उज्जैन: महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में महाशिवरात्रि 2026 का इंतजार भक्तों के लिए एक बड़े सरप्राइज के साथ खत्म होने वाला है, जहां 44 घंटे नॉनस्टॉप दर्शन की व्यवस्था की गई है. 15 फरवरी 2026 को सुबह से शुरू होकर यह दर्शन 16 फरवरी तक जारी रहेगा, जो 12 ज्योतिर्लिंगों में केवल इस मंदिर की अनूठी परंपरा है. शिव नवरात्रि उत्सव 6 फरवरी से आरंभ हो चुका है, जिसमें भगवान महाकाल रोजाना अलग-अलग स्वरूपों में सजाए जा रहे हैं, जैसे चंदन अलंकार से लेकर तांडव रूप तक. इस सरप्राइज का मुख्य आकर्षण वर्ष में एक बार होने वाली दोपहर की भस्म आरती है, जो 16 फरवरी को 12 बजे होगी. मंदिर प्रशासन ने बताया कि इस दौरान कोई शयन आरती नहीं होगी, और पट लगातार खुले रहेंगे, जिससे लाखों श्रद्धालु बिना किसी रुकावट के बाबा महाकाल की कृपा प्राप्त कर सकेंगे.
विक्रमोत्सव 2026 के साथ जुड़कर यह पर्व सांस्कृतिक आयोजनों से भी समृद्ध हो रहा है, जहां हर्बल मेला और नाट्य समारोह शामिल हैं. भक्तों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई है, और महालोक कॉरिडोर से सुगम प्रवेश सुनिश्चित किया गया है. यह सरप्राइज न केवल आध्यात्मिक बल्कि सामाजिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उज्जैन की अर्थव्यवस्था को boost देगा और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा.
मंदिर में कोटितीर्थ पर गणेश पूजन और कोटेश्वर महादेव पूजा जैसे अनुष्ठान
यह अनोखा सरप्राइज महाशिवरात्रि की रात को और अधिक दिव्य बनाता है, जहां 15 फरवरी की शाम से विशेष महाअभिषेक शुरू होगा, जिसमें 11 ब्राह्मण रुद्रपाठ के साथ पूजन करेंगे. अभिषेक में पंचामृत, गंगाजल और केसर युक्त दूध का उपयोग होगा, जो भक्तों को अलौकिक अनुभव प्रदान करेगा. शिव नवरात्रि के दौरान मंदिर में कोटितीर्थ पर गणेश पूजन और कोटेश्वर महादेव पूजा जैसे अनुष्ठान हो रहे हैं, जो परंपरा को जीवंत रखते हैं.
15 फरवरी को दध्योदक आरती, सतत जलधारा अभिषेक
15 फरवरी को भस्म आरती से पट खुलेंगे, उसके बाद दध्योदक आरती और भोग आरती होगी. रात में सतत जलधारा अभिषेक चलेगा, और 16 फरवरी को सप्तधान्य से मुखारविंद सजाया जाएगा, जिसमें चावल, जौ और उड़द जैसे अनाज अर्पित होंगे. यह 44 घंटे का दर्शन समय भक्तों को व्रत और जागरण के दौरान पर्याप्त अवसर देता है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह व्यवस्था महाकाल की काल को जीतने वाली शक्ति का प्रतीक है. उज्जैन में 60 से अधिक शिव मंदिरों में मेले आयोजित हो रहे हैं, जो स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा दे रहे हैं.
44 घंटे नॉनस्टॉप दर्शन का महत्व और इतिहास
यह परंपरा महाकालेश्वर की अनूठी विशेषता है, जो भक्तों को रात-दिन आराधना का मौका देती है. ऐतिहासिक रूप से, यह शिव-पार्वती विवाह की याद में मनाया जाता है.
विशेष अनुष्ठान और पूजा शेड्यूल
प्रश्न 1: 44 घंटे दर्शन कब से शुरू होंगे?
उत्तर: 15 फरवरी 2026 सुबह 6 बजे से शुरू होकर 16 फरवरी सुबह तक जारी रहेंगे, बिना किसी ब्रेक के.
प्रश्न 2: दिन की भस्म आरती क्यों खास है?
उत्तर: वर्ष में केवल एक बार 16 फरवरी दोपहर 12 बजे होती है, जो उत्सव का मुख्य आकर्षण और पारणा का हिस्सा है.
प्रश्न 3: सरप्राइज में क्या-क्या शामिल है?
उत्तर: महाअभिषेक, सेहरा दर्शन, सप्तधान्य सज्जा और विक्रमोत्सव के सांस्कृतिक कार्यक्रम, जो आस्था को नई ऊंचाई देते हैं.