फीट लंबी पेंटिंग के जरिए आदिवासी लोक कलाओं को दर्शाया, जिसे लोगों ने खूब सराहा.
कला के क्षेत्र में 45 साल से ज्यादा का अनुभव
Local 18 से बातचीत में बैद्यनाथ वशिष्ठ सराफ बताते हैं कि उनके शिष्यों में कई बड़े अधिकारी और नामचीन लोग शामिल हैं. इंदौर की वर्तमान एसपी, जो पहले खंडवा में एडिशनल एसपी रह चुकी हैं, सीमा अलावे भी उनके पास कला सीख चुकी हैं. उन्होंने शानदार पेंटिंग्स बनाईं और उनका एग्जीबिशन भी लगाया, जिसे लोगों से अच्छा रिस्पॉन्स मिला. उनके कई छात्र-छात्राएं आज देश-विदेश में फैशन डिजाइनर और कलाकार के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं. बैद्यनाथ सराफ बताते हैं कि उन्हें कला के क्षेत्र में 45 साल से ज्यादा का अनुभव है. उत्तर प्रदेश में उनके काम को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी सराहा है. अयोध्या में भी उन्होंने पेंटिंग बनाई है. इतना ही नहीं, वे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेंट करने के लिए भी विशेष पेंटिंग तैयार कर चुके हैं. हालांकि, बातचीत के दौरान उनके शब्दों में दर्द भी झलकता है.
वे कहते हैं कि देश-विदेश और अन्य राज्यों में उन्हें सम्मान मिला, लेकिन अपने ही शहर खंडवा में आज तक किसी जनप्रतिनिधि ने उन्हें या उनके छात्रों को कोई खास सम्मान नहीं दिया. सांसद हों, विधायक हों या महापौर, किसी ने भी स्थानीय कलाकारों को प्रोत्साहित करने की पहल नहीं की. उनकी आंखें नम हो जाती हैं जब वे कहते हैं कि शहर में पेंटिंग के नाम पर कुछ भी बना दिया गया, जबकि निमाड़ में एक से बढ़कर एक लोक कलाएं हैं, जिन्हें शहर की दीवारों पर जगह मिलनी चाहिए थी.
आज भी बैद्यनाथ वशिष्ठ सराफ के घर की क्लास में चारों तरफ कला का संसार बसा हुआ है. दीवारों से लेकर कोनों तक उनके और उनके छात्रों के बनाए आर्टवर्क सजे हैं. अवॉर्ड्स की बात करें तो हर विधा में उन्होंने पुरस्कार जीते हैं और कई रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं. 69 साल की उम्र, सफेद दाढ़ी, शांत चेहरा और युवाओं जैसा जोश- बैद्यनाथ वशिष्ठ सराफ सचमुच निमाड़ की कला परंपरा का जीवंत प्रतीक हैं. उनका सपना है कि निमाड़ और खंडवा का नाम देश-विदेश में कला के माध्यम से रोशन हो और यहां के बच्चे अपनी मिट्टी से जुड़कर पूरी दुनिया में पहचान बनाएं.