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मैहर जिले में ₹4.37 करोड़ के स्कूल निर्माण घोटाले में कार्रवाई तेज हो गई है. शनिवार को 8 और प्रभारी प्राचार्यों को सस्पेंड किया गया जिससे कुल सस्पेंड प्राचार्यों की संख्या 12 हो गई है. जांच में पाया गया कि 21 सरकारी स्कूलों में साइकिल शेड, पार्किंग शेड, पेंटिंग और मरम्मत के नाम पर करोड़ों रुपये जारी किए गए लेकिन ज्यादातर काम कागजों पर ही रहे. मैहर कलेक्टर रानी बताड़ के आदेश पर जांच शुरू हुई थी.
छत्तीसगढ़ के स्कूलों से भारी घोटाला सामने आया है.
मैहर. जिले में सरकारी स्कूलों के निर्माण घोटाले ने शिक्षा विभाग को हिला कर रख दिया है. ₹4.37 करोड़ के इस बड़े घोटाले में शनिवार को एक बार फिर बड़ी कार्रवाई हुई जब 8 और प्रभारी प्राचार्यों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया. इससे कुल सस्पेंड प्राचार्यों की संख्या 12 हो गई है. जांच में पाया गया कि 21 सरकारी स्कूलों में साइकिल शेड, पार्किंग शेड, पेंटिंग, मरम्मत जैसे छोटे-मोटे निर्माण कार्यों के नाम पर करोड़ों रुपये जारी कर दिए गए लेकिन ज्यादातर काम सिर्फ कागजों पर ही रहे. बच्चों के लिए बुनियादी सुविधाएं तक नहीं बनीं. इस घोटाले की जांच मैहर जिला कलेक्टर रानी बताड़ के आदेश पर शुरू हुई थी. अब शिक्षा विभाग और प्रशासन दोनों स्तर पर इस मामले में सख्ती बरती जा रही है और आगे और गिरफ्तारियां होने की आशंका जताई जा रही है.
यह मामला न केवल वित्तीय अनियमितता का है बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग के साथ-साथ गरीब और ग्रामीण बच्चों के साथ हुए अन्याय को भी उजागर करता है. जहां एक तरफ स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी से पढ़ाई प्रभावित हो रही है वहीं दूसरी तरफ अधिकारियों द्वारा जारी करोड़ों रुपये कागजों पर ही रह गए. यह घटना प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करती है.
घोटाले का पूरा खुलासा और जांच की शुरुआत
मैहर जिला कलेक्टर रानी बताड़ ने पिछले महीने 21 सरकारी स्कूलों में जारी फंड के उपयोग की जांच के आदेश दिए थे. जांच में सामने आया कि साइकिल शेड, पार्किंग शेड, स्कूल की पेंटिंग, छोटी-मोटी मरम्मत जैसे कार्यों के नाम पर ₹4.37 करोड़ की राशि जारी की गई थी. लेकिन ज्यादातर स्थानों पर काम या तो शुरू ही नहीं हुआ या फिर बेहद घटिया स्तर पर अधूरा छोड़ दिया गया. कुछ जगहों पर सिर्फ बोर्ड लगाकर काम पूरा दिखाया गया.
अब तक की कार्रवाई और सस्पेंशन की पूरी लिस्ट
- पहले चरण में 1 प्रभारी प्राचार्य को जिला शिक्षा अधिकारी ने सस्पेंड किया.
- दूसरे चरण में संयुक्त संचालक, स्कूल शिक्षा द्वारा 3 और प्रभारी प्राचार्यों को सस्पेंड किया गया.
- तीसरे और सबसे बड़े चरण में शनिवार शाम को रीवा मंडल आयुक्त ने 7 प्रभारी प्राचार्यों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया.
- एक अन्य प्रभारी प्राचार्य को जिला पंचायत ने अलग से सस्पेंड किया.
कुल सस्पेंड = 12 प्रभारी प्राचार्य
आगे क्या होगा – जांच और संभावित कार्रवाई
अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है. जिन अधिकारियों/कर्मचारियों ने बिल पास किए, कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र दिए और भुगतान करवाया, उन पर भी सख्त कार्रवाई होगी. मामले में FIR दर्ज करने, लाभार्थियों से रिकवरी करने और दोषियों के खिलाफ विभागीय जांच के साथ आपराधिक मुकदमा चलाने की तैयारी है. विभाग ने साफ संकेत दिए हैं कि इस मामले में कोई भी बख्शा नहीं जाएगा. यह घोटाला ग्रामीण इलाकों के उन बच्चों के साथ धोखा है जिनके स्कूलों में आज भी छत टपकती है, शौचालय नहीं हैं और साइकिल शेड जैसी छोटी सुविधा भी नहीं मिली. अभिभावकों और शिक्षाविदों का कहना है कि जब बच्चों के लिए बुनियादी सुविधाएं ही नहीं बनतीं तो करोड़ों का पैसा कहां गया यह सबसे बड़ा सवाल है.
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सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्थानों में सजग जिम्मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें