छतरपुर में केन-बेतवा लिंक पर विरोध तेज: सामाजिक कार्यकर्ता की गिरफ्तारी पर महिलाओं का प्रदर्शन, बांध का काम पांचवें दिन भी ठप – Chhatarpur (MP) News

छतरपुर में केन-बेतवा लिंक पर विरोध तेज:  सामाजिक कार्यकर्ता की गिरफ्तारी पर महिलाओं का प्रदर्शन, बांध का काम पांचवें दिन भी ठप – Chhatarpur (MP) News




छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर विरोध तेज होता जा रहा है। शुक्रवार सुबह पुलिस ने सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर को उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया। बताया जा रहा है कि भटनागर परियोजना से प्रभावित परिवारों के अधिकारों की पैरवी कर रहे थे। पुलिस ने उन्हें धारा 151 के तहत हिरासत में लिया है। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में तनाव की स्थिति बन गई है। अमित भटनागर की गिरफ्तारी के विरोध में दौड़न बांध स्थल पर बड़ी संख्या में आदिवासी महिलाओं ने काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने साफ कहा कि जब तक अमित भटनागर को रिहा नहीं किया जाता और प्रभावित परिवारों को उनके अधिकारों की कानूनी गारंटी नहीं मिलती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि 15 गांवों में चूल्हा नहीं जलेगा। इस विरोध के चलते दौड़न बांध का निर्माण कार्य लगातार पांचवें दिन भी पूरी तरह ठप रहा। तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया
प्रदर्शनकारी महिलाओं ने प्रशासन पर मनमानी और तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि यह लड़ाई केवल मुआवजे की नहीं, बल्कि जल, जंगल, जमीन और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की है। उन्होंने दोहराया कि जब तक उनके अधिकार सुनिश्चित नहीं किए जाते, वे बांध स्थल से पीछे हटने वाले नहीं हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि परियोजना से प्रभावित परिवारों को अब तक न तो उचित मुआवजा मिला है और न ही पुनर्वास की ठोस व्यवस्था की गई है। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी समस्याएं उठाने पर “शांति भंग” के नाम पर कार्रवाई करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। सामाजिक कार्यकर्ता की गिरफ्तारी ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विरोध के चलते एसडीएम को लौटना पड़ा
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि ढोढन ग्राम में उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब ग्रामीणों को हटाने पहुंचे एसडीएम को विरोध के चलते वापस लौटना पड़ा। वहीं अमित भटनागर की गिरफ्तारी को लेकर बिजावर पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन ग्रामीणों की चेतावनी स्पष्ट है कि यदि जल्द ही रिहाई और संवाद की पहल नहीं की गई, तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। फिलहाल पूरे मामले में प्रशासन के अगले कदम पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।



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