गुरुवार को डिंडौरी जनपद पंचायत में सामान्य सभा की बैठक के दौरान जनपद अध्यक्ष आशा धुर्वे सहित कुछ सदस्य विरोध करते हुए बाहर निकल गए। उन्होंने सीईओ प्रमोद ओझा पर मनमानी का आरोप लगाया। वहीं, विधायक ओमप्रकाश धुर्वे ने अध्यक्ष और सदस्यों पर अपने अधिकारों का हनन करने का आरोप लगाया। जनपद अध्यक्ष आशा धुर्वे ने आरोप लगाया कि सीईओ प्रमोद ओझा मनमानी कर रहे हैं। उनके अनुसार, सामान्य सभा की बैठक की तारीख उनके द्वारा तय करने के बावजूद उस समय बैठक नहीं होती, और बैठक के एजेंडे में भी अलग से मुद्दे जोड़ दिए जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बैठकों में अधिकारी कम आते हैं और जनपद सीईओ ही चला रहे हैं। अध्यक्ष ने बताया कि गुरुवार की बैठक में शिक्षा विभाग, बिजली, स्वास्थ्य, वन विभाग, कसईसोढ़ा ग्राम पंचायत में बाजार नीलामी, तीन वर्षों की बाजार वसूली और विक्रमपुर में सीसी सड़क निर्माण जैसे विषयों पर चर्चा होनी थी। जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा नहीं विधायक ओमप्रकाश धुर्वे ने कहा कि वह जनपद की सामान्य सभा बैठक के विशेष आमंत्रित सदस्य हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अध्यक्ष सहित कुछ सदस्यों ने अपने विषयों पर चर्चा करने के बाद बैठक छोड़ दी, जबकि उनके भी जनता से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषय थे। विधायक के अनुसार, वह गर्मी में जल जीवन मिशन के तहत गांवों में पानी की स्थिति, उपस्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्थाएं, 15वें वित्त आयोग के वित्तीय वर्ष 2025-26 में टाइड और अनटाइड मद की राशि के व्यय की समीक्षा, नवीन पंचायत और सामुदायिक भवन, पेंशन योजना, शाला मरम्मत और सड़क जैसे विषयों की समीक्षा कर रहे थे। आरोपों को निराधार बताया सीईओ प्रमोद ओझा ने आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि जनपद अध्यक्ष की अनुमति से उनके और सदस्यों द्वारा रखे गए विषयों पर चर्चा कराई गई है। विधायक के विषय भी बैठक में रखे गए थे, जिनकी समीक्षा की गई। उन्होंने बताया कि उनके पास अन्य जनपदों का भी प्रभार है और बैठक के विषयों की जानकारी जनपद अध्यक्ष सहित सभी सदस्यों को पहले ही भेजी जाती है।
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