कुश्ती के अखाड़े से इनकम टैक्स अफसर तक का सफर, मूसा पहलवान की कहानी

कुश्ती के अखाड़े से इनकम टैक्स अफसर तक का सफर, मूसा पहलवान की कहानी


खंडवा. अखाड़े की मिट्टी, दांव-पेंच और पसीने की मेहनत यही पहचान है मूसा पहलवान की लेकिन मूसा पहलवान सिर्फ कुश्ती के अखाड़े तक सीमित नहीं हैं. वह आज इनकम टैक्स विभाग में अधिकारी के रूप में भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पहलवानी और नौकरी दोनों को साथ लेकर चलना आसान नहीं होता लेकिन मूसा पहलवान ने यह कर दिखाया है. मध्य प्रदेश के इंदौर के रहने वाले मूसा पहलवान का नाम आज कुश्ती की दुनिया में विजेता के रूप में जाना जाता है. वह मध्य प्रदेश केसरी रह चुके हैं और पिछले करीब 10 सालों से लगातार कुश्ती खेल रहे हैं. नेशनल लेवल पर कई पदक जीतने के बाद उनकी मेहनत को पहचान मिली और स्पोर्ट्स कोटे से भारत सरकार ने उन्हें इनकम टैक्स विभाग में नौकरी दी.

मूसा पहलवान लोकल 18 को बताते हैं कि वह मूल रूप से इंदौर के शास्त्री कॉलोनी के रहने वाले हैं. उनके परिवार में माता-पिता, बड़ा भाई और एक बहन है. उनका असली नाम मुदीसर खान है लेकिन कुश्ती के दंगल में मिला नाम मूसा आज उनकी पहचान बन चुका है. दंगलों में लोग प्यार से मूसा पहलवान कहने लगे और यही नाम फेमस हो गया. उन्होंने बताया कि उनकी वर्तमान पोस्टिंग तमिलनाडु के सेलम शहर में है. वह इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में टैक्स असिस्टेंट के पद पर हैं. विभाग की तरफ से उन्हें पूरा सपोर्ट मिलता है, जिससे वह नौकरी के साथ-साथ कुश्ती भी जारी रख पा रहे हैं.

जिंदगी को भी दिशा देता खेल
उन्होंने कहा कि खेल सिर्फ शरीर को मजबूत नहीं बनाता बल्कि जिंदगी को भी दिशा देता है. उनका कहना है कि अगर बच्चे खेलों से जुड़ते हैं, तो उनका शरीर स्वस्थ रहता है, दिमाग डेवलप होता है और आगे चलकर सरकारी नौकरी, सम्मान और नाम सब कुछ मिलता है. सबसे बड़ी बात, माता-पिता को गर्व महसूस होता है.

मध्य प्रदेश केसरी से राष्ट्रीय मंच तक
मूसा पहलवान साल 2022 में इंदौर में आयोजित प्रतियोगिता में मध्य प्रदेश केसरी बने थे. यह प्रतियोगिता नगर निगम द्वारा आयोजित करवाई गई थी, जिसमें उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक लाख रुपये से ज्यादा की इनामी राशि भी जीती थी. उन्होंने खंडवा में भी कुश्ती लड़ी है. मूसा बताते हैं कि खंडवा में कुश्ती के दौरान मुझे इंजरी हो गई थी, जिस वजह से तृतीय स्थान से संतोष करना पड़ा लेकिन पहलवान हार मानना नहीं सीखता. आगे और तैयारी करेंगे और फिर जीत हासिल करेंगे.

130 किलो भार वर्ग में लड़ते हैं कुश्ती
मूसा पहलवान 130 किलो भार वर्ग में कुश्ती लड़ते हैं. उनकी लंबाई करीब 6 फीट 3 इंच है और वह इस कैटेगरी में मध्य प्रदेश को नेशनल लेवल पर रिप्रेजेंट करते हैं.

नशे से दूर रहें युवा
मूसा पहलवान युवाओं को साफ संदेश देते हैं कि नशे से दूर रहिए. आजकल कई युवा जल्दी पहलवान बनने के चक्कर में इंजेक्शन और गलत रास्ते अपनाते हैं, जो नुकसानदेह है. देशी कुश्ती करिए, सही डाइट रखिए और प्रॉपर कोच से ट्रेनिंग लीजिए, अपने आप पहलवान बन जाएंगे. वह कहते हैं कि गलत रास्ते पर वही जाता है, जिसे सही गाइडेंस नहीं मिलती. कोच, परिवार और समाज सबकी जिम्मेदारी है कि बच्चों को सही दिशा दें.

खंडवा की जनता का मिला प्यार
मूसा पहलवान खंडवा को लेकर खास भावुक नजर आते हैं. उन्होंने कहा कि खंडवा की जनता ने उन्हें बहुत प्यार और आशीर्वाद दिया है. उन्होंने यहां तीन कुश्तियां लड़ी हैं. यहां का माहौल शानदार है और जनता कुश्ती को दिल से पसंद करती है. खंडवा सच में स्पोर्ट्स लवर शहर है.

युवाओं के लिए मिसाल मूसा पहलवान
मूसा पहलवान की कहानी उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो खेल और करियर में से किसी एक को चुनने की मजबूरी समझते हैं. मूसा ने साबित कर दिया कि अगर मेहनत और अनुशासन हो, तो खेल के जरिए सरकारी नौकरी भी मिल सकती है और देश-प्रदेश का नाम भी रोशन किया जा सकता है. अखाड़े की मिट्टी से लेकर इनकम टैक्स ऑफिस तक पहुंचा मूसा पहलवान का यह सफर बताता है कि खेल सिर्फ जुनून ही पैदा नहीं करता बल्कि भविष्य भी बना सकता है.



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