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ग्वालियर के 9 वर्षीय यशवर्धन राठौर ने कथित गलत इलाज से बिगड़ी हालत को लेकर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को खून से पत्र लिखा. परिवार ने बिना डिग्री इलाज और स्टेरॉयड दवाओं के आरोप लगाए हैं. मंत्री ने जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया है, जबकि परिवार ने न्याय नहीं मिलने पर कठोर कदम उठाने की चेतावनी दी है.
ग्वालियर में पिता और बेटे ने एक बार फिर न्याय मांगा है.
ग्वालियर. तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले 9 साल के यशवर्धन राठौर ने अपने खून से पत्र लिखकर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को सौंपा और आरोप लगाया कि शहर के एक कथित त्वचा रोग विशेषज्ञ की लापरवाही ने उसकी हालत गंभीर कर दी. इस मामले में मंत्री ने पत्र पढ़कर त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया और काफिला रोककर दोबारा पिता-पुत्र से मुलाकात की. यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए भावुक कर देने वाला था. पिता मोनू राठौर का कहना है कि पिछले चार वर्षों से वह प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन हर बार जांच का आश्वासन ही मिला. अब हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि परिवार ने चेतावनी दी है कि यदि न्याय नहीं मिला तो वे आत्मदाह जैसा कठोर कदम उठाने को मजबूर होंगे. हालांकि प्रशासन ने परिवार से संयम बरतने की अपील की है.
एयरपोर्ट पर मंत्री के आगमन के दौरान पिता के साथ पहुंचे बच्चे ने सीधे उन्हें पत्र दिया. पत्र में अवैध तरीके से इलाज, अत्यधिक दवाओं और स्टेरॉयड के उपयोग का जिक्र है. बच्चे की हालत को लेकर परिवार का दावा है कि उसे दुर्लभ और जटिल स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जिसके चलते अब दिल्ली तक उपचार चल रहा है.
एयरपोर्ट पर सौंपा खून से लिखा पत्र
सूत्रों के अनुसार, जैसे ही केंद्रीय मंत्री का विमान ग्वालियर एयरपोर्ट पर उतरा, पिता अपने बेटे को लेकर वहां पहुंचे. बच्चे ने अपने खून से लिखा पत्र मंत्री को सौंपा. पत्र में आरोप है कि वर्ष 2020 से 2024 के बीच शिंदे की छावनी स्थित एक क्लिनिक में इलाज के नाम पर भारी मात्रा में दवाएं दी गईं, जिनमें स्टेरॉयड भी शामिल थे. परिवार का कहना है कि इलाज से बालों की समस्या ठीक नहीं हुई, बल्कि स्थिति और बिगड़ गई.
इलाज से बिगड़ी सेहत का दावा
पिता के मुताबिक शुरुआत में बच्चे के सिर पर उम्र के अनुसार बाल कम थे. इस समस्या के इलाज के लिए वे एक निजी क्लिनिक पहुंचे. लेकिन धीरे-धीरे बच्चे के बाल पूरी तरह झड़ गए, आंखों की रोशनी कमजोर हो गई और दांत टेढ़े होने लगे. बाद में स्थानीय स्तर पर आयोजित मेडिकल कैंप में जांच के बाद उसे AIIMS Bhopal बुलाया गया. वहां से आगे की जांच के लिए AIIMS Delhi रेफर किया गया. परिवार का दावा है कि विशेषज्ञों ने बच्चे की स्थिति को गंभीर बताया है और कुछ सैंपल विदेश में जांच के लिए भेजे गए हैं.
आरटीआई में डिग्री को लेकर सवाल
पिता ने आरटीआई के माध्यम से प्राप्त दस्तावेजों का हवाला देते हुए आरोप लगाया है कि संबंधित डॉक्टर के पास त्वचा रोग विशेषज्ञ की वैध डिग्री या डिप्लोमा नहीं है. उनका यह भी दावा है कि क्लिनिक किसी अन्य नाम से पंजीकृत है. इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन परिवार ने स्वास्थ्य विभाग से विस्तृत जांच की मांग की है.
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सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्थानों में सजग जिम्मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें