भारत-पाक महामुकाबले पर इस्लामाबाद के गलियारों में घबराहट, नकवी का ‘डबल रोल’ बना सिरदर्द, अंदर की खबर

भारत-पाक महामुकाबले पर इस्लामाबाद के गलियारों में घबराहट, नकवी का ‘डबल रोल’ बना सिरदर्द, अंदर की खबर


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15 फरवरी का मैच अब महज एक ग्रुप मुकाबला नहीं, बल्कि पाकिस्तान के अस्तित्व की लड़ाई बन गया है. अगर पाकिस्तान हटता है, तो उसे भारी जुर्माना और बैन झेलना पड़ सकता है, और अगर खेलता है, तो उसे अपने ही घर में ‘राजनीतिक सरेंडर’ के आरोपों का सामना करना होगा.

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भारत पाक‍िस्‍तान मैच को लेकर पाक‍िस्‍तान में अजीब बेचैनी.

इस्लामाबाद. 15 फरवरी को कोलंबो में होने वाले भारत-पाकिस्तान T20 वर्ल्ड कप मैच को लेकर पाकिस्तान में ‘पॉलिटिकल ड्रामा’ अपने चरम पर पहुंच गया है. खबर है कि इस्लामाबाद के सत्ता के गलियारों में इस मैच को लेकर जबरदस्त पैनिक है. आलम यह है कि कोई भी अधिकारी या मंत्री इस मैच पर अकेले फैसला लेने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है, जिसके बाद अब गेंद सीधे फेडरल कैबिनेट के पाले में डाल दी गई है. मोहस‍िन नकवी का डबल रोल स‍िरदर्द बन गया है.

CNN-News18 को मिले विशेष सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान सरकार इस समय पॉल‍िट‍िकल पैरालस‍िस की स्थिति में है. कैबिनेट में चर्चा का बहाना केवल एक सेफ एग्जिट ढूंढने की कोशिश है.शहबाज सरकार इतनी असुरक्षित महसूस कर रही है कि वह जनता का गुस्सा झेलने की स्थिति में नहीं है. अगर मैच खेले और हार गए, या बहिष्कार किया और ICC ने बैन लगा दिया… दोनों ही स्थितियों में अपनी साख बचाने के लिए सरकार ने इसे सामूहिक कैबिनेट फैसला बनाने का दांव खेला है. एक वरिष्ठ सूत्र ने साफ कहा कि अब यह मामला खेल का नहीं, बल्कि एक कमजोर सरकार की साख बचाने का बन चुका है.

नकवी क्‍यों सवालों के घेरे में

इस पूरे विवाद के केंद्र में हैं मोहसिन नकवी, जो पाकिस्तान के गृह मंत्री भी हैं और PCB के चेयरमैन भी. गृह मंत्री के तौर पर उन पर सुरक्षा का जिम्मा है, और PCB चीफ के तौर पर क्रिकेट का. हितों के इस टकराव ने बोर्ड की निर्णय लेने की क्षमता को पूरी तरह खत्म कर दिया है. सूत्रों का कहना है कि PCB जो शर्तें (ज्यादा पैसा, मेजबानी हक) रख रहा है, वो आत्मविश्वास नहीं बल्कि उसकी आर्थिक कंगाली का नतीजा हैं.

शहबाज को क‍िस बात का डर

महंगाई और बेरोजगारी से त्रस्त पाकिस्तान में भारत से मुकाबला अब एक प्रोक्सी वॉर बन चुका है. आटे-दाल के भाव से परेशान जनता के बीच ‘भारत को ना’ कहना सरकार के लिए एक सस्ता और आसान राष्ट्रवादी हथियार बन गया है. शासन में फेल रहने के बाद अब क्रिकेट के जरिए भावनात्मक खेल खेला जा रहा है. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को डर है कि कहीं उनका कोई भी फैसला पर्दे के पीछे बैठे ‘पावर सेंटर्स’ को नाराज न कर दे.

ICC की एंट्री और पाकिस्तान की 3 डिमांड
जब पाकिस्तान ने मैच के बहिष्कार की धमकी दी, तो ICC के दिग्गज लाहौर भागे. वहां PCB ने 3 बड़ी मांगें रख दीं. बांग्लादेश को मोटा मुआवजा मिले. टूर्नामेंट से बाहर होने के बावजूद बांग्लादेश को फीस मिले. भविष्य के ICC इवेंट्स की मेजबानी पक्की हो. ICC अधिकारियों ने दोटूक कह दिया है कि मुआवजे के नाम पर कुछ नहीं मिलेगा. पाकिस्तान या तो मैच खेले या फिर कानूनी कार्रवाई का सामना करे.

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