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ठाकुर श्री राधाविनोद बिहारी जी मंदिर में महोत्सव की शुरुआत मंडलेश्वर में नर्मदा तट पर भव्य रासलीला के साथ हुई. करीब 50 साल बाद जलधारा के बीच नाव पर सजी राधा-कृष्ण की नौका विहार लीला को देखने सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचे. इस दौरान फूलों की होली, संवाद और जल क्रीड़ा के साथ पूरे घाट पर भक्ति और उत्साह का माहौल नजर आया.
Khargone News: मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के ग्राम चोली में स्थित ठाकुर श्री राधाविनोद बिहारी जी मंदिर के द्वादश पाट महोत्सव का बुधवार को शुभारंभ हुआ. महोत्सव के पहले दिन नगर के नर्मदा तट पर खास आयोजन रखा गया, जहां रासलीला के तहत नौका विहार लीला पहली बार प्रस्तुत की गई. नर्मदा की जलधारा के बीच नाव पर सवार होकर भगवान श्री कृष्ण और राधा जी की लीला ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया. बाबा श्री अलबेली शरण जी महाराज के सानिध्य में चल रहे इस आयोजन में बड़ी संख्या में संत और भक्त शामिल हुए.
नर्मदा के बीच बहती धारा में सजी नाव पर जब कान्हा और राधा जी ने रास रचाई तो घाट का माहौल भक्तिमय हो गया. संतों और सखियों के साथ फूलों की होली खेली गई. लीला के दौरान भगवान श्री कृष्ण ने नर्मदा जल में छलांग लगाकर गोते भी लगाए, जिसे देख श्रद्धालु भावुक हो उठे. नाव से बोले गए बृज और हिंदी संवादों ने पूरे दृश्य को जीवंत बना दिया. ऐसा लगा मानो सच में यमुना किनारे खड़ी राधाजी प्रिय कन्हैया से पार उतारने की विनती कर रही हों.
पहली बार लोगों ने देखा नज़ारा
करीब 50 साल बाद नगर में इस तरह की रासलीला का आयोजन हुआ. इसे देखने के लिए चोली, ठनगांव, ढापल और आसपास के गांवों से लोग नर्मदा घाट पहुंचे. धूप तेज थी, फिर भी श्रद्धालु खुले आसमान के नीचे डटे रहे. घाट पर बैठने की जगह कम पड़ गई, लेकिन लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ. बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे सभी इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने.
नर्मदा में रासलीला का जीवंत मंचन
राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त स्वामी श्रीराम शर्मा जी की रास मंडली ने नौका विहार लीला का मंचन किया. प्रसंग में मल्हार बने ठाकुर जी राधा जी और सखियों को यमुना पार कराने का अभिनय करते हैं. कथा के अनुसार राधा जी सखियों के साथ माखन मिश्री बेचने जा रही होती हैं, लेकिन कुछ सखियां पहले लौट जाती हैं. ऐसे में उन्हें चिंता होती है और कोई नाव नजर नहीं आती. तभी दूर से एक नाव आती दिखती है, जिसमें मल्लाह बने कन्हैया सवार होते हैं.
यमुना पार कराने राधा ने लगाई गुहार
राधाजी और सखियां उनसे यमुना पार कराने का आग्रह करती हैं. कई मनुहार और विनती के बाद मल्हार पार उतारने को तैयार होते हैं. इसके बाद बीच धारा में नाव पर फूलों की होली खेली जाती है. लीला के दौरान ठाकुर जी अपने सखाओं संग जल में कूद पड़ते हैं और आनंद लेते हैं. कार्यक्रम से पहले बाबा श्री अलबेली शरण जी महाराज और महंत किशोरीदास जू महाराज ने नर्मदा पूजन किया. वृंदावन से आए संतों की मौजूदगी ने आयोजन की गरिमा बढ़ा दी.
17 तक चलेंगे ये आयोजन
रात्रि में चोली में भी रासलीला का आयोजन किया गया. गुरुवार से शनिवार तक सुबह 9 बजे से महंत किशोरीदास देवजू महाराज भक्तमाल कथा सुनाएंगे. वहीं रात 8.30 बजे से प्रतिदिन रासलीला का मंचन होगा. शनिवार शाम भजन संध्या में प्रसिद्ध भजन गायक चित्र-विचित्र प्रस्तुति देंगे. 17 फरवरी को भंडारे के साथ द्वादश पाट महोत्सव का समापन किया जाएगा. पूरे क्षेत्र में इस आयोजन को लेकर उत्साह का माहौल बना हुआ है.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें