‘हिन्दुस्तान की जमीन को नहीं पूज सकते’, उज्जैन के इमाम ने वन्दे मातरम पर ये क्या कह दिया?

‘हिन्दुस्तान की जमीन को नहीं पूज सकते’, उज्जैन के इमाम ने वन्दे मातरम पर ये क्या कह दिया?


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गृह मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों और औपचारिक आयोजनों में वंदे मातरम का गायन या वादन किया जाएगा. आदेश में यह भी कहा गया है कि इस दौरान उपस्थित लोगों को सम्मान स्वरूप खड़ा होना होगा. यदि राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान दोनों प्रस्तुत किए जाते हैं, तो पहले वंदे मातरम गाया जाएगा. अब कुछ मुस्लिम संगठनों ने भी राष्ट्रगीत के सभी अंतरों को अनिवार्य रूप से गाए जाने के फैसले पर आपत्ति दर्ज कराई है.

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इमाम मुफ्ती सैय्यद नासिर अली नदवी

केंद्र सरकार के उस फैसले को लेकर देश के कई हिस्सों में विरोध के स्वर सुनाई देने लगे हैं, जिसमें राष्ट्रगीत वंदे मातरम को राष्ट्रगान जन गण मन की तरह सम्मान देने को अनिवार्य किया गया है. इस फैसले को लेकर जहां एक ओर समर्थन देखने को मिल रहा है. वहीं दूसरी ओर कुछ वर्गों में असहमति भी सामने आ रही है. फिलहाल, यह मुद्दा सामाजिक और संवैधानिक बहस का विषय बन गया है. अब इस फैसले की गूंज मध्य प्रदेश के उज्जैन तक भी पहुंच गई है. शहर के इमाम मुफ्ती सैय्यद नासिर अली नदवी ने इसे धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा मुद्दा बताते हुए सरकार से फैसले पर पुनर्विचार की अपील की है.

सैय्यद नासिर अली नदवी ने कही ये बात
इमाम मुफ्ती सैय्यद नासिर अली नदवी ने कहा कि हमारा जो मुल्क, हिन्दुस्तान है. वहां पर कई खुद को मानने वाले लोग भी हैं और एक खुदा को भी मानने वाले लोग हैं. हम एक से यह नहीं कह सकते हैं कि आप एक से ज्यादा को मानें. या फिर जो करोड़ों खुदा को मान रहे हैं. उन्हें यह नहीं कह सकते हैं कि आप एक को मानें. हिन्दुस्तान ऐसा चमन है, यहां हर तरह के फूल को रखा गया है.

उन्होंने कहा कि वन्दे मातरम जो हमारा राष्ट्रीय गीत है. उसमें साफ तौर पर लिखा है कि हम इस धरती की पूजा करते हैं. इस्लाम इस बात की इजाजत नहीं देता. इस्लाम का जो असल आधार है एकेश्वरवाद. इस्लाम में एक खुदा के साथ हम किसी को शरीक नही कर सकते. न हम हिन्दुस्तान की जमीन को पूज सकते हैं और न हम मक्का मदीना की जमीन को पूज सकते हैं. हम मोहम्मद साहब को भी पूजते नहीं है. हम उनके मार्गदर्शन पर चलते हैं. इस्लाम एकेश्वरवाद पर आधारित है और हम इसको बिल्कुल छोड़ नहीं सकते हैं.

सरकार से फैसला वापस लेने की कर डाली अपील
उन्होंने कहा कि हम हुकूमत से आग्रह करेंगे कि इस तरह का कोई भी कार्यक्रम ना चलाएं, जो किसी धर्म को ठेस पहुंचाते हों. या आस्था पर हमला करते हैं. हम चाहेंगे कि इस फैसले को वापस ले लें. हम अपने बच्चों को स्कूल क्या ऐसी किसी जगह नहीं भेज सकते, जहां उनके ईमान के साथ सौदा होता हो. हिंदुस्तान की पूजा का हमारे यहां बिल्कुल जिक्र नहीं है. इस्लाम इसकी बिल्कुल इसकी इजाजत नहीं देता है.

भाजपा प्रवक्ता ने किया पलटवार
भाजपा प्रवक्ता मिलन भार्गव ने कहा कि उज्जैन के इमाम द्वारा वंदे मातरम को लेकर दिए गए बयान पर भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि जो लोग वंदे मातरम को लेकर इस तरह के बयान दे रहे हैं असल में वह जिन्ना की सोच वाले लोग हैं, जब कोई नियम कानून देश में लागू हुआ है तो प्रजातांत्रिक देश होने के चलते उसे सबको मानना जरूरी होता है. ऐसे में कोई उसे मानने से कैसे इंकार कर सकता है. यह किसी की पसंद ना पसंद का विषय नहीं है बल्कि है देश हित का विषय है.



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