डॉ. अरुण श्रीवास्तव का फाइल फोटो।
ग्वालियर के गजरा राजा मेडिकल कॉलेज (जीआरएमसी) में शनिवार को डॉक्टर अरुण श्रीवास्तव के पार्थिव शरीर का देहदान किया गया। यह उनकी अंतिम इच्छा थी कि उनके शरीर का उपयोग मेडिकल के विद्यार्थी अध्ययन के लिए करें, ताकि भविष्य में वे समाज की सेवा कर सकें।
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परिजनों द्वारा डॉ. श्रीवास्तव की पार्थिव देह को जीआरएमसी के एनाटॉमी विभाग लाया गया। इससे पहले शहर के गांधी नगर स्थित उनके निवास पर उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।
डॉक्टर अरुण श्रीवास्तव के पार्थिव शरीर को GRMC को सौंपते हुए परिजन।
एमबीबीएस यहीं से किया, अंत में उसी कॉलेज को देह समर्पित
डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने साल 1981 में गजरा राजा मेडिकल कॉलेज, ग्वालियर से ही एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की थी। वे लंबे समय तक थाटीपुर डिस्पेंसरी में कार्यरत रहे और दो वर्ष पूर्व ही सेवानिवृत्त हुए थे। शुक्रवार शाम उनके निधन के बाद, परिजनों ने मेडिकल कॉलेज के डीन प्रो. डॉ. आर.के.एस. धाकड़ से देहदान की इच्छा व्यक्त की थी। डॉ. धाकड़ ने इस पुनीत कार्य के लिए उनके बेटे डॉ. अभिनव को साधुवाद दिया।
एनाटॉमी डिपार्टमेंट के विभागाध्यक्ष डॉ. मनीष चतुर्वेदी ने बताया कि यह इस साल कॉलेज को मिली दूसरी देह है, जबकि अब तक कुल 60 देहदान हो चुके हैं। उन्होंने यह भी बताया कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर देहदान करने वालों की संख्या बढ़ रही है, जिससे लोग जागरूक हो रहे हैं।