रायसेन में अध्यापक शिक्षक संवर्ग ने अपनी लंबित मांगों और समस्याओं के निराकरण के लिए रविवार को आंदोलन किया। आजाद अध्यापक शिक्षक संघ, मध्यप्रदेश के बैनर तले शिक्षकों ने जिला मुख्यालय पर एक बैठक आयोजित की। यह बैठक डायट परिसर में हुई, जिसके बाद शिक्षकों ने 3 किलोमीटर लंबी रैली निकाली। नारेबाजी करते हुए वे कलेक्टरेट पहुंचे, जहां मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन रेडियम मनोज उपाध्याय को सौंपा गया। ज्ञापन के माध्यम से शिक्षकों ने ई-अटेंडेंस, पेंशन, वेतनमान, पदोन्नति, स्थानांतरण और चिकित्सा सुविधा सहित कुल 21 प्रमुख मांगों को शीघ्र पूरा करने की मांग की। उन्होंने बताया कि ये मांगें लंबे समय से लंबित हैं, लेकिन शासन स्तर पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। आठवें वेतनमान को लागू करने की मांग
शिक्षक संघ की प्रमुख मांगों में प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा अवधि की गणना कर पेंशन, ग्रेच्युटी और अवकाश नगदीकरण का लाभ देना शामिल है। इसके साथ ही, 1 जनवरी 2026 से आठवें वेतनमान को लागू करने, एनपीएस कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना में शामिल करने, अतिथि शिक्षकों को नियमित करने, कैशलेस मेडिकल सुविधा प्रदान करने और सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष करने की मांग भी की गई। अन्य मांगों में सितंबर 2022 की हड़ताल अवधि का वेतन भुगतान, 50 प्रतिशत रिक्त पदों पर पदोन्नति, तीन संतान वाले कर्मचारियों पर की जा रही प्रशासनिक कार्रवाई समाप्त करना, शनिवार अवकाश अथवा अर्जित अवकाश देना, स्वैच्छिक स्थानांतरण और लंबित आदेश जारी करना शामिल है। आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी
इस अवसर पर प्रांतीय अध्यक्ष भारत पटेल ने चेतावनी दी कि यदि शासन ने शीघ्र मांगों पर निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। जिला कार्यवाहक अध्यक्ष भंवर सिंह मौर्य और जिलाध्यक्ष तेगबहादुर सिंह राजपूत ने कहा कि शिक्षक संवर्ग लंबे समय से उपेक्षा का शिकार रहा है। बैठक और रैली में प्रांतीय सचिव तेगबहादुर सिंह राजपूत, उपाध्यक्ष सीताराम रैकवार, राजकुमार खत्री, संभागीय प्रवक्ता यशवंत मालवीय, जिला संयोजक राजेश जोशी, महेंद्र वर्मा (गैरतगंज), चैन सिंह लोधी, बबलू चिराग, अनीश पटेल, भारत ठाकुर, जानकी शरण रूसिया और विनोद तिर्की सहित बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे। शिक्षकों ने एक स्वर में कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
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