Baby Corn ki Kheti ke Tips: देश के बड़े-बड़े शहरों में आजकल बेबी कॉर्न की मांग आसमान छू रही है. होटल, रेस्टोरेंट, फाइव स्टार किचन से लेकर घरों तक बेबी कॉर्न खूब इस्तेमाल हो रहा है. यही वजह है कि अब किसान भाई भी इसकी खेती की तरफ तेजी से आकर्षित हो रहे हैं. एक वक्त था जब मक्का को मोटे अनाज के रूप में आदिवासी और गरीब किसान उगाते थे, लेकिन आज यही मक्का, खासकर बेबी कॉर्न, किसानों की आमदनी बढ़ाने का मजबूत जरिया बन चुका है.
बेबी कॉर्न क्यों है इतना खास?
बेबी कॉर्न स्वाद में हल्का, पचाने में आसान और पोषण से भरपूर होता है. इसमें आयरन, फास्फोरस, कैल्शियम, कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन जैसे जरूरी पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. यही वजह है कि शहरों में इसकी डिमांड हर दिन बढ़ती जा रही है और किसान को बाजार की चिंता भी नहीं करनी पड़ती.
उत्पादन और कमाई का पूरा गणित
अगर किसान भाई बेबी कॉर्न की खेती सही तरीके से करें, तो एक हेक्टेयर से 65 से 70 क्विंटल तक बेबी कॉर्न का उत्पादन लिया जा सकता है. इसके साथ ही 25 से 30 क्विंटल तक स्ट्रा भी निकलता है, जो पशु आहार के रूप में काफी काम आता है. यह स्ट्रा गाय-भैंसों के दूध उत्पादन को बढ़ाने में मदद करता है और इसे बेचकर भी अच्छी कमाई हो जाती है. इतना ही नहीं, बेबी कॉर्न का एक्सपोर्ट विदेशों तक होता है.
कम समय में तैयार, ज्यादा फायदा
बेबी कॉर्न की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह साधारण मक्का के मुकाबले 20-30 दिन पहले तैयार हो जाती है. जायद सीजन में यह लगभग 90 से 100 दिन में कटाई के लिए तैयार हो जाती है, यानी कम समय में पैसा हाथ में.
किस सीजन और कैसी मिट्टी चाहिए?
बेबी कॉर्न की खेती रबी, खरीफ और जायद तीनों सीजन में की जा सकती है. यह लगभग हर तरह की मिट्टी में उग जाती है और अच्छा उत्पादन देती है. भुट्टे पर हरे पत्तों का कवर होने की वजह से कीटनाशकों का सीधा असर फसल पर नहीं पड़ता, जिससे गुणवत्ता भी बनी रहती है.
बुवाई से पहले ये काम जरूर करें
कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि बुवाई से पहले मिट्टी की जांच जरूर करानी चाहिए. मिट्टी का pH मान 6 से 7 के बीच होना चाहिए. साथ ही नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की मात्रा भी चेक करवा लें. अगर किसी तत्व की कमी हो तो पहले उसे पूरा करें.
बीज, बुवाई और खाद का सही तरीका
अगर फरवरी में बुवाई करनी है, तो प्रति हेक्टेयर 18 से 20 किलो बीज काफी होता है. एक हेक्टेयर में करीब 1.10 से 1.20 लाख पौधे लगते हैं. मिट्टी में नमी होने पर बुवाई करें. खेत की तैयारी के समय 15-20 टन सड़ी गोबर खाद और 75 किलो नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर दें. 15 दिन बाद निराई-गुड़ाई करें और 25 दिन बाद पौधों पर मिट्टी चढ़ा दें, ताकि फसल गिरे नहीं. बाद में 20 किलो प्रति हेक्टेयर उर्वरक स्प्रिंकलर से दें.