ग्वालियर में ‘शिक्षा मित्र’ अभियान के तहत सरकारी स्कूलों में बच्चों को टाटपट्टी की जगह अब टेबल-बेंच पर बैठकर पढ़ने की सुविधा मिल रही है। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण और पिछड़े इलाकों के शासकीय प्राथमिक विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं की कमी को दूर करना है। मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव एक बड़ी समस्या है, जहां कई दशकों पुराने स्कूल आज भी बच्चों को टाटपट्टी पर बैठकर पढ़ने को मजबूर करते हैं। इसी स्थिति को देखते हुए, ग्वालियर की कलेक्टर रुचिका चौहान ने इस अभियान की शुरुआत की। ‘शिक्षा मित्र’ अभियान से हुई शुरुआत कलेक्टर रुचिका चौहान ने नए साल की शुरुआत में ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के शासकीय प्राथमिक स्कूलों में टेबल-बेंच की व्यवस्था का प्रस्ताव रखा। उन्होंने इस अभियान के लिए अपने निजी बैंक खाते से एक लाख रुपए का दान देकर ‘शिक्षा मित्र’ अभियान का शुभारंभ किया। कलेक्टर की इस पहल से प्रेरित होकर जिले के अन्य अधिकारियों, कर्मचारियों और आम नागरिकों ने भी अपनी तनख्वाह और पेंशन से सहयोग देना शुरू किया। इस जनसहयोग के परिणामस्वरूप, अब तक लगभग 1500 टेबल-बेंच सेट जिले के विभिन्न शासकीय प्राथमिक स्कूलों में पहुंचाए जा चुके हैं, और 1500 सेट अभी निर्माणाधीन हैं। ग्वालियर के बंशीपुरा स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय घासमंडी क्रमांक-2 में अब बच्चे टेबल-बेंच पर बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं। कक्षा चार की छात्रा साधना ने बताया कि पहले टाटपट्टी पर बैठकर पढ़ने में बहुत परेशानी होती थी, लेकिन अब स्कूल आना अच्छा लगता है। कक्षा पांच के छात्र अंकित के अनुसार, अब बैग रखने और ठीक से बैठकर पढ़ने की सुविधा मिलने से पढ़ाई में मन लगता है।
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