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Baba Baijnath: मध्यप्रदेश के आगर मालवा का प्रसिद्ध बाबा बैजनाथ मंदिर इस बार महाशिवरात्रि पर खास चर्चा में है. शिवभक्ति की अनूठी मिसाल उस वक्त देखने को मिली, जब ऑस्ट्रेलिया से बैजनाथ महादेव की एक भक्त विशेष तौर पर दर्शन के लिए आगर मालवा पहुंचीं. खास बात यह है कि उनका इस मंदिर से जुड़ाव 148 साल पुराने इतिहास से जुड़ा हुआ है.
ऑस्ट्रेलिया से बाबा बैजनाथ के दर्शन करने पहुंची महिला
Baba Baijnath In Agar Malwa: मध्य प्रदेश के आगर मालवा स्थित बाबा बैजनाथ मंदिर से कई चमत्कारी घटनाएं जुड़ी हुई हैं और इसका अपना एक ऐतिहासिक महत्व है. अब महाशिवरात्री पर मंदिर खास वजह से चर्चा में है. बाबा बैजनाथ मंदिर के दर्शन के लिए शांति मैक्लवर ऑस्ट्रेलिया से आगर मालवा पहुंची हैं. शनिवार को उन्होंने बाबा बैजनाथ के दर्शन कर विशेष पूजा-अर्चना की. महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर मुख्य पुजारी ने उनका पुष्पमालाओं से स्वागत किया और विधि-विधान से विशेष पूजन संपन्न करवाई.
कर्नल मार्टिन की चौथी पीढ़ी की वंशज पहुंची बाबा बैजनाथ मंदिर
दरअसल, साल 1878 में द्वितीय एंग्लो-अफगान युद्ध के दौरान अंग्रेज अधिकारी कर्नल मार्टिन युद्ध में शामिल हुए थे. युद्ध में उनकी सुरक्षित वापसी के लिए उनकी पत्नी ने बाबा बैजनाथ से प्रार्थना की थी और मंदिर के जीर्णोद्धार का संकल्प लिया था. जब कर्नल मार्टिन सकुशल लौटे, तो उन्होंने अपनी प्रतिज्ञा पूरी करते हुए मंदिर का कायाकल्प करवाया.
युद्ध से लौटकर मार्टिन दंपति दोनों ही नियमित रूप से बैजनाथ महादेव मंदिर में आकर पूजा-अर्चना करने लगे. अपनी पत्नी की इच्छा पर कर्नल मार्टिन ने साल 1883 में बैजनाथ महादेव मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया, जिसका शिलालेख आज भी आगर-मालवा के इस मंदिर में लगा है. पूरे भारत भर में अंग्रेजों द्वारा निर्मित यह एक मात्र हिन्दू मंदिर है. इसी तरह कई प्राचीन चमत्कारीक घटनाएं आज भी भक्तों को बरबस ही मंदिर की ओर खींच लेती है. अब उसी कर्नल मार्टिन की चौथी पीढ़ी की वंशज शांति मैक्लवर ऑस्ट्रेलिया से आगर मालवा पहुंची हैं.
शांति हो उठीं भावुक
इस पूरी कहानी का एक और अहम पहलू यह है कि शांति मैक्लवर तक पहुंचने का श्रेय आगर मालवा में पदस्थ यातायात थाना प्रभारी जगदीश यादव को जाता है. ऐतिहासिक दस्तावेजों और तथ्यों पर शोध कर उन्होंने कर्नल मार्टिन के वंशजों की जानकारी जुटाई और उनसे संपर्क स्थापित किया. उनके प्रयासों से ही वर्षों पुराना यह इतिहास फिर से जीवंत हो सका. जानकारी मिलने के बाद शांति मैक्लवर ने भारत आने का निर्णय लिया और अपने पूर्वजों की आस्था से जुड़े इस मंदिर में पहुंचकर भावुक हो उठीं.
पीढ़ियों को जोड़ता है बाबा बैजनाथ का आशीर्वाद
महाशिवरात्रि पर सजे बाबा बैजनाथ के दरबार में यह दृश्य केवल दर्शन भर नहीं था, बल्कि डेढ़ सदी पुराने विश्वास की पुनरप्रतिष्ठा थी. समय बदला, पीढ़ियां बदलीं, देश बदले, लेकिन आस्था की डोर अटूट रही. ऑस्ट्रेलिया से आगर मालवा तक की यह यात्रा बताती है कि श्रद्धा की कोई सरहद नहीं होती और बाबा बैजनाथ का आशीर्वाद पीढ़ियों को जोड़ता है.