YouTube se kheti ke tips: कहते हैं खेती अगर समझदारी और नवाचार से की जाए तो वही खेती किसान को मालामाल भी बना सकती है. मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के मोहद गांव के किसान प्रमोद भीम सिंह ने इस कहावत को सच कर दिखाया है. सिर्फ आठवीं तक पढ़े-लिखे प्रमोद आज खेती से हर साल 15 से 20 लाख रुपये तक की कमाई कर रहे हैं. इतना ही नहीं, वे अपने खेतों में 15 से 20 लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं.
पिता से सीखी खेती, लेकिन तरीका बनाया नया
किसान प्रमोद भीम सिंह बताते हैं कि उन्होंने खेती अपने पिता से सीखी है और करीब 20 सालों से खेती कर रहे हैं. शुरुआती दौर में वे भी पारंपरिक खेती करते थे, लेकिन उसमें कई बार नुकसान उठाना पड़ता था. इसके बाद उन्होंने खेती में बदलाव करने का फैसला किया और नई तकनीक व नवाचार को अपनाया.
यूट्यूब और कृषि वैज्ञानिक बने सहारा
प्रमोद का कहना है कि पहले उन्हें खेती में लगातार घाटा हो रहा था. इसके बाद उन्होंने यूट्यूब पर खेती से जुड़े वीडियो देखना शुरू किया और कृषि वैज्ञानिकों की सलाह पर काम किया. यूट्यूब से मिली जानकारी और नई तकनीक अपनाने के बाद उनकी खेती पूरी तरह बदल गई और नुकसान की जगह मुनाफा होने लगा.
हर 3 से 4 महीने में बदलते हैं फसल
प्रमोद की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे कम समय में तैयार होने वाली फसलों पर ज्यादा ध्यान देते हैं. वे 3 से 4 महीने में फसल बदलते हैं, जिससे खेत खाली नहीं रहता और साल भर आमदनी बनी रहती है. इसी रणनीति के कारण उनकी आय लगातार बढ़ती जा रही है.
20 एकड़ में खेती, 20 लोगों को रोजगार
प्रमोद बताते हैं कि उनके पास खुद की 10 एकड़ जमीन है, जबकि 10 एकड़ जमीन वे दूसरों से लेकर खेती करते हैं. इस तरह वे कुल 20 एकड़ में खेती करते हैं और अपने खेतों में 15 से 20 मजदूरों को नियमित रोजगार देते हैं. अच्छी आमदनी होने के कारण वे हर साल दूसरों की जमीन पर भी खेती कर रहे हैं.
ये फसलें बना रहीं हैं किसान को सफल
किसान प्रमोद मुख्य रूप से तुअर, चना, मूंग, सोयाबीन, खीरा, ककड़ी, तरबूज और फूलों की खेती करते हैं. इसके अलावा वे केला, कपास और गन्ने की खेती भी करते हैं. 3 से 4 महीने में तैयार होने वाली फसलें वे 2 से 3 एकड़ में लगातार लगाते रहते हैं, जिससे साल के अंत तक 15 से 20 लाख रुपये तक की कमाई हो जाती है.
नवाचार ही बढ़ा रहा है आमदनी
प्रमोद का कहना है कि खेती में लगातार नवाचार करना बहुत जरूरी है. अगर किसान नई तकनीक और नए प्रयोग नहीं करेगा, तो आगे बढ़ना मुश्किल है. आज प्रमोद की इस खेती को देखकर आसपास के कई किसान भी प्रेरित हो रहे हैं और इसी तरह की खेती अपने खेतों में शुरू कर चुके हैं.