केमिकल खेती छोड़ किसान ने बदली किस्मत! विंध्य में वर्मी कम्पोस्ट से बढ़ी पैदावार, घटा खर्च

केमिकल खेती छोड़ किसान ने बदली किस्मत! विंध्य में वर्मी कम्पोस्ट से बढ़ी पैदावार, घटा खर्च


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वर्मी कम्पोस्ट से विंध्य में खेती में बदलाव, किसानों की आमदनी बढ़ी

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Vermicompost farming MP: मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में किसान तेजी से रासायनिक खेती छोड़कर जैविक खेती की ओर बढ़ रहे हैं. लालपुर के किसान मनसुख लाल कुशवाहा ने वर्मी कम्पोस्ट बनाकर न सिर्फ अपनी पैदावार बढ़ाई बल्कि खर्च भी कम किया है. उनका तैयार किया गया जैविक खाद कई जिलों में सप्लाई हो रहा है और इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. बेड सिस्टम से कम लागत में तैयार होने वाला वर्मी कम्पोस्ट मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनाए रखता है. जानिए कैसे वर्मी कम्पोस्ट विंध्य क्षेत्र में खेती की नई क्रांति बन रहा है.

Organic fertilizer benefits: मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में खेती की तस्वीर तेजी से बदल रही है. किसान अब रासायनिक खाद से दूरी बनाकर जैविक खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं. इस बदलाव के केंद्र में है वर्मी कम्पोस्ट एक ऐसी जैविक खाद, जिसने न सिर्फ मिट्टी की सेहत सुधारी है, बल्कि किसानों की आमदनी भी बढ़ाई है.

लालपुर के किसान बने मिसाल
विंध्य के लालपुर गांव के किसान मनसुख लाल कुशवाहा आज कई किसानों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं. उन्होंने साल 2021 में कोरोना काल के दौरान वर्मी कम्पोस्ट बनाना शुरू किया. शुरुआत छोटे स्तर से हुई, लेकिन आज वे अमेरिकन वैरायटी के केंचुओं से उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद तैयार कर रहे हैं.

उनका कहना है कि इस खाद के इस्तेमाल से फसल की पैदावार में साफ बढ़ोतरी हुई है और रासायनिक उर्वरकों पर खर्च भी काफी कम हो गया है.

कई जिलों में हो रही सप्लाई
मनसुख लाल का वर्मी कम्पोस्ट अब सीधी, सतना, मैहर और सिंगरौली जैसे जिलों में भेजा जा रहा है. मांग इतनी ज्यादा है कि स्टॉक तैयार होते ही बिक जाता है. इसकी कीमत 10 से 12 रुपये प्रति किलो है, जिससे किसानों को किफायती दर पर अच्छी खाद मिल रही है.

ऐसे तैयार होता है वर्मी कम्पोस्ट
मनसुख बताते हैं कि वर्मी कम्पोस्ट तैयार करने का बेड सिस्टम सबसे आसान तरीका है. इसमें 3-4 फीट चौड़ा बेड बनाया जाता है. जमीन पर प्लास्टिक शीट बिछाकर चारों ओर ईंटों की घेराबंदी की जाती है. फिर गोबर की परत डालकर उसमें केंचुए छोड़े जाते हैं. ऊपर से पुआल या घास-फूस से ढककर नियमित पानी का छिड़काव किया जाता है. कुछ ही समय में केंचुए गोबर को खाकर बढ़िया जैविक खाद तैयार कर देते हैं.

वे बताते हैं कि कुछ किसान बेड के नीचे पिन्नी बिछाते हैं, जिससे लागत बढ़ जाती है. लेकिन वे कम लागत की तकनीक अपनाकर सस्ती खाद उपलब्ध करा रहे हैं.

जैविक खेती की ओर बढ़ता विंध्य
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि वर्मी कम्पोस्ट मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनाए रखता है. नई पीढ़ी के किसान तेजी से जैविक खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं. कम लागत, बेहतर उत्पादन और बाजार में बढ़ती मांग इन तीन वजहों से वर्मी कम्पोस्ट विंध्य क्षेत्र में नई खेती क्रांति की शुरुआत कर रहा है.

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shweta singh

Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें



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