लेगब्रेक का उस्ताद… पिज्जा बनाने वाले ने नेपाल के खिलाफ मचाया धमाल, इटली के मैच विनर की अनसुनी दास्ता

लेगब्रेक का उस्ताद… पिज्जा बनाने वाले ने नेपाल के खिलाफ मचाया धमाल, इटली के मैच विनर की अनसुनी दास्ता


इटली और नेपाल के बीच खेले गए मुकाबले में इटली ने एकतरफा जीत हासिल कर सभी को चकित कर दिया है. इस जीत के हीरे रहे लेग स्पिनर क्रिशन कालूगामेज. इन्होंने शानदार गेंदबजी करते हुए अपनी टीम के लिए 3 विकेट झटके. इस परफॉर्मेंस की वजह से उन्हें मैन ऑफ द मैच के खिताब से भी नवाजा गया. बहरहाल, आज हम आपतो उनके बारे में कुछ ऐसा बताएंगे, जिसे सुनकर आपको भी बड़ी हैरानी होगी. दरअसल, क्रिशन कालूगामेज बेहतरीन पिज्जा बना सकते हैं. लेकिन जब वे टस्कनी के मध्य में स्थित लूका में अपने पिज्जा रेस्टोरेंट में आटा गूंथने में व्यस्त नहीं होते, तो रोम के एस्ट्रोटर्फ मैदान पर गेंद को जोर से घुमाते हुए, उतनी ही कुशलता से अपनी लेगस्पिन गेंदबाजी को निखारते नजर आते हैं.

जूनून ने पहंचाया यहां

कालूगामेज के लिए क्रिकेट कभी भी एक साधारण शौक नहीं रहा है. यह उनके नियमित काम के साथ-साथ एक लगातार मेहनत भी रही है, जो खेल के प्रति प्रेम और इस दृढ़ विश्वास से प्रेरित है कि यह उन्हें एक दिन सफलता की ऊंचाइयों तक ले जाएगा. अब इसी खेल ने उन्हें 2026 टी20 विश्व कप तक पहुंचाया है, जहां वे गर्व से अजूरी नीली जर्सी पहनकर वैश्विक मंच पर इटली का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. उन्होंने आज के मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करते हुए 3 विकेट भी हासिल किए हैं. 

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‘भावुक करने वाला पल’

विश्व कप के लिए क्वालीफाई करने पर मुझे कैसा महसूस हुआ, इसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है,” कलुगामेज कहते हैं. “हममें से कुछ लोग रो रहे थे क्योंकि विश्व कप में खेलना हमारा सपना था, और मेरे लिए यह पल और भी भावुक कर देने वाला है क्योंकि यह श्रीलंका और भारत में हो रहा है. विश्व कप के पहले मैच के दौरान जब इटली का राष्ट्रगान बजा, तो मुझे बहुत गर्व महसूस हुआ क्योंकि मैंने हमेशा यही महसूस किया है कि मुझे अपनी जर्सी का सम्मान करना चाहिए।” 

श्रीलंका के निवासी

जब कलुगामेज के माता-पिता 2007 में काम के सिलसिले में श्रीलंका से इटली चले गए, तब उनकी उम्र लगभग 16 साल थी. कई कारणों से उनका दिल टूट गया था. लेकिन सबसे बड़ा दुख यह था कि अब वे पेशेवर क्रिकेटर बनने का अपना सपना पूरा नहीं कर सकते थे. नेगोंबो में उनका बचपन अपने दादाजी के साथ रेडियो पर क्रिकेट कमेंट्री सुनते हुए और स्कूल में तथा स्कूल के बाद अपने दोस्तों के साथ क्रिकेट खेलते हुए बीता. वे अपने स्कूल की अंडर-13 और अंडर-15 टीमों के भी सदस्य थे.

चनौतियों ने बनाया मैच विनर

इटली में क्रिकेट के लिए कोई स्पष्ट रास्ता नहीं था. नई संस्कृति और वातावरण में ढलना ही काफी चुनौती पूर्ण था, और उनके पसंदीदा खेल की अनुपस्थिति ने इसे और भी कठिन बना दिया. उन्होंने स्कूल में एथलेटिक्स में दाखिला लिया और अंततः इटली में अन्य श्रीलंकाई खिलाड़ियों के साथ शौक के तौर पर टेनिस बॉल क्रिकेट खेलना शुरू किया. जो खेल अनौपचारिक रूप से शुरू हुआ, वह धीरे-धीरे प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में बदल गया, जिसमें कालूगामेज और उनके कुछ दोस्त लुक्का के छोटे क्लबों के लिए खेलने लगे.

2015 में मिली सफलता

2015-16 में उन्हें सफलता मिली, जब उन्हें इटली के सबसे पुराने क्लबों में से एक, रोमा क्रिकेट क्लब में खेलने का मौका मिला. तब से वे वहीं हैं, एक दशक लंबा यह जुड़ाव उनके विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. रास्ते में कई मोड़ भी आए. जैसे-जैसे उनकी लंबाई बढ़ी, कालूगामेज ने लेगस्पिन गेंदबाजी पर पुनर्विचार किया. “मेरी लंबाई अचानक बढ़ गई, इसलिए मैंने सोचा कि मुझे तेज गेंदबाज बनना चाहिए. मुझे इटली की ए टीम के लिए खेलने का मौका भी मिला, और मैंने वहां तेज गेंदबाज के रूप में खेला.”

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