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Boreshwer Mahadev Temple: उज्जैन को धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है, जहां अनेक प्राचीन और चमत्कारी मंदिर स्थित हैं. इन्हीं में से एक है बोरेश्वर महादेव का पवित्र मंदिर, जिसकी महिमा अद्भुत और अलौकिक है. मान्यता है कि यह मंदिर पांच हजार वर्षों से भी अधिक पुराना है और श्रद्धालुओं की आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है.
Boreshwer Mahadev Temple: विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकाल की पावन नगरी उज्जैन को आस्था और अध्यात्म की भूमि कहा जाता है. इस शहर में अनेक दिव्य और चमत्कारी मंदिर विराजमान हैं, जो अपनी अलौकिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध हैं. ऐसी ही ऐतिहासिक धरोहर दंगवाड़ा में स्थित है, जहां अद्भुत बोरेश्वर महादेव मंदिर स्थापित है. लोकमान्यता के अनुसार शिवलिंग की आकृति बोर के समान होने के कारण इसे बोरेश्वर नाम दिया गया. कहा जाता है कि इस शिवलिंग की जलाधारी कभी सूखती नहीं और यहां आने वाले भक्त अनेक चमत्कारों के साक्षी बनते रहे हैं.
मध्यप्रदेश के उज्जैन से लगभग 36 किलोमीटर दूर इंगोरिया क्षेत्र स्थित है, जहां से करीब 6 किलोमीटर आगे दंगवाड़ा में प्राचीन बोरेश्वर महादेव मंदिर विराजमान है. यहां भगवान शिव का अद्भुत स्वयंभू शिवलिंग स्थापित है, जिसकी दिव्यता अनोखी मानी जाती है. स्थानीय लोगों के अनुसार, यह मंदिर सदियों पुराना सिद्ध पीठ है, जहाँ सच्चे मन से की गई हर प्रार्थना अवश्य पूरी होती है.
शिवलिंग पर नहीं टिकता जल
बोरेश्वर महादेव की दिव्य प्रतिमा अत्यंत प्राचीन मानी जाती है और यह अपने आप में कई रहस्यों को समेटे हुए है. इस शिवलिंग की सबसे बड़ी विशेषता इसकी अद्भुत जलाधारी है, जिसमें कभी भी जल की कमी नहीं होती. श्रद्धालु चाहे जितना भी जल अर्पित करें, जलाधारी का स्तर हमेशा समान बना रहता है. न बढ़ता है और न घटता है. यही अलौकिक चमत्कार इस मंदिर को और भी विशेष बनाता है. मंदिर के पुजारी ने लोकल 18 को बताया कि मां चंबल नदी बोरेश्वर महादेव की परिक्रमा करके गुजरती है, लेकिन महादेव के सोमसूत्र का उल्लंघन नहीं करती है. लोगों का कहना है कि नंदी महाराज भी रात में यहां चलते हुए भक्तों को दर्शन देते हैं और यहां शिवलिंग के नीचे पाताल लोक भी है. साथ ही यहा शिवलिंग के पास रास्ता है वो चम्बल नदी से मिलता है. हालांकि, इसकी कोई पुष्टि नहीं हुई है. चंबल नदी जब अपने रोद्र रूप में आती है तो भी मंदिर का जल स्तर समान रहता है.
उल्टा स्वास्तिक बनाते ही होती है मनोकामना पूर्ण
लोकल 18 की टीम ने जब स्थानीय ग्रामीणों से बातचीत की, तो पंकज बैरागी ने बताया कि इस मंदिर में मनोकामना पूर्ति के लिए श्रद्धालु विशेष परंपरा निभाते हैं. संतान सुख की इच्छा रखने वाले लोग यहां उल्टा स्वास्तिक बनाते हैं और जब उनकी इच्छा पूरी हो जाती है, तो वे आभार स्वरूप सीधा स्वास्तिक बनाकर भगवान का धन्यवाद करते हैं. ग्रामीणों के अनुसार, कई वर्षों पहले मंदिर परिसर में खुदाई के दौरान बड़ी संख्या में प्राचीन देवी-देवताओं के अवशेष मिले थे. पुरातत्व विभाग ने इन अवशेषों को पांच हजार वर्ष से भी अधिक पुराना बताया था, इसी आधार पर इस मंदिर को भी पांच हजार साल पुराना माना जाता है.
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Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें